बिज़नेस करने वालों लोगों के लिए ITR और GST दोनों के ऑडिट नियम समझना ज़रूरी है, आज यह पोस्ट में हम दोनों के उद्देश्य और कामों को स्पष्ट रूप से समझेंगे।
आपकी एक ही व्यापार पर दो तरह के ऑडिट हो सकते है इसीलिए पहले आपको टैक्स और जीएसटी ऑडिट में असली अंतर को समझना होगा।
इस पोस्ट में क्या क्या है?
एक ही व्यापार पर दो तरह के ऑडिट
आपके एक ही बिजनेस पर दो तरह के ऑडिट क्यों होता है पहले इस बात का जवाब दे देता हूं:
- टैक्स ऑडिट (Tax Audit): यह आयकर अधिनियम (Income Tax Act) के तहत (प्रत्यक्ष कर) के लिए है।
- जीएसटी ऑडिट (GST Audit): जीएसटी अधिनियम के तहत (अप्रत्यक्ष कर) के लिए है।
हालांकि दोनों में खातों की जाँच शामिल है, लेकिन उनके उद्देश्य, टर्नओवर लिमिट और रिजल्ट पूरी तरह से अलग अलग हैं।
दोनों ऑडिट का उद्देश्य और फोकस में अंतर
भारत में एक ही व्यापार को दो अलग अलग कानूनों में ऑडिट की जरूरत हो सकती है, यह देखने के लिए सरकार के पास सही से टैक्स जमा हुआ की नहीं, एक टेबल से समझे:
| विशेषता | टैक्स ऑडिट (आयकर) | जीएसटी ऑडिट (वस्तु एवं सेवा कर) |
| नियमित कानून | आयकर अधिनियम, 1961 (धारा 44AB और 44ADA) के लिए। | CGST अधिनियम, 2017 (धारा 65 और 66) के लिए। |
| मुख्य उद्देश्य | यह देखना है कि करदाता ने अपनी असली इनकम सरकार को बताया है और डायरेक्ट टैक्स के नियमों (टीडीएस और कटौतियाँ) का सही से पालन किया है। | यह देखना है कि करदाता ने सही से जीएसटी का पेमेंट किया है, और इनडायरेक्ट टैक्स के सभी नियमों (आईटीसी, एचएसएन या एसएसी, रिटर्न फाइलिंग) का पालन किया है। |
| फोकस | लाभ और लॉस के खाता, बैलेंस शीट, और इनकम की गणना करना। | खरीद, बिक्री, चालान, आईटीसी डिटेल्स, GSTR-3B और GSTR-1 का GSTR-2A/2B से मिलान। |
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ऑडिट करने की लिमिट
दोनों ऑडिट के लिए टर्नओवर की सीमाएँ अलग अलग कानूनों से तय की जाती हैं, इसको भी एक टेबल से समझे:
| श्रेणी | टैक्स ऑडिट की सीमा | जीएसटी ऑडिट की सीमा |
| व्यवसाय (Business) के लिए | ₹1 करोड़ (और कुछ शर्तों पर ₹10 करोड़) | ₹5 करोड़ से ऊपर |
| पेशेवर (Profession) के लिए | ₹50 लाख | ₹5 करोड़ से ऊपर |
ध्यान दें: अब जीएसटी ऑडिट GSTR-9C खुद से जमा करना होता है और वह भी ₹5 करोड़ से ज्यादा टर्नओवर पर, न कि किसी सीए द्वारा।
और टैक्स ऑडिट तब करता है जब कैश लेन देन 8% से कम और 6% से कम डिजिटल लेन देन दिखाने पर 44AD में, साथ में 50% से कम खर्च 44ADA में दिखाने पर।
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कौन ऑडिट करता है
जीएसटी और टैक्स ऑडिट के बीच सबसे बड़ा अंतर है, कुछ जीएसटी ऑडिट खुद से करना होता है जरूरत पड़ने पर सीए से और टैक्स ऑडिट सीए से ही करना है, टेबल से समझे:
| ऑडिट का प्रकार | ऑडिट कौन करता था/है? | कौनसा टैक्स के लिए |
| टैक्स ऑडिट | प्रैक्टिसिंग चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) (करदाता जिनको चुनता है)। | डायरेक्ट टैक्स के लिए। |
| जीएसटी ऑडिट (वर्तमान) | केवल जीएसटी अधिकारी (मतलब, टैक्स अथॉरिटी) (सिर्फ धारा 66) के लिए। | इनडायरेक्ट टैक्स के लिए। |
पिछला बदलाव: जीएसटी में ₹5 करोड़ के अंदर के टर्नओवर वाले व्यवसायों में अब सीए से GSTR-9C प्रमाण कराना जरूरी नहीं है।
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ऑडिट पर गलती मिलने पर
दोनों ऑडिट में गलती मिलने पर अलग अलग तरह से जुर्माना लगता है, क्योंकि दोनों का नियम अलग अलग है:
टैक्स ऑडिट में पाई गलती: इनकम कम दिखाने पर जुर्माना लगता है, या ऑडिट रिपोर्ट देर से जमा करने पर टर्नओवर का 0.5% तक जुर्माना लगता है।
जीएसटी ऑडिट में पाई गलती: गलत आईटीसी का दावा करने, टैक्स कम देने या गलत एचएसएन या एसएसी कोड का इस्तेमाल करने पर ब्याज और पेनल्टी लगता है।
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निष्कर्ष: टैक्स ऑडिट और जीएसटी ऑडिट के बारे में
अंत में आपको बताना चाहूंगा टैक्स ऑडिट और जीएसटी ऑडिट सुनने में एक जैसा है, लेकिन दोनों एक दूसरे से पूरा अलग हैं।
टैक्स ऑडिट आपकी इनकम पर ध्यान देता है और टैक्स कानूनों का नियम पालन न करने वालों को ढूंढता है।
जीएसटी ऑडिट आपकी बिक्री और खरीद पर ध्यान देता है और अप्रत्यक्ष कर कानूनों का नियम पालन न करने वालों को ढूंढता है।
एक अच्छे व्यवसायी के रूप में जीएसटी के सभी नियम पालन करना आपकी जिम्मेदारी है, जैसे आपके आयकर रिटर्न में दिखाया गया टर्नओवर और जीएसटी रिटर्न में दिखाया गया टर्नओवर (GSTR-1 और GSTR-3B) सभी मेल खाता हो, क्योंकि ये दोनों विभाग अब आपके दिया हुआ डेटा का मिलान करता हैं।
में उम्मीद करता हूं की आपको टैक्स और जीएसटी ऑडिट के बारे में जानकारी मिली है, अपने दोस्त और सोशल मीडिया पर इस पोस्ट को शेयर कर उनको भी जानकारी लेने में मदद कीजिए।
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