Tax Audit करवाना किसी भी बिजनेसमैन या प्रोफेशनल के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी होती है, हर कोई पूरी कोशिश करते हैं कि सब कुछ सही से हो, लेकिन इंसान होने के नाते या डेटा की कमी की वजह से कभी कभी Tax Audit Report (Form 3CD) फाइल होने के बाद हमें गलती का पता चलता है।
तब ऐसे सवाल मन में आता है क्या ऑडिट रिपोर्ट जमा होने के बाद उसे सुधारा जा सकता है? क्या इस पर पेनल्टी लगती है? देखिए टैक्स ऑडिट एक जटिल काम है, और इसमें बहुत सारी बात देखी जाती है।
अगर इसमें कोई गलती या गड़बड़ी हो जाती है, तो पेनल्टी, नोटिस या अतिरिक्त टैक्स का खतरा हो सकता है, लेकिन आपको घबराने की जरूरत नहीं है, टैक्स कानून में इसे सुधार के रास्ते दिए गए हैं, आज हम इस पोस्ट में सभी सवाल का जवाब देंगे, इसीलिए आप इस पोस्ट को लास्ट तक पढ़े।
इस पोस्ट में क्या क्या है?
क्या Tax Audit Report को रिवाइज किया जा सकता है?
अगर सच बताऊ तो जी हाँ इनकम टैक्स नियमों के अनुसार, अगर ऑडिट रिपोर्ट फाइल करने के बाद आपको कोई बड़ी गलती या अधूरा डेटा मिलता है, तो आप उसे रिवाइज कर सकते हैं।
इन समय में आप रिपोर्ट में यह बदल सकते हैं:
- अगर नियमों में कोई बदलाव (Change in Law) हुआ हो।
- अगर पिछले साल की कोई कैलकुलेशन गलत रह गई हो।
- कोई ऐसा खर्च या इनकम जो पहले रिकॉर्ड नहीं की गई थी।
- चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) को लगता है कि अब भी रिपोर्ट में सुधार की ज़रूरत है।
टैक्स ऑडिट में गड़बड़ी क्या होती है?
देखिए टैक्स ऑडिट इसीलिए होता है ताकि साल भर में मिले गलती को निकालना, और उसे सुधारना लेकिन टैक्स ऑडिट में भी अगर गलती हो जाए तो यह बहुत बड़ा अपराध है, टैक्स ऑडिट में गड़बड़ी का मतलब है:
- गलत टर्नओवर दिखाना
- खर्च ज्यादा या कम दिखना
- स्टॉक या इन्वेंट्री में बढ़ा अंतर
- 44AB के तहत ऑडिट की जरूरत होते हुए भी न कराना
- Form (3CA / 3CB / 3CD) में गलत ऑडिट रिपोर्ट देना
- GST और ITR डेटा का मिसमैच होना
- ऑडिटर से अनजाने में हुई गलती के कारण
टैक्स ऑडिट में गड़बड़ी होने के कारण
टैक्स ऑडिट में गड़बड़ी के कई कारण हो सकते है, आप सीए से पूरी जानकारी शेयर नहीं किया इसीलिए ऐसा गलती हो सकती है या सीए आपसे पूरी जानकारी शेयर नहीं किया।
- गलत अकाउंटिंग एंट्री किया गया हो
- CA से पूरी जानकारी शेयर न करना
- GST Return और ITR में फर्क
- जल्दबाजी में फाइलिंग किया है
- पुराने डेटा का इस्तेमाल किया है
अगर आपसे गलती हुई ऐसा पता लग जाए तो आप खुद विभाग को खबर दीजिए और अपना गलती सुधारे ताकि पहले ही मामला शांत हो जाए, क्योंकि ऑफिसर अगर गलती निकले तो बात नोटिस या पेनल्टी तक जा सकता है, हम इस पर नीचे बात करेंगे।
गलती मिलने पर तुरंत करें ये 3 काम
अगर आपको ऑडिट के बाद गड़बड़ी का पता चलता है, तो चुप बैठने के बजाय ये कदम उठाएं:
अगर टैक्स ऑडिट रिपोर्ट में गलती हो जाए तो पहला कदम, सबसे पहले घबराएँ नहीं अपने सीए या टैक्स ऑडिटर से तुरंत संपर्क करें पूरी रिपोर्ट दोबारा ध्यान से चेक कराएँ कई बार गलती छोटी होती है या सिर्फ गलती डेटा एंट्री की होती है।
1. Revised Audit Report फाइल करें: अपने सीए से बात करें पूरी बात बताए और Revised Return Form 3CD तैयार करवाएं, पोर्टल पर इसे दोबारा अपलोड करने का ऑप्शन मिलता है, ध्यान रहे कि रिवाइज्ड रिपोर्ट के साथ एक नोट भी देना होता है कि आप यह बदलाव क्यों कर रहे हैं, कई गलतियां Revised Return से सुधारी जा सकती हैं।
2. Income Tax Return (ITR) को रिवाइज करें: सिर्फ ऑडिट रिपोर्ट सुधारना काफी नहीं है, अगर ऑडिट रिपोर्ट की वजह से आपके टैक्स या इनकम पर असर पड़ रहा है, तो आपको Section 139(5) के तहत अपना आईटीआर भी रिवाइज करना चाहिए, अगर समय सीमा बाकी है तो Revised Tax Audit Report फाइल की जा सकती है।
3. Section 154 (Rectification): अगर गलती बहुत छोटी है (जैसे टाइपिंग मिस्टेक या कैलकुलेशन की साधारण गलती), तो आप ‘Rectification Request‘ डाल सकते हैं।
और लास्ट इनकम टैक्स नोटिस आया है तो समय पर जवाब दें सही डॉक्युमेंट के साथ, ऑनलाइन e-Proceeding से रिप्लाई करें सरकारी टैक्स पोर्टल पर।
| स्थिति | Revised Audit Report |
| ITR file होने से पहले | कर सकते है (Allowed) |
| ITR revise करते समय | कर सकते है (Allowed) |
| Assessment के दौरान | वैलिड रिजन होना चाहिए |
Revised audit report को revised ITR से पहले या उसके साथ सबमिट करना सही होता है, नीचे से समझे यह क्यों करना होता है।
एक उदाहरण से समझे: पहले Audit Report में टर्नओवर ₹90 लाख दिखाया गया बाद में बैंक स्टेटमेंट के मिलन से पता चला ₹1 करोड़ था।
देखिए Revised Audit Report पहले की गई गलती सुधारने का कानूनी तरीका है, लेकिन हर बार गलती होने पर सही कारण देना होता है, इसीलिए बार बार रिवाइज करना रिस्क हो सकता है, तब डिपार्मेंट आपसे पूछ सकती है कि गलती क्यों हुई, इसीलिए जितना हो सके चेष्टा करें कि पहले गलती न हो।
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क्या ऑडिट के गलती पर पेनल्टी लगेगी?
क्या टैक्स ऑडिट में गलती मिलने पर पेनल्टी लग सकती है? हाँ कुछ मामलों में लग सकता है लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने गलती कब पकड़ी:
Voluntary Disclosure (खुद से सुधारना): अगर विभाग (Income Tax Department) के नोटिस भेजने से पहले आपने खुद गलती सुधार ली, तो पेनल्टी की संभावना बहुत कम हो जाती है, सिर्फ ब्याज देना पड़ सकता है, अब ऑफिसर क्या फैसला लेता है।
नोटिस के बाद: अगर आयकर विभाग ने गलती पकड़ी, तो आपको 200% तक पेनल्टी और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है, यह बहुत नुकसान वाला काम है इसीलिए पहले ही सावधान रहे।
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टैक्स ऑडिट के बाद गलती के पेनल्टी को एक टेबल से समझे:
| स्थिति | पेनल्टी |
| जानबूझकर गलत जानकारी | भारी जुर्माना |
| तकनीकी गलती | राहत मिल सकती है |
| सीए की गलती | स्पष्टीकरण से बचाव हो सकता है |
धारा 271B के तहत ₹1.5 लाख तक की पेनल्टी लग सकती है, लेकिन सही कारण होने पर पेनल्टी माफ भी हो सकती है।
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ऑडिट की गलतियों से बचने के टिप्स
टैक्स ऑडिट में गड़बड़ी से बचने के कुछ आसान तरीके में पहले ही आपको बता रहा हूं ताकि भविष्य में आपको परेशानी ना हो:
Monthly Reconciliation: हर महीने अपने बैंक स्टेटमेंट और बिलों का अच्छे से मिलान करें।
Advanced Tax: समय समय पर एडवांस टैक्स की हिसाब करते रहें और जमा करें ताकि साल के अंत में पूरा बोझ न पड़े।
Digital Records: हमेशा कोशिश करें कि आपके सभी ट्रांजेक्शन डिजिटल हों ताकि डेटा ट्रैक करना आसान हो।
- समय पर बहीखाते अपडेट रखें
- बैंक स्टेटमेंट और बुक्स मिलान करें
- जीएसटी और आईटीआर डेटा मिलाएं
- एक्सपीरियंस वाला सीए से ऑडिट कराएँ
- जल्दबाजी में आईटीआर फाइल न करें
- समय रहते ही ऑडिट कराएं
- हर डॉक्युमेंट को खुद चेक करें
- ऑडिट रिपोर्ट आप खुद भी पढ़ें
इन्हीं कुछ तरीका से आप भविष्य में टैक्स ऑडिट की गड़बड़ी से बच सकते हैं।
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FAQs (ज्यादा पूछे जाने वाले सवाल)
Revised Audit Report क्या है?
Revised Audit Report का मतलब होता है पहले से जमा की गई (submitted) Audit Report में की गई गलती को सुधार कर दोबारा जमा की गई रिपोर्ट, लेकिन इसे गंभीरता से और बार बार नहीं करना चाहिए।
क्या टैक्स ऑडिट रिपोर्ट को सुधारा जा सकता है?
जी हाँ किया जा सकता है Revised Tax Audit Report अगर आईटीआर की ड्यू डेट खत्म नहीं हुई है या Assessing Officer ने नोटिस नहीं भेजा है, तो सीए से Revised Audit Report अपलोड करवाए।
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अगर ITR पहले ही फाइल हो चुका है तो क्या करें?
Option 1, Revised Return (धारा 139(5)): अगर गलती अनजाने में हुई है और समय सीमा के अंदर है, तो आप रिवाइज्ड आईटीआर फाइल कर सकते हैं।
Option 2, नोटिस आने पर जवाब देना: अगर इनकम टैक्स विभाग ने नोटिस भेज दिया है तो सही डॉक्यूमेंट, सही कैलकुलेशन और सीए की मदद से प्रॉपर रिप्लाई देना चाहिए।
टैक्स ऑडिट में गड़बड़ी पर पेनल्टी लग सकती है?
जी हाँ कुछ मामलों में धारा 271B से अगर टैक्स ऑडिट जरूरी था लेकिन कराया नहीं तो पेनल्टी ₹1,50,000 तक या टर्नओवर का 0.5% (जो कम हो), लेकिन अगर तर्कसंगत केस हो तो पेनल्टी माफ भी हो सकती है।
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निष्कर्ष: टैक्स ऑडिट में हुई गलती के बारे में
अंत में एक बार आपको बताना चाहूंगा अगर टैक्स ऑडिट में गड़बड़ी हो जाए तो, घबराने की जरूरत नहीं, सुधार के रास्ते कानूनी रूप से मौजूद हैं, समय रहते सही कदम उठाने से पेनल्टी से बचा जा सकता है।
Tax Audit में गलती होना कोई अपराध नहीं है, लेकिन उसे छुपाना भविष्य के लिए भारी पड़ सकता है, इसीलिए जैसे ही आपको गड़बड़ी का पता चले, अपने टैक्स सलाहकार (CA) से मिलें और गलती को जल्द से जल्द सुधारें।
सही समय पर लिया गया फैसला आपको भारी पेनल्टी और मानसिक तनाव से बचा सकता है, इसीलिए सबसे जरूरी बात है समय रहते एक अच्छे सीए से जल्दी सलाह लें।
में उम्मीद करता हूं कि आपको पता चला है अगर टैक्स ऑडिट में गड़बड़ी हो जाए तो क्या करें? अपने दोस्तों सोशल मीडिया पर इस पोस्ट को शेयर करके उनको भी जानकारी लेने में सहायता कीजिए।
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