अगर आप Tax या GST के बारे में सीख रहे हैं, तो Customs Duty और Excise Duty के बीच अंतर समझना आपके लिए बहुत जरूरी है, दोनों ही सरकार द्वारा लगाए जाने वाले अप्रत्यक्ष कर (Indirect Taxes) हैं, लेकिन इनका उद्देश्य और लागू होने का तरीका अलग अलग है।
आज इस पोस्ट में हम आसान भाषा में कस्टम ड्यूटी और एक्साइज ड्यूटी दोनों के बीच अंतर को उदाहरण और नए नियम के साथ समझेंगे, इसीलिए आप इस पोस्ट को लास्ट तक पढ़ें।
इस पोस्ट में क्या क्या है?
कस्टम ड्यूटी और एक्साइज ड्यूटी में अंतर
एक लाइन में कहूं तो कस्टम ड्यूटी सीमा (Border) पर लगती है और एक्साइज ड्यूटी फैक्ट्री (Factory) के दरवाज़े पर लगती है, एक टेबल से समझे:
| फीचर | कस्टम ड्यूटी (Customs Duty) | एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) |
| कहाँ लगती है? | विदेश से सामान देश की भौगोलिक सीमा के अंदर (Borders, Airport या Ports) आने पर। | देश के अंदर फैक्ट्री या मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में। |
| किस पर लगती है? | सामान के आयात (Import) या निर्यात (Export) पर। | देश के भीतर सामान के उत्पादन (Production या Manufacturing) पर। |
| उद्देश्य क्या है? | घरेलू उद्योगों को बचाना और विदेशी सामान को नियंत्रित करना। | देश के अंदर हो रहे उत्पादन से टैक्स (Revenue) लेना। |
| जीएसटी लागू होने के बाद? | यह आज भी पूरी तरह लागू है। | ज्यादातर सामान अब जीएसटी में मिल चुकी है, लेकिन कुछ खास चीज़ों पर अभी भी लागू है। |
| कौन कलेक्ट करता है? | केंद्र सरकार | केंद्र सरकार |
बहुत लोगों को लगता है जीएसटी लगने के बाद Customs Duty और Excise Duty खत्म हो गई है, लेकिन यह गलत है सही जगह पर दोनों का इस्तेमाल अभी भी होता है, अपने भी ऊपर के टेबल से समझ लिया होगा, अब नीचे से इनको और विस्तार से समझे।
कस्टम ड्यूटी (Customs Duty) को विस्तार से समझें
जब भी कोई सामान भारत की सीमा को पार करके देश के अंदर आता है इसे इंपोर्ट कहते है, या जब कोई सामान देश से बाहर जाता है तो उसे एक्सपोर्ट कहते है, तब उस सामान पर कस्टम ड्यूटी लगती है।
एक उदाहरण: अगर आप चाईना या किसी दूसरे देश से अपने बिजनेस या कोई मशीनें मांगते हैं, तो जैसे ही वह सामान भारत के बंदरगाह (Port) या एयरपोर्ट पर उतरेगा, तब कस्टम विभाग उस पर टैक्स वसूलेगा, इसे इम्पोर्ट ड्यूटी भी कहते हैं, इससे सरकार को अच्छी कमाई होती है।
ध्यान दें:- भारत सरकार एक्सपोर्ट (Export) को बढ़ावा देने के लिए ज्यादातर सामानों पर कोई टैक्स नहीं लगाती, बल्कि उन्हें टैक्स फ्री (Duty-Free) रखती है या उन पर इंसेंटिव देती है ताकि देश का बिज़नेस विदेशों में बढ़ सके।
लेकिन जब देश के अंदर किसी ज़रूरी चीज़ की कमी होने लगती है और भारतीय व्यापारी ज़्यादा मुनाफे के चक्कर में उसे धड़ाधड़ विदेशों में बेचने लगते हैं, तब सरकार उस चीज़ के एक्सपोर्ट पर ‘एक्सपोर्ट ड्यूटी’ लगा देती है ताकि उसे बाहर भेजना महंगा हो जाए और वह सामान हमारे अपने देश के लोगों के लिए बच सके।
भारत सरकार 99% सामानों के एक्सपोर्ट पर कोई ड्यूटी नहीं लगाती है ताकि भारतीय बिज़नेस को बढ़ावा मिल सके, एक्सपोर्ट ड्यूटी सिर्फ कुछ गिने चुने कच्चे मालों या संकट के समय अनाज (जैसे प्याज, चावल) या (लोहा, चमड़ा) इनके निर्यात को रोकने के लिए लगती है।
GST में LUT का नियम: 99% आइटम पर एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बनाया LUT, आप ‘लेटर ऑफ अंडरटेकिंग’ (LUT) का इस्तेमाल करके बिना ₹1 जीएसटी चुकाए सामान एक्सपोर्ट कर सकते हैं।
एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) को विस्तार से समझें
जब भारत की सीमा के अंदर कोई फैक्ट्री में किसी सामान बनता है, तो उस सामान के फैक्ट्री से बाहर निकलने से पहले सरकार जो टैक्स लेती है, उसे सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी कहते हैं।
GST के बाद का सच: 2017 में GST आने के बाद कपड़े, मोबाइल, कार जैसे 95% सामानों से एक्साइज ड्यूटी खत्म कर दी गई है और उसकी जगह जीएसटी ने ले ली है।
आज यह कहाँ लगती है? सरकार ने कुछ चीज़ों को जानबूझकर जीएसटी से बाहर रखा है, जिन पर आज भी भारी एक्साइज ड्यूटी लगती है जैसे:
- पेट्रोल और डीजल (Petroleum Products)
- शराब (Alcohol for human consumption)
- तंबाकू और सिगरेट (Tobacco products)
इस पोस्ट से जाने:- Tax और GST में क्या अंतर है? जानें आसान तुलना और पूरी जानकारी
Customs Duty के प्रकार
कस्टम ड्यूटी क्या हैं यह तो अपने ऊपर जाना अब समझते है कस्टम ड्यूटी कितने प्रकार के होते है, क्योंकि एक इंपोर्ट किए गए सामान हर कोई तरह के टैक्स लगते है:
- Basic Customs Duty (BCD)
- Social Welfare Surcharge (SWS)
- IGST on Import
- Anti-Dumping Duty (जहाँ लागू)
- Safeguard Duty (जहाँ लागू)
भारत में यह सब DGTR लागू करता है, अगर आप बाहर से सामान मांगा रहे है ऑनलाइन सेल के लिए तो इस पोस्ट से पूरा समझे कि कस्टम ड्यूटी कैसे लगता है, सभी हिसाब:- विदेश से भारत सामान मंगाने पर Custom Duty और Tax कैसे लगता है
क्या इंपोर्ट पर दिए गए IGST का ITC मिलता है?
अगर आप अपने बिजनेस के लिए सामान इंपोर्ट करते हैं और जीएसटी में रजिस्टर्ड हैं, तो इंपोर्ट के समय दिए गए IGST का Input Tax Credit (ITC) ले सकते है, कुछ नियम के साथ।
आपको BCD या SWS के नाम पर दिए गए कस्टम ड्यूटी यह वापस नहीं मिलेंगे, लेकिन उनपर दिए गए IGST को वापस ले सकते है आईटीसी का दावा कर, इसके लिए आपको जीएसटी के सभी नियम का पालन करना होगा और आपके पास Bill of Entry और GST रिकॉर्ड सभी सही होने चाहिए।
एक उदाहरण से समझे:- किसी मोबाइल कंपनी ने बाहर के देश से बना बनाया मोबाइल फोन या उसके पार्ट्स भारत में इम्पोर्ट करती है, तब कंपनी अपने जेब से कस्टम ड्यूटी देकर एयरपोर्ट या बंदरगाह से माल को हमारे देश में ले आते है, यह चुकाया गया पैसा मोबाइल की कॉस्ट में ऐड हो जाती है।
अब जब वह कंपनी उस मोबाइल को भारत के बाज़ार में किसी डीलर, दुकानदार या सीधे ग्राहक को बेचती है, तब सेल के समय उस मोबाइल पर 18% जीएसटी लगता है, लेकिन यहाँ ट्विस्ट यह है कि यह जीएसटी कंपनी अपनी जेब से नहीं देती, बल्कि सामान खरीदने वाले ग्राहक से वसूल करती है और सरकार को जमा कर देती है।
जब कंपनी भारत में मोबाइल बेचकर ग्राहकों से जीएसटी वसूलती है, तो वह इम्पोर्ट के समय चुकाए गए IGST का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम कर लेती है, मतलब ग्राहकों से लिए गए जीएसटी में से वह अपना पुराना चुकाया हुआ IGST घटा (माइनस) देती है और सिर्फ बचा हुआ जीएसटी ही सरकार को देती है, (कस्टम ड्यूटी का क्रेडिट नहीं मिलता, वह कीमत का हिस्सा बन जाती है) जो ऊपर हमने आपको बताया।
इस पोस्ट से जान सकते है:- ITC का दावा क्या है और इसे कैसे करें? जानें इनपुट टैक्स क्रेडिट के नियम और GSTR-2B का महत्व
क्या सभी आइटम पर कस्टम ड्यूटी सेम है?
अगर बात सभी आइटम पर कस्टम ड्यूटी की बात की जाए तो सब अलग अलग है, सभी चीज का HSN Code होता है, इसी एचएसएन कोड के ऊपर कस्टम ड्यूटी का वैल्यू तय होता है।
इस पोस्ट से जान सकते है:- GST में HSN और SAC कोड क्या है? जानें दोनों में अंतर और आपके लिए क्यों ज़रूरी हैं
FAQs: कुछ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. कस्टम ड्यूटी कौन देता है?
जो सामान बाहर से मांगता है (Importer) या नियमों के अनुसार जो व्यक्ति है वह।
Q2. क्या हर वस्तु पर एक्साइज ड्यूटी लगती है?
जी नहीं जीएसटी आने के बाद अब केवल कुछ विशेष वस्तुओं पर ही लागू है।
Q3. क्या इंपोर्ट पर जीएसटी भी लगता है?
जी हाँ कई सारी मामलों में कस्टम ड्यूटी के साथ Import IGST भी लगता है।
इस पोस्ट से जान सकते है:- GST क्या है? जानें वस्तु एवं सेवा कर के 4 प्रकार (CGST, SGST, IGST, UTGST) और उनका मतलब
निष्कर्ष: दोनों ड्यूटी के बारे में
Customs Duty विदेश से आने या जाने वाले सामान पर लगती है, लेकिन Excise Duty भारत में बने कुछ विशेष आइटम पर लगती है, दोनों करों का उद्देश्य अलग अलग है, इसलिए इनके नियम भी अलग अलग हैं।
अंत में आपको यही कहना चाहूंगा आप एक्साइज ड्यूटी या कस्टम ड्यूटी कुछ भी बोले टैक्स का पैसा सरकार के पास ही आना है घूम फिर के, सिर्फ समझने के लिए टैक्स का पैसा कहां से आया है देश के अंदर से के बाहर से इसके लिए ऐसा नाम रखा गया है।
यह जानकारी इम्पोर्ट या एक्सपोर्ट और ई-कॉमर्स (जैसे Amazon या Flipkart सेलर) के लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि सेलर्स को कस्टम ड्यूटी का गणित समझना सबसे ज़्यादा ज़रूरी होता है।
में उम्मीद करता हूं कि आपको एक्साइज ड्यूटी और कस्टम ड्यूटी के बीच का अंतर पता चला है, अपने दोस्त और सोशल मीडिया पर इस पोस्ट को शेयर कर उनको भी जानकारी लेने में मदद कीजिए।
इस पोस्ट से जान सकते है:- ऑनलाइन सामान बेचना है? आपके लिए GST के जरूरी नियम (सरल भाषा में समझें)
इस पोस्ट से जाने:- भारत से विदेश सामान कैसे बेचें? एक्सपोर्ट पर टैक्स नियम और सरकारी फायदों की पूरी जानकारी