भारत में कई लोग बिज़नेस या प्रोफेशन से पैसा कमाते हैं और हर साल इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) भरते हैं, लेकिन कभी कभी टैक्स ऑडिट का बात सामने आता है जब की आपने सब कुछ सही किया है।
देखिए ऐसा होता है कुछ मामलों में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपको यह साबित करने के लिए कहता है कि आपकी इनकम, खर्च और लाभ सही तरीके से जमा किए गए हैं की नहीं।
इसी प्रक्रिया टैक्स ऑडिट कहती है और टैक्स ऑडिट भारतीय टैक्स व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, अब आपके लिए यह समझना ज़रूरी है कि टैक्स ऑडिट कब क्यों और किसके लिए जरूरी होता है।
आज हम टैक्स ऑडिट के बारे में पूरा विस्तार से आपको बताएंगे इसीलिए आप इस पोस्ट को लास्ट तक पढ़े, नहीं तो कुछ पॉइंट आपका मिस हो जाएगा।
इस पोस्ट में क्या क्या है?
टैक्स ऑडिट क्या है?
टैक्स ऑडिट आयकर अधिनियम, 1961 के धारा 44AD या 44ADA के नियम में किया जाने वाला ऑडिट है।
इसमें एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) आपके बिज़नेस या प्रोफेशन के अकाउंट्स को प्रॉफिट या लॉस और बुक्स ऑफ अकाउंट्स की जाँच करता है और एक ऑडिट रिपोर्ट तैयार करता है।
टैक्स ऑडिट का उद्देश्य
कुछ टैक्स ऑडिट का मुख्य उद्देश्य भी है, इससे यह सुनिश्चित करना होता है की:
- गलत आय दिखाकर टैक्स चोरी को रोकना
- बिज़नेस की आय और खर्च सही साबित करना
- आयकर रिटर्न में दिए गए डाटा को फिर से वेरिफाई करना
- सरकार को सही टैक्स कलेक्शन सुनिश्चित करना
इससे सटीकता बढ़ती है करदाता से जमा किया गया इनकम और खर्च के सभी डिटेल्स सही तरीका से रिकॉर्ड होते है, और आयकर कानून के सभी नियम जैसे कटौतियाँ, भत्ते और टीडीएस सभी का पालन होता है।
इसमें टैक्स रिटर्न जमा करने से पहले एक जानकार सीए यह प्रमाण करता है कि आपके खाते में कोई ऊंच नीच या गलती तो नहीं है।
असल में टैक्स ऑडिट का उद्देश्य जाँच करना है इससे सरकार को यह साबित करने में मदद करती है, कि बड़े बड़े टर्नओवर वाले व्यवसाय अपनी सही इनकम दिखा रहे हैं।
टैक्स ऑडिट कब अनिवार्य होता है?
अब एक टेबल से समझे की एक साल में किनके कितने इनकम होने पर टेक्स्ट ऑडिट करनी जरूरी होती है?
| व्यक्ति | शर्त | टैक्स ऑडट जरूरी |
| सभी बिज़नेस के लिए | सालाना टर्नओवर ₹1 करोड़ से ज्यादा | हां जरूरी हैं |
| बिज़नेस (ऑनलाइन या डिजिटल पेमेंट 95% पर) | टर्नओवर ₹10 करोड़ तक | हां जरूरी हैं |
| प्रोफेशन (डॉक्टर, वकील, आर्किटेक्ट, इंजीनियर, सीए आदि) | सालाना इनकम ₹50 लाख से ज्यादा | हां जरूरी हैं |
| प्रिजम्टिव टैक्सेशन स्कीम में धारा (44AD या 44ADA) चुना लेकिन लाभ बहुत कम दिखाया | कुल आय टैक्सेबल लिमिट से ज्यादा हो | हां जरूरी हैं |
हमने टेबल पर दूसरा लाइन पर 95% ऑनलाइन या डिजिटल पेमेंट पर बताया, इसका मतलब आपका सभी बिक्री या टर्नओवर ₹10 करोड़ से ज्यादा हो, लेकिन 95% से ज्यादा लेन देन डिजिटल से हों (मतलब केश लेन देन आपका पूरा टर्नओवर का 5% से ज्यादा न हो।
मतलब टैक्स ऑडिट करने के लिमिट आपके व्यवसाय या पेशे के टर्नओवर या सभी प्रकार के लेन देन पर डिपेंड करता है, और प्रिजम्टिव टैक्सेशन स्कीम में 6%/8% और 50% तक दिखाना होता है, अगर आपने कम दिखाया तो भी आपको टैक्स ऑडिट करनी है।
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टैक्स ऑडिट किन प्रोफेशन पर लागू है?
टैक्स ऑडिट करने है ऐसे कुछ प्रोफेशन के नाम नीचे दिया हु:
- डॉक्टर, वकील
- इंजीनियर, आर्किटेक्ट
- CA, CS, CMA
- कंसल्टेंट, फ्रीलांसर
- डिज़ाइनर, मार्केटिंग सर्विस
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टैक्स ऑडिट कौन करता है और कैसे?
टैक्स ऑडिट सिर्फ एक प्रैक्टिसिंग चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) ही कर सकता है, वह ऑडिट पूरा करने के बाद एक विशेष ऑडिट रिपोर्ट बनाता है, सीए फॉर्म 3CA/3CB और फॉर्म 3CD का इस्तेमाल कर रिपोर्ट तैयार करता है।
फॉर्म 3CD: यह सबसे जरूरी फॉर्म है, यह एक डिटेल प्रमाण पत्र है जिसमें 44 से ज्यादा क्लॉज होते हैं, इसमें सीए आपके व्यवसाय की सभी जरूरी जानकारियां भरता है, जैसे टर्नओवर, लोन, टीडीएस का नियम, स्टॉक का डिटेल्स, और खर्चों की जानकारी।
अब के इस डिजिटल युग में यह ऑडिट के सभी फॉर्म (3CA/3CB/3CD) सीए द्वारा आयकर विभाग के पोर्टल पर अपने डिजिटल सिग्नेचर का इस्तेमाल करके ऑनलाइन अपलोड कर देता हैं।
टैक्स ऑडिट लिए जरूरी डॉक्यूमेंट
कभी आपको भी टैक्स ऑडिट कराने पढ़ सकता है इसीलिए टैक्स ऑडिट में क्या क्या डॉक्यूमेंट जरूरी है यह भी जान लीजिए।
- बैलेंस शीट
- प्रॉफिट और लॉस अकाउंट
- पर्चेस और सेल्स रजिस्टर
- आपका खर्चों का डिटेल्स
- बैंक स्टेटमेंट
- जीएसटी रिटर्न डिस्टल (अगर चाहिए तो)
- इनकम टैक्स लॉगिन
टैक्स ऑडिट की समय सीमा
टैक्स ऑडिट के रिपोर्ट जमा करने की समय सीमा आमतौर पर मूल्यांकन वर्ष (असेसमेंट ईयर) की 30 सितंबर होती है यह कॉर्पोरेट टैक्स के मामलों में जहाँ ट्रांसफर प्राइसिंग लागू होती है वहाँ पर यह 30 नवंबर तक का तारीख रहता है।
यह नियम और तारीख सरकार बदल भी सकती है, इसलिए हमेशा नया अपडेट चेक करें।
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टैक्स ऑडिट न कराने पर जुर्माना (पेनल्टी)
अगर कोई टैक्स ऑडिट के पात्र है और समय पर ऑडिट नहीं कराया जबकि कराना चाहिए था तो सेक्शन 271B के तहत ₹1,50,000 तक जुर्माना लग सकता है, आयकर विभाग के तरफ से।
यह जुर्माना आपका पूरा टर्नओवर या पूरा इनकम का 0.5%, या ₹1,50,000 लग सकता है, इन दोनों में से जो भी कम अमाउंट हो उतना जुर्माना लगाया जा सकता है, इसीलिए आप सावधान रहें।
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क्या टेक्स्ट ऑडिट करने के लिए सरकार नोटिस भेजती हैं?
नहीं टैक्स ऑडिट कराने के लिए सरकार नोटिस नहीं भेजती है, यह आपके टर्नओवर या लाभ की सीमा पार होने पर टैक्स ऑडिट खुद से करना कानूनी जिम्मेदारी होती है, आपको अगर डाउट है तो ऊपर चेक कर लीजिए टेबल पर कितना लिमिट पार होने पर करना है, नहीं तो पेनल्टी लग सकता है।
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निष्कर्ष: टैक्स ऑडिट के बारे में
अगर आपका टर्नओवर से प्रोफेशनल इनकम या प्रॉफिट टैक्स कानून की लिमिट से ज्यादा हो जाता है, तो टैक्स ऑडिट कराना जरूरी है, टैक्स ऑडिट आपको कानूनी सुरक्षा देता है और गलत रिटर्न भरने से होने वाले भारी टैक्स और पेनल्टी से बचाता है।
और टैक्स ऑडिट उन व्यवसायों के लिए भी जरूरी नियम है जिनकी लेन देन बड़ी होती हैं यह न केवल जुर्माने से बचाता है, बल्कि आपके खाता अगर गलत है वह भी ठीक करता है और आगे भविष्य में आयकर विभाग के किसी भी नोटिस या जांच की टेंशन को कम करता है।
में उम्मीद करता हूं आपने इस पोस्ट में जाना टैक्स ऑडिट क्या है? किसे कराना है अनिवार्य और क्यों? अपने दोस्त और सोशल मीडिया पर इस पोस्ट को शेयर कर उनको भी जानकारी लेने में मदद कीजिए।
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