अगर आप भारत से विदेश समान बेचने जा रहे है तो आपके लिए जीएसटी पर एक बड़ा खुशखबरी है, क्योंकि भारत सरकार अभी एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए बहुत सारी छूट दे रही है, जो आज हम इस पोस्ट में आपको बताएंगे।
हमारे भारत सरकार का लक्ष्य देश को “ग्लोबल एक्सपोर्ट हब” बनाना है, इसीलिए, अगर आप भारत से बाहर सामान बेचते हैं, तो सरकार आपसे टैक्स लेने के बदले आपको कई तरह की छूट और रिवॉर्ड देती है।
अगर आप एक छोटे व्यापारी हैं या ई-कॉमर्स (Amazon Global, Etsy) के मदद पर भारत से विदेश में सामान बेचना चाहते हैं, तो आप यह पोस्ट लास्ट तक पढ़े सभी जानकारी आपको यहां मिल जाएंगे।
इस पोस्ट में क्या क्या है?
Export क्या होता है?
अगर आप भारत में बिजनेस करते हैं और अपना सामान विदेश में बेचते हैं इसे एक्सपोर्ट करते हैं, एक्सपोर्ट में Goods या Services दोनों आता हैं।
एक्सपोर्ट और GST: (Zero-Rated Supply)
जीएसटी नियमों के अनुसार, एक्सपोर्ट को Zero-Rated Supply माना जाता है, इसका मतलब है कि विदेश भेजे जाने वाले सामान पर टैक्स रेट 0% होता है, लेकिन यह जीएसटी सिस्टम के अंदर ही आता हैं।
हमारे देश में एक्सपोर्ट करने के दो ही तरीका हैं:
Option 1 (LUT के अंदर): आप सरकार को बिना जीएसटी दिए सामान विदेश भेज सकते हैं, इसके लिए आपको जीएसटी पोर्टल पर एक Letter of Undertaking (LUT) जमा करना होता है।
Option 2 (IGST के साथ): आप पहले जीएसटी सरकार को देते हैं और सामान एक्सपोर्ट होने के बाद सरकार से उस पूरे टैक्स का रिफंड क्लेम करते हैं।
ज्यादा तर लोग ऑप्शन 2 को चूस करते है, और सरकार जान बूझकर एक्सपोर्ट पर लगने वाले जीएसटी को जीरो किया है ताकि लोग विदेश सामान बेचने के लिए आगे आए।
एक्सपोर्टर्स के लिए 3 सबसे बड़े सरकारी फायदे
देश से बाहर एक्सपोर्ट पर टैक्स बचाने के अलावा, सरकार आपको पैसे भी वापस देती है, क्योंकि सरकार एक्सपोर्ट को प्रमोट करना चाहता है:
RoDTEP स्कीम: इसका मतलब है (Remission of Duties and Taxes on Exported Products), एक्सपोर्ट करते समय आपने जो छिपे हुए टैक्स (जैसे बिजली पर टैक्स, मंडी टैक्स, वैट) चुकाए हैं, सरकार उनका 0.5% से 4% तक आपको रिफंड कर देती है।
Duty Drawback (DBK): सामान बनाने में इस्तेमाल हुए कच्चे माल (Raw Material) पर दी गई कस्टम ड्यूटी सरकार आपको वापस कर देती है।
EPCG स्कीम: यदि आप एक्सपोर्ट के लिए कोई मशीनरी विदेश से मंगाते हैं, तो उस पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी भी माफ़ हो सकती है।
इन तीनों का फायदा लेने के लिया आपको सही जानकारी, और डॉक्यूमेंट की जरूरत होगी, नियम में चेंज या ऊपर नीचे हो सकता है, इसीलिए आप गूगल में सर्च या वीडियो देखकर इनको पूरा जान लेजिए, में बताने लग जाऊंगा तो यह पोस्ट बहुत बड़ा हो जाएगा।
कुछ ज़रूरी डॉक्यूमेंट जो आपको काम आएगी
भारत से विदेश सामान भेजने के लिए और बिना टैक्स के पैसे बैंक अकाउंट में आने के लिए आपके पास यह 4 चीज़ें होनी चाहिए:
IEC Code (Import Export Code): यह IEC एक्सपोर्ट करने के लिए आपका एक लाइसेंस है।
GSTIN: टैक्स रिफंड (ITC) क्लेम करने के लिए जीएसटी नंबर चाहिए, या LUT (अगर GST नहीं देना चाहते) इसके लिए भी जरूरी है।
Shipping Bill: जब आपका सामान पोर्ट से निकलता है, तब कस्टम विभाग यह बिल आपके नाम से जारी करता है।
e-BRC: जब विदेश से पैसा आपके बैंक में आता है, तो आपका बैंक एक ‘Electronic Bank Realization Certificate’ जारी करता है, यह डॉक्यूमेंट साबित करता है कि आपका एक्सपोर्ट का पैसा भारत आ गया है।
Invoice: आपका बनाया हुआ इनवॉइस जो आप कस्टमर को देंगे, यह भी बहुत काम का चीज है खास कर एक्सपोर्ट पर जीरो जीएसटी के लिए, और बिल में हर प्रोडक्ट का HSN Code सही से पता कर डालें।
इस पोस्ट से जाने:- ITC का क्लेम क्या है और इसे कैसे करें? जानें इनपुट टैक्स क्रेडिट के नियम और GSTR-2B का काम
इनकम टैक्स और विदेशी मुद्रा (RBI Rules)
Realization Period: RBI के (FEMA Act) नियम के अनुसार, एक्सपोर्ट की गई तारीख से 9 महीने (270 दिन) के अंदर पैसा भारत आना चाहिए।
Income Tax: एक्सपोर्ट से होने वाला प्रॉफिट आपकी बिज़नेस इनकम मानी जाएगी और टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगेगा, हालांकि, SEZ (Special Economic Zones) में स्थित यूनिट्स को विशेष छूट मिलती है।
इस पोस्ट से जाने:- GST रिटर्न के बाद भी क्यों इनकम टैक्स देना पड़ता है? जानें जीएसटीआर और आईटीआर के असली अंतर
कुछ टिप्स आपके एक्सपोर्ट लिए
ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट: अगर आप छोटे आइटम (जैसे गहने या कपड़े) कुरियर से भेज रहे हैं, तो ‘CSB-V’ (Courier Shipping Bill) का इस्तेमाल करें, यह तरीका बहुत आसान है।
ITC क्लेम: एक्सपोर्ट करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपके पास जो इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) जमा है, उसे आप कैश रिफंड के रूप में वापस ले सकते हैं।
ज्यादा फ्रॉफिट: जब आप बाहर के इंटरनेशनल मार्केट पर सामान बेच रहे है तो इनमें प्रॉफिट ज्यादा होता है (200% से 300%) क्योंकि करेंसी डिफरेंस का फायदा मिलता है, यह बहुत बड़ी बात है अगर कोई कस्टमर आपसे बार बार सामन ले रहा है, और जीएसटी भी सरकार को नहीं देना है।
इस पोस्ट से जाने:- विदेश से कोई पैसे भेजे तो क्या भारत में टैक्स देना पड़ता है? पूरी जानकारी
Domestic vs Export Table
| Point | India Sale | Export |
| जीएसटी | 5% से 18% | 0% (नहीं लगता) |
| आईटीसी | पहले दिया हुआ मिलता है | पूरा वापस मिलता है |
| कस्टम ड्यूटी | नहीं लगता | सीमित चीजों पर लगता है |
ध्यान रखें: LUT को हर साल रिन्यू करना होता है हर फाइनेंसियल ईयर शुरू होने से पहले साथ में नया ऑर्डर प्लेस करने से पहले और टैक्स बचाने के लिए फेक एक्सपोर्ट दिखाने पर पेनल्टी लग सकता है।
इस पोस्ट से जाने:- टैक्स फ्री इनकम के 14 सोर्सेज: जानिए किन कमाई पर टैक्स नहीं देना होता
निष्कर्ष: एक्सपोर्ट पर जीएसटी के बारे में
भारत से विदेश में सामान बेचने पर जीएसटी नहीं लगता यह (Zero Rated) है, लेकिन इनकम टैक्स लागू होता है, आप सही तरीके से LUT और ITC का फायदा उठाकर अपने प्रॉफिट को बढ़ा सकते हैं।
नोट करें: विदेश में सामान बेचने से पहले आप सभी डॉक्यूमेंट प्रॉपर रखें, सरकारी नियम का पालन करें और मार्केट रिचर्च कर लीजिए नहीं तो प्रॉफिट के बजाय लॉस हो सकता है, क्योंकि नियम में चेंज और शिपिंग कॉस्ट कई बार प्रोडक्ट के प्राइस से कही ज्यादा हो जाता है।
में उम्मीद करता हूं की आपको विदेश सामान सेल पर जीएसटी के बारे में पता चला है, अपने दोस्त और सोशल मीडिया पर इस पोस्ट को शेयर कर उनको भी जानकारी लेने में मदद कीजिए।
इस पोस्ट से जाने:- विदेश से भारत सामान मंगाने पर Custom Duty और Tax कैसे लगता है