प्रॉपर्टी टैक्स और कैपिटल गेन टैक्स: एक संपत्ति पर लगने वाले दो अलग टैक्स

अक्सर लोगों को प्रॉपर्टी टैक्स (Property Tax) और प्रोफेशनल टैक्स (Capital Gains Tax) में बड़ा कन्फ्यूजन होता है, क्योंकि एक ही चीज कर दूं बार टैक्स लगता है।

आज हम इस पोस्ट में आपको प्रॉपर्टी टैक्स और कैपिटल गेन टैक्स दोनों के बारे में विस्तार से बताऊंगा इसीलिए आप इस पोस्ट को लास्ट तक पढ़े।

अक्सर लोग इन दोनों को एक ही समझ लेते हैं, जबकि इनके बीच ज़मीन आसमान का फर्क है, एक टैक्स आपको मकान रहने की खुशी में (Ownership) पर हर साल देना होता है, और दूसरा मकान बेचने पर मुनाफे (Profit) पर एक बार देना होता है।

भारत में प्रॉपर्टी (मकान, दुकान या ज़मीन) खरीदना इन्वेस्ट का सबसे बढ़िया तरीका लोग मानते है, लेकिन प्रॉपर्टी के साथ टैक्स की ज़िम्मेदारियाँ भी आती हैं, असल में दो तरह के टैक्स संपत्ति पर लगते हैं प्रॉपर्टी टैक्स और कैपिटल गेन टैक्स

1. प्रॉपर्टी टैक्स (Property Tax)

प्रॉपर्टी टैक्स को हाउस टैक्स भी कहते है, जब तक आपके पास प्रॉपर्टी है, आपको यह टैक्स हर साल देना होता है, यह एक अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax) होता है।

किसे देते हैं: इस टैक्स का पेमेंट संपत्ति के मालिक को अपने शहर की नगर निगम (Municipal Corporation) या स्थानीय निकाय को दिया जाता है, इसमें घर, दुकान, फ्लैट या जमीन के मालिकाना पर लगता है।

मकसद: सरकार इस पैसे का इस्तेमाल आपके इलाके की सड़कों, साफ सफाई, स्ट्रीट लाइट और पानी जैसी असुविधाओं को ठीक करने के लिए इस्तेमाल करती है।

गणना: इस टैक्स का हिसाब प्रॉपर्टी के लोकेशन, साइज़, और वह कमर्शियल है या रेजिडेंशियल, इस गणना से अलग अलग होता है।

2. कैपिटल गेन टैक्स क्या है? (Capital Gains Tax)

कैपिटल गेन टैक्स एक प्रॉफिट टैक्स है, यह आपको हर साल नहीं देना होता, सिर्फ तभी देना होता है जब आप अपनी प्रॉपर्टी को बेचते हैं, क्योंकि उस पर आपको मुनाफा होता है।

कैपिटल गेन टैक्स को दो भागों में बाँटा गया है:

Short Term Capital Gains (STCG): अगर आप किसी प्रॉपर्टी को खरीदने के 24 महीने के भीतर बेच देते हैं, तो होने वाला प्रॉफिट आपकी इनकम में जुड़ जाता है और आपके Tax Slab Rate के हिसाब से टैक्स लगता है।

Long Term Capital Gains (LTCG): अगर आप प्रॉपर्टी को 24 महीने से ज़्यादा समय तक रखकर बेचते हैं, तो 2025 के नए नियमों के अनुसार अब इस पर 12.5% की दर से टैक्स लगता है (बिना इंडेक्सेशन के)।

और एक बात कैपिटल गेन टैक्स एक डायरेक्ट टैक्स है, क्योंकि यह टैक्स डायरेक्ट आपकी इनकम पर लगता है।

इस पोस्ट से पूरा जाने:डायरेक्ट टैक्स और इनडायरेक्ट टैक्स में क्या अंतर है? जानें सरल भाषा में उदाहरणों के साथ

प्रॉपर्टी टैक्स और कैपिटल गेन टैक्स में अंतर (टेबल)

अंतर का आधारप्रॉपर्टी टैक्स (Property Tax)कैपिटल गेन टैक्स (Capital Gains Tax)
कब देना होता है?
हर सालसिर्फ संपत्ति बेचने पर
किस पर लगता है?संपत्ति के मालिक परसंपत्ति बेचने से हुए प्रॉफिट पर
किसे टैक्स देते हैं?स्थानीय नगर निगम या पंचायत कोकेंद्र सरकार (आयकर विभाग) को
उद्देश्यस्थानीय सुविधाओं के विकास के लिएसरकार टैक्स जुटाने के लिए

इस पोस्ट से जाने:- टैक्स डिडक्शन और टैक्स एक्जेम्प्शन में अंतर को समझे? टैक्स बचाने के लिए

3.इसमें क्यों भ्रम होता है?

दोनों में भ्रम इसलिए होता है क्योंकि दोनों ही करों में ‘प्रॉपर्टी शब्द‘ लगा है, लेकिन अगर आप सालों तक अपने घर में रहते हैं और उसे नहीं बेचते हैं, तो आप सिर्फ प्रॉपर्टी टैक्स देंगे।

और अगर आप एक जमीन खरीदते हैं, और उसे कुछ समय बाद लाभ पर बेचते हैं, तो आप कैपिटल गेन टैक्स सरकार को देंगे।

सरल बातों से कहूं तो प्रॉपर्टी टैक्स एक रखरखाव का शुल्क है, लेकिन कैपिटल गेन टैक्स एक लाभ शुल्क है।

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4. तो अब इनमें टैक्स कैसे बचाएं?

वैसे तो टैक्स चोरी करना अपराध है यह आपको नहीं करना चाहिए, इनमें भी दूं कानूनी तरीका है जिससे आप टैक्स बचा सकते है।

प्रॉपर्टी टैक्स में छूट: कई नगर निगम अपने वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं या विकलांग व्यक्तियों को प्रॉपर्टी टैक्स में 10% से 30% तक की छूट देते हैं, समय पर टैक्स भरने पर भी ‘अर्ली बर्ड डिस्काउंट’ मिलता है।

यह छूट की परसेंट (%) और शर्तें हर नगर निगम में अलग अलग होती हैं, इसीलिए यह छूट के बारे में आपको अपने पास के नगर निगम से जानना चाहिए।

कैपिटल गेन टैक्स में छूट (Section 54): अगर आप घर बेचकर मिले मुनाफे से दूसरा घर खरीद लेते हैं या 54EC Bonds में निवेश करते हैं, तो आप इस टैक्स को पूरी तरह बचा सकते हैं।

टैक्स बचाने का तरीका पहले पता करें आपका केस STCG है या LTCG है, अगर LTCG है तो देखें क्या सेक्शन 54 / 54F / 54EC / 54B लागू हो सकता है?

एक जरूरी बात (ध्यान रखें): यह छूट सिर्फ LTCG पर मिलती है, STCG पर आमतौर पर कोई छूट नहीं मिलती, अगर आपने फिर से इन्वेस्ट किया है तो सही समय पर उस पैसा का इन्वेस्ट किया बोलके ITR में क्लेम करें, आपका गया हुआ टैक्स वापस मिल जाएगा।

लेकिन आप गलत क्लेम न करें ऐसा करने पर आपको टैक्स नोटिस आ सकती है।

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निष्कर्ष: प्रॉपर्टी टैक्स और कैपिटल गेन टैक्स में

अंत में आपको यह कहना चाहूंगा जब आप किसी संपत्ति (जमीन या मकान) के मालिक होते हैं, तो आपको यह दो करों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन इनका उद्देश्य और लागू होने का समय सीमा पूरी तरह अलग होता है।

आपको ध्यान रखना है प्रॉपर्टी टैक्स आपकी संपत्ति को बनाए रखने का किराया है जो आप सरकार को देते हैं, जबकि कैपिटल गेन टैक्स वह हिस्सा है जो आप अपने मुनाफे में से सरकार को टैक्स देते हैं, अगर आपके पास दोनों है तो आपको इन दोनों टैक्स के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।

में उम्मीद करता हूं कि आपने इस पोस्ट में जाना प्रॉपर्टी टैक्स और कैपिटल गेन टैक्स दोनों पूरी तरह अलग है, अपने दोस्त और सोशल मीडिया पर इस पोस्ट को शेयर कर उनको भी जानकारी लेने में मदद कीजिए।

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