क्या आपने कभी सोचा है कि एक आम भारतीय अपनी ज़िंदगी में कितना टैक्स भरता है? अक्सर लोगों को लगता है कि अगर वह इनकम टैक्स (Income Tax) के दायरे में नहीं आते, तो वह सरकार को कोई टैक्स नहीं दे रहे हैं, लेकिन यह एक बहुत बड़ा गलतफहमी है।
सच तो यह है कि भारत का हर एक नागरिक चाहे वह एक दिहाड़ी मज़दूर हो या मल्टीनेशनल कंपनी का सीईओ हो सुबह उठकर दांत मंजन करने से लेकर खाना खाने और ऑनलाइन शॉपिंग के बाद रात को पंखा चलाकर सोने तक, हर सेकंड टैक्स चुका रहे है जाने अनजाने में।
हर एक आम भारतीय इस “टैक्स चक्रव्यूह” (Tax Circle) में कैसे फंसा हुआ है, हर टैक्सपेयर इस पोस्ट को पढ़ना चाहिए ताकि सच क्या है पता चले, आईए समझते हैं भारत के इस टैक्स सर्कल की पूरी कहानी।
इस पोस्ट में क्या क्या है?
इस ‘टैक्स चक्रव्यूह’ की शुरुआत कहाँ से होती है?
एक आम नौकरीपेशा या बिजनेसमैन के लिए टैक्स का पहला चक्कर उसकी कमाई (Earning) से शुरू होता है, जिसे हम सीधे सरकार को देते है।
डायरेक्ट टैक्स (Direct Tax): जब आपके हाथ में सैलरी आती है या बिज़नेस से प्रॉफिट होता है, तो सरकार सबसे पहले उस पर इनकम टैक्स (Income Tax) या TDS के रूप में अपना हिस्सा पहले ही काट लेती है।
यहाँ आपने बिना कुछ खर्च किए अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा (5% से लेकर 30% या उससे ज्यादा) सरकार को दे दिया, यह इनकम पर टीडीएस या टैक्स तब लगता है जब आपके कमाई टैक्स स्लैब से ऊपर चला जाता है।
सुबह से रात तक: “छिपा हुआ टैक्स” (Indirect Tax)
अब बची हुई सैलरी को जब आप खर्च करने बाज़ार निकलते हैं, तो शुरू होता है GST (Goods and Services Tax) का असली खेल, इसे इनडायरेक्ट टैक्स कहते हैं क्योंकि यह सीधे आपकी जेब से नहीं, बल्कि आपके तरफ से खरीदे गए सामान के बिल में जुड़कर सरकार तक जाता है।
आईए अब आपकी सुबह से रात तक की रूटीन से इसे समझते हैं:
सुबह की चाय और ब्रश: सुबह उठते ही जो टूथपेस्ट और ब्रश आप इस्तेमाल करते हैं, उस पर 18% जीएसटी होता है, चायपत्ती या बिस्कुट पर भी जीएसटी है।
दफ्तर का सफर (The Fuel Trap): जब आप अपनी बाइक या कार में पेट्रोल-डीजल भरवाते हैं, तो उस पर जीएसटी नहीं, बल्कि केंद्र सरकार की Excise Duty और राज्य सरकार का VAT लगता है, आपको जानकर हैरानी होगी कि पेट्रोल की असली कीमत पर लगभग 40% से 50% तक केवल टैक्स होता है, इसके बाद रास्ते में पड़ने वाले Toll Tax को तो आप भूल ही नहीं सकते।
दोपहर का खाना और ऑफिस के खर्चे: अगर आप ऑफिस में हैं और ऑनलाइन खाना मंगाते हैं (Zomato या Swiggy) से, तो खाने पर 5% जीएसटी और उसकी डिलीवरी सर्विस पर 18% जीएसटी लगता है, ऑफिस के लिए खरीदा गया मोबाइल या लैपटॉप भी 18% जीएसटी के साथ आता है।
शाम का मनोरंजन और इंटरनेट: घर आकर जब आप यूट्यूब पर वीडियो देखते हैं, नेटफ्लिक्स का ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन लेते हैं या मोबाइल का रीचार्ज कराते हैं, तो उस बिल पर भी सीधे 18% जीएसटी कटा होता है।
इस पोस्ट से जान सकते है:- GST क्या है? जानें वस्तु एवं सेवा कर के 4 प्रकार (CGST, SGST, IGST, UTGST) और उनका मतलब
संपत्ति और बचत पर भी टैक्स (The Property Loop)
मान लीजिए आपने सभी टैक्स चुकाने के बाद बचे हुए पैसों से एक घर खरीदने का सपना देखा:
- घर खरीदते वक्त आप सरकार को Stamp Duty और Registration Charges (लगभग 5% से 8%) देते हैं।
- घर बनने के बाद हर साल नगर निगम को Property Tax (हाउस टैक्स) देना पड़ता है।
- बाद में अगर आपने बचे हुए पैसों को बैंक एफडी (FD) या शेयर बाज़ार में डाल दिया, तो वहां से मिलने वाले ब्याज या मुनाफे पर फिर से TDS और Capital Gains Tax (LTCG/STCG) का फंदा तैयार रहता है।
इस पोस्ट से जान सकते है:- म्यूचुअल फंड निवेश और विड्रॉल मुनाफे पर टैक्स की पूरी जानकारी
एक टेबल से और आसानी से समझे
| दैनिक गतिविधि | टैक्स/शुल्क का प्रकार | कब लागू हो सकता है? |
| सुबह की चाय, कॉफी या पैकेज्ड खाद्य आइटम्स खरीदना। | जीएसटी | कई सारी पैकेज्ड आइटम पर |
| नहाना और तैयार होना (साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट आदि)। | जीएसटी | अधिकांश FMCG आइटम पर |
| टोल रोड का इस्तेमाल। | टोल टैक्स | एक्सप्रेसवे या टोल रोड पर |
| रेस्टोरेंट में खाना खाना। | जीएसटी | लागू दर के अनुसार |
| ऑनलाइन शॉपिंग। | जीएसटी | अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं पर |
| बैंक सेवाएँ (ATM शुल्क, प्रोसेसिंग फीस आदि)। | जीएसटी | बैंक द्वारा लिए गए सेवा शुल्क पर |
| मोबाइल रिचार्ज / इंटरनेट / डीटीएच। | जीएसटी | टेलीकॉम सेवाओं पर |
| पेट्रोल या डीज़ल भरवाना। | केंद्रीय और राज्य कर (जीएसटी नहीं) | ईंधन खरीदते समय |
| घर खरीदना या बेचना। | Stamp Duty, Registration Fee, कुछ मामलों में जीएसटी | संपत्ति के प्रकार और लेन-देन के अनुसार |
| शेयर, म्यूचुअल फंड या सोने में निवेश। | Capital Gains Tax, STT (जहाँ लागू), Stamp Duty | निवेश बेचने या लेन-देन के समय |
| नौकरी या बिजनेस से इनकम। | Income Tax, TDS (जहाँ लागू) | आय टैक्सेबल होने पर |
इस पोस्ट से जान सकते है:- Tax क्यों भरे? जाने टैक्स भरने के फायदे और नुकसान (Penalty aur Benefits)
कुछ ध्यान देने वाली बातें
सुबह से रात तक हम कितना टैक्स देते हैं? यह सवाल का का जवाब एकदम सटीक संख्या से कोई नहीं बता सकता, क्योंकि हर व्यक्ति की इनकम, खर्च, इन्वेस्ट, बिजनेस, खरीदारी और लाइफ स्टाइल अलग अलग होती है, इसलिए यह कहना गलत है कि हर व्यक्ति इतना ही टैक्स देता है।
भारत में हर व्यक्ति एक जैसे टैक्स नहीं देता, लेकिन यह सच है कि रोजमर्रा की कई वस्तुओं और सेवाओं पर किसी न किसी तरीका से टैक्स का असर होता है, इसलिए टैक्स की सही जानकारी होना हर एक नागरिक के लिए जरूरी है, क्योंकि कई बार हमें टैक्स देने का एहसास भी नहीं होता।
इस पोस्ट से जान सकते है:- हमारे भारत में कितने प्रकार के टैक्स हैं? जानिए पूरी जानकारी
भारत के पूरे ‘टैक्स सर्कल’ का निष्कर्ष
एक अनुमान के मुताबिक, एक मध्यमवर्गीय भारतीय अपनी पूरी कमाई का लगभग 30% से 40% हिस्सा किसी न किसी तरह में (डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स मिलाकर) सरकार को वापस दे देता है।
ऐसा नहीं है कि सब कुछ पर जीएसटी लगा है कुछ चीज़ें पर अभी भी जीएसटी फ्री भी है जो हमारा रोज के काम आने वाले सामान है जैसे दूध, ताजे फल या सब्जी आदि।
अंत में एक ही बात जब में यह सब बात अपने करीबी लोगो को बताता हूं तब भारतीय टैक्स सिस्टम को लेकर सभी हमेशा एक बात करते है की जब हम कमाते हैं तब भी टैक्स देते हैं, और जब खर्च करते हैं तब भी टैक्स देते हैं।
में उम्मीद करता हूं कि आपने जाना कैसे हम सुबह से लेकर रात में सोने तक टैक्स दे रहे है सरकार को, इस जानकारी को अपने दोस्त और सोशल मीडिया पर शेयर कर उनको भी जानकारी लेने में मदद कीजिए।
इस पोस्ट से जान सकते है:- क्या आपकी सैलरी में GST शामिल है? सैलरी स्लिप, TDS और GST का पूरा गणित