जो कोई भी आज ऑनलाइन कुछ भी सामान बेच रहा है तो उनके पास जीएसटी नंबर है, लेकिन अगर आप ऑनलाइन कोई प्रोडक्ट सेल करने के बारे में सोच रहे है तो यह पोस्ट आपके लिए पढ़ना बहुत जरूरी हैं।
क्योंकि इस पोस्ट में आपको सीखने को मिलेगा कि क्या आपको भी जीएसटी नंबर लेना चाहिए और कब लेना चाहिए, और क्यों ऑनलाइन सेल करने के लिए जीएसटी नंबर लेना जरूरी है, और सरकार जीएसटी को क्यों लाया।
अगर आपको आज के समय में ऑनलाइन सामान बेचना है तो चाहे किसी भी तरह से हे तो आपके लिए जीएसटी नियम को समझना बहुत जरूरी है, और यह पोस्ट उन सभी के लिए भी है जो ऑनलाइन सेल कर रहे है और वह लोग जीएसटी को और बारीकी से समझना चाहते हैं।
इस पोस्ट में क्या क्या है?
ऑनलाइन सामान बेचने का मतलब GST की नज़र में क्या है?
आप जब कोई सामान ऑनलाइन बेचते हैं तो GST के नजर में वह (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) के नज़र में आता है, ऑनलाइन सेल ज्यादा तर ई-कॉमर्स (E-commerce) के माध्यम बेचा जाता है।
ऑनलाइन सेलिंग प्लेटफॉर्म को ही ई-कॉमर्स कहा जाता है जैसे Amazon, Flipkart, Meesho, या अन्य कोई साइट भी हो और अपनी खुद की वेबसाइट बनाकर भी बेच रहे हैं वह भी इसी लिस्ट में आते है।
ज्यादा जीएसटी के नियम ऑनलाइन बेचने वालों पर लगते हैं, और ऑफलाइन बेचने वालों के लिए भी बहुत सारा जीएसटी नियम सरकार ने बनाया।
ऑनलाइन सामान बेचने वालों के लिए GST रजिस्ट्रेशन कब ज़रूरी है?
किसी भी तरह से ऑफलाइन इनकम पर जीएसटी रजिस्ट्रेशन की थ्रेशोल्ड लिमिट है ₹40 लाख और ₹20 लाख कुछ राज्यों के लिए, यह नियम हर एक पर लागू होता है।
लेकिन ई-कॉमर्स ऑपरेटर जैसे Amazon, Flipkart, Myntra, Meesho पर सामान बेचने के लिए आपको जीएसटी रजिस्ट्रेशन करना ही पड़ेगा, इसके बिना आप सेल नहीं कर सकते चाहे आपका सेल या टर्नओवर कुछ भी हो।
कोई भी ऑनलाइन सामान बेचने वालों के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन की छूट वाली कोई टर्नओवर की लिमिट नहीं है, जैसे ही आप किसी ई-कॉमर्स ऑपरेटर में सामान बेचने जाएंगे तभी आपको पहले जीएसटी रजिस्ट्रेशन नंबर डालने को बोलेगा।
ऐसा इसलिए जरूरी है क्योंकि ई-कॉमर्स ऑपरेटरों में आपके द्वारा बेचे गए सामान पर सरकार TCS (स्रोत पर कर संग्रह) लेना चाहता है, और इसके लिए आपको GSTIN (जीएसटी आइडेंटिफिकेशन नंबर) लेने की ज़रूरत होती है।
ध्यान रखें: यह नियम सिर्फ ऑनलाइन सामान बेचने वालों पर लागू होता है, लेकिन अगर आप ऑनलाइन सेवाएँ दे रहे है जैसे वेब डिज़ाइन, कंसल्टेंसी, ग्राफिक डिजाइन, आदी तो आपके लिए सामान्य टर्नओवर लिमिट ₹20 लाख तक की है और कुछ राज्यों के लिए 10 लाख है, इस सीमा को पार करने के बाद ही जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराना होता है।
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ऑनलाइन विक्रेताओं के लिए GST रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया और ज़रूरी डॉक्यूमेंट
जीएसटी रजिस्ट्रेशन अब पूरा ऑनलाइन होता है और इसमें कुछ आसान स्टेप्स को फॉलो करने पड़ते है, इसका छोटा सा जानकारी में आपको समझा देता हु।
कुछ ज़रूरी दस्तावेज़ (Main Document):
- पैन कार्ड (PAN Card): आपको आपका बिज़नेस का पैन कार्ड या खुद का पैन कार्ड चाहिए होता है।
- आधार कार्ड (Aadhaar Card): आपका आधार कार्ड या पार्टनर का किसी का आधार कार्ड जरूरी है, आप खुद का इस्तेमाल करे यही अच्छा होगा।
- बिजनेस रजिस्ट्रेशन प्रूफ: अगर आपका पार्टनरशिप, कंपनी, या LLP है तो उसका रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट आपको चाहिए होगा।
- बैंक अकाउंट डिटेल्स: बैंक का पूरा डिटेल्स के साथ आपको बैंक स्टेटमेंट या कैंसिल चेक चाहिए होगा।
- पते का सबूत (Proof of Address): आपके बिज़नेस की जगह का बिजली बिल, किरायानामा, प्रॉपर्टी टैक्स रसीद या आपका खुद का एड्रेस आप डाल सकते है।
- फोटो: आपका खुद का फोटो आपको रखना है या आपके पार्टनर की फोटो देना होगा।
यह सारी डॉक्यूमेंट पैन, आधार, बैंक अकाउंट डिटेल्स, बिज़नेस एड्रेस प्रूफ, फोटो आप पहले से हो एक स्कैन कर या फोटो लेकर अपने डिवाइस में रख ले ताकि आपको बाद में दिक्कत न हो।
और एक बात अगर आपका पैन और आधार लिंक नहीं है तो करा लीजिए नहीं तो और परेशानी होगा, और अगर आधार के साथ मोबाइल नंबर लिंक नहीं है तो पहले वह भी कर लीजिए, नहीं तो ओटीपी (OTP) नहीं आएगा, और ओटीपी के बिना आप आगे का प्रोसेस नहीं कर पाएंगे।
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GST रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया (संक्षेप में):
आपको सबसे पहले जीएसटी पोर्टल पर जाना होगा ताकि आप ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू कर सके।
- जीएसटी पोर्टल पर आने के बाद पैन, मोबाइल नंबर और ईमेल आइडी डालकर उसके बाद ओटीपी रजिस्ट्रेशन शुरू करें।
- तब आपको TRN एक (Temporary Reference Number) मिलेगा।
- TRN का इस्तेमाल करके आगे की डिटेल्स भर सकते है जैसे बिज़नेस का नाम, पता, पार्टनर की जानकारी, यह सभी आपको डालना है।
- उसके बाद आप सभी डॉक्यूमेंट अपलोड करें।
- आपका एप्लीकेशन सबमिट करें।
- और कुछ दिनों बाद में जीएसटी विभाग से जांच होने के बाद आपका GSTIN जारी हो जाएगा और आपको मिल जाएगा।
यह कुछ सामान्य प्रक्रिया जीएसटी रजिस्ट्रेशन का मैंने आपको बताया है आप जब अपना जीएसटी नंबर अप्लाई करने जाएंगे तो आपको थोड़ा सा मुश्किल लग सकता है, अगर कोई दिक्कत आपके सामने आता है तो किसी जानकार इंसान से सहायता ले।
नहीं तो आप यूट्यूब के वीडियो देखकर जीएसटी रजिस्ट्रेशन कर सकते है, बहुत सारे यूट्यूबर ने अच्छी तरह से गाइड किया है, ताकि लोग जीएसटीआईएन नंबर ले सके।
GSTIN का मतलब (GST Identification Number) होता है और यही आपका जीएसटी नंबर है, इसे आप जीएसटीआईएन या जीएसटी नंबर दोनों नाम के पुकार सकते है, इस नंबर के बिना आप ऑनलाइन सेल नहीं कर सकते।
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ऑनलाइन सामान बेचने पर आपको कौन सा GST रिटर्न फाइल करना होगा? (GSTR-1, GSTR-3B)
आपका जीएसटी रजिस्ट्रेशन होने के बाद, आपको नियमित रूप से कुछ जीएसटी रिटर्न फाइल करने होंगे, जैसे GSTR-1, GSTR-3B यह सब का आपको पहले से जानकारी होना जरूरी है।
GSTR-1: सबसे पहले आपका आता है GSTR-1, इसमें जितने समान अपने बेचे है उन सभी का विवरण हर महीने या तिमाही पर देना होता है सरकार को।
GSTR-3B: यह एक बहुत जरूरी समरी रिटर्न है जो आपकी मासिक टैक्स रिपोर्ट कार्ड है, जिससे आपको बताना होता है कि आपने कितना कमाया, कितना आईटीसी लिया, और आखिर में कितना टैक्स भरा।
एक तरह से GSTR-3B यह आपके महीने भर के जीएसटी हिसाब निकास का मूल है, जिसे आपको हर महीने सरकार को बताना होता है, कुछ मामलों में यह तिमाही पर भी जमा किया जाता हैं।
GSTR-9: पूरे साल के कमाई करने के बाद आपको GSTR-9 भरना होता हैं जो सालाना रिटर्न कहलाता है, यह आपको पूरे वित्तीय वर्ष में एक ही बार समरी रिटर्न होता है, जिसे साल में एक बार सबको फाइल करना होता है।
GSTR-8: इस GSTR-8 ई-कॉमर्स ऑपरेटर जैसे फ्लिपकार्ट, अमेजन फाइल करते है, इसमें लिखा रहता है कि किस विक्रेता से उन्होंने कितने टीसीएस काटा है।
GSTR-8A: और GSTR-8A ऑनलाइन सेलर के लिए टैक्स क्रेडिट का एक स्टेटमेंट है जो ऑटोमेटिक जनरेट होता है, आपको बस GSTR-8 और GSTR-8A दोनों को देखना है कि दोनों मैच हो रहा है कि नहीं, ताकि आपके कटे गए टीसीएस का आप सही क्रेडिट ले सके।
TCS: यह टीसीएस ई-कॉमर्स ऑपरेटर कटते है सेलर के कुल बिक्री के पैसे से और वह सरकार के पास जमा करते है, जो आपको जीएसटी रिटर्न के समय वापस मिल जाता है और आपका मूल टैक्स कम हो जाता है, इसके विषय में पूरा हम नीचे बात करेंगे।
अगर आपको हर महीने में जीएसटी रिटर्न करना मुश्किल हो रहा है तो आप QRMP Scheme का फायदा उठा सकते है, जिससे आप त्रैमासिक मतलब (तिमाही या तीन मंथ बाद बाद) आप अपना जीएसटी रिटर्न कर सकते है।
और भी बहुत सारा जीएसटी रिटर्न फाइल होता है लेकिन मैं सिर्फ आपको वह बताया जो आपके ऑनलाइन सामान बेचने पर काम आते हैं, और आपको यह ध्यान रखना है कि समय (डेट) खत्म होने से पहले आप सभी जीएसटी रिटर्न फाइल करें।
इस पोस्ट से आप जान सकते है:- TCS क्या है? जानें TCS के प्रकार, दरें और नियम पूरी जानकारी (Tax Collected at Source)
इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दावा कैसे करें? (बचाएं अपना टैक्स)
आपको कम पता हो सकता है ITC क्या है और यह आपके लिए क्यों फायदेमंद है? आईए आईटीसी पर आपको थोड़ा सा जानकारी दे देता हु, जीएसटी में आईटीसी का मतलब है इनपुट टैक्स क्रेडिट (Input TAX Credit)।
आईटीसी का फायदा: जब आप कोई सामान या सेवाएँ खरीदते हैं जैसे कच्चा माल, पैकेजिंग, कूरियर सेवाएँ, लैपटॉप आदि और उस पर जो आप जीएसटी का पैसा चुकाते है, उस चुकाए गए जीएसटी अमाउंट को आप अपने जीएसटी जमा करने के समय कम कर सकते है।
इस ITC का लाभ उठाने के लिए आप अपने सप्लायर्स से GST-Compliant इनवॉइस (बिल) ज़रूर लें, ताकि उस इनवॉइस पर दिए गए जीएसटी अमाउंट को आप अपने अंतिम जीएसटी रिटर्न के समय उस अमाउंट को घटा सके, और आपकी टैक्स कम बने।
एक उदाहरण से समझे: जैसे आपने ₹200 का किसी सामान बेचा है और उस पर 18% के हिसाब से ₹36 रुपए जीएसटी आपको देना है, लेकिन आपने इसे बनाने और पैकिंग के लिए जो सामान खरीदा था उस पर ₹10 का जीएसटी पहले ही दिए थे, तो आपको अभी सिर्फ ₹36-₹10 = ₹26 ही सरकार को टैक्स जमा करने होंगे।
सभी खर्चा के ITC क्लेम करने के लिए आपको जीएसटी पोर्टल पर आपका GSTR-2B को देखना होगा, GSTR-2B एक स्टेटमेंट है जहां पर आपका सभी डिटेल्स रहता है और आप आईटीसी कितना क्लेम कर सकते है वह दिखाता है।
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ई-कॉमर्स ऑपरेटरों की भूमिका (TCS और अन्य नियम)
ई-कॉमर्स ऑपरेटरों जिसे ECO कहा जाता है जैसे अमेजन और फ्लिपकार्ट आदी उनके द्वारा TCS (Tax Collected at Source) काटना सरकार ने जरूरी कर दिया है, यह आपके बेचे हुए सामान के पैसे से यह काटती है।
जब ई-कॉमर्स ऑपरेटरों आपको पेमेंट करता है तब बह आपके कुल बिक्री के पैसे का 0.5% काट लेती है, और वह सरकार के पास इलेक्ट्रॉनिक कैश लेज़र (Electronic Cash Ledger) के रूप में जमा हो जाता है।
मान लीजिए आपने अमेजन पर एक शर्ट बेची जिसकी कीमत ₹1200 है, और अमेजन उस 1200 पर 0.5% टीसीएस काटा तो आपका टीसीएस बनता है 6 रुपए, और अमेजन आपका सभी कमीशन के साथ यह 6 रुपए भी उसमें शामिल करेगा और बचा पैसा आपका बैंक में जमा करेगा।
और जब आप अपना मासिक या तिमाही जीएसटी रिटर्न फाइल करते हैं, तो यह जो 0.5% TCS आपका ECO ने काटा है, इन जमा किया हुआ पैसे का आप अपने जीएसटी चुकाने के समय कम कर सकते है।
और अगर आपका टीसीएस ज्यादा काटे गए है जो आपका जीएसटी से ज्यादा है, उस मामले में आप उस अतिरिक्त जमा टीसीएस पैसे का रिफंड क्लेम कर सकते हैं।
मान लीजिए अमेजन ने आपका पूरे महीने का ₹600 का टीसीएस काटा, लेकिन आपकी पूरे महीने की जीएसटी सिर्फ 200 अपने ग्राहकों से लिया, तब आप अपने कैश लेज़र से ₹200 चुका सकते हैं और बाकी ₹400 का रिफंड क्लेम कर सकते हैं।
थोड़ा अंतर-राज्यीय बिक्री को समझे: मान लीजिए एक समान के लिए आपसे 18% जीएसटी कटा गया है और वह 10 रुपए है तो उसका (9% CGST + 9% SGST/UTGST, या 9% IGST) के रूप में 5 और 5 रुपए भाग होता है, क्योंकि आप एक राज्य से दूसरे राज्य पर सामान को सेल कर रहे है।
SGST/UTGST इन सभी को पूरा समझने के लिए आप इस पोस्ट को पढ़े:- GST क्या है? जानें वस्तु एवं सेवा कर के 4 प्रकार (CGST, SGST, IGST, UTGST) और उनका मतलब
और आपका जो टीसीएस काटा जाता है वह आपके एक तरह से एडवांस टैक्स में जमा होता है, इससे सरकार को ऑनलाइन सेल में निगरानी रखने को मदद मिलता है, और बाद में आपका टीसीएस का पैसा वापस मिल जाता है आईटीसी से।
ऑनलाइन बिक्री में GST की सामान्य गलतियाँ और उनसे कैसे बचें
ऑनलाइन सामान बेचते समय कुछ सामान्य गलतियाँ है जो आपको पता होना चाहिए और यह आपको नहीं करना है।
- गलत जीएसटी रेट लगाना, आपके सामान पर जितना पर्सेंट जीएसटी सरकार ने लगाया है आपको उतना ही लगाना है न कम और न ज्यादा।
- इनवॉइस बनाने समय गलती करना यह भी आपके लिए मुश्किल हो सकता है, इसीलिए सही इनवॉइस बनाने में आपको ध्यान देना है।
- आपको रिटर्न फाइल करने में देरी नहीं करना चाहिए, नहीं तो आपको सामने दिक्कत का सामना करना पड़ेगा।
- जीएसटी रजिस्ट्रेशन नहीं करना जब जरूरी हो, यह सिर्फ ऑनलाइन सेवाएं देने के मामले में होता है, क्योंकि बिना जीएसटी रजिस्ट्रेशन के आप ऑनलाइन सामान सेल नहीं कर सकते।
जीएसटी नियमों का पालन ना करना आप पर भारी पड़ सकता है क्योंकि यह टैक्स चोरी के रूप में देखा जाता है, और इससे आप पर पेनल्टी और कानूनी कार्यवाही हो सकती है जैसे समय पर GSTR-3B फाइल ना करने पर लेट फीस लगती है जो एक दिन के लिए ₹50 रूपए है।
और गलत एचएसएन (HSN Code) डालने पर भी जुर्माना लगता है, एचएसएन कोड हर एक सामान का पहचान नंबर होता है ऑनलाइन के लिए, एचएसएन को समझने के लिए आपका यह पोस्ट:- GST में गलत HSN Code डालने पर कितना जुर्माना? और इससे कैसे बचे जानिए पूरी जानकारी
निष्कर्ष और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
कुल मिलाकर बात यह है आज ऑनलाइन सामान बेचना एक बड़ा आसान तरीका है, और इससे सेल भी ज्यादा होती है लेकिन हर एक के लिए जीएसटी नियमों को समझना और उनका सही से पालन करना बहुत ज़रूरी है।
सही जीएसटी के जानकारी और समय पर सभी नियम का पालन करके आप अपने ऑनलाइन दुनिया के बिज़नेस को सुरक्षित और कानूनी परेशानी से मुक्त रख सकते हैं।
मैं आपको कुछ एक्स्ट्रा जानकारी देना चाहता हूं: ऑनलाइन सेल करने पर जीएसटी देने में और ई-कॉमर्स प्लेटफार्म के कमीशन में बहुत रुपया खर्च हो जाता है जिससे प्रॉफिट कम होता है, लेकिन ऐसा नहीं फायदा नहीं होता है ज्यादा सेल होने पर आपको फायदा दिखाई देगा क्योंकि 30% तक प्रोडक्ट रिटर्न आ जाता है।
किसी प्रोडक्ट को कस्टमर तक पहुंचाना और रिटर्न लाने का दोनों का खर्चा आपको ही देना होता है, मेरा इन बातों से चिंतित मत होइए क्योंकि बहुत लोग ऑनलाइन सेल कर प्रॉफिट कमा रहा है आप भी कमा सकते हैं।
ऑनलाइन सेल में जाने से पहले और भी सभी नियम और प्लेटफॉर्म के फीस के बारे में सभी जानकारी हासिल कर ले, ताकि आपको बाद में परेशानी का सामना न करना पड़े, साथ में टैक्स के नियम को भी अच्छे से समझ ले।
हमेशा याद रखें कि टैक्स नियम पर हर साल कुछ ना कुछ बदलाव होते रहते हैं, इसीलिए हमेशा नवीनतम नियम की ओर ध्यान रखें, और आपको अगर जीएसटी के विषय पर कोई भी परेशानी हो तो हमेशा एक अच्छे टैक्स सलाहकार (CA) से संपर्क करें, वह आपको सही सलाह देंगे।
में उम्मीद करता हू कि जीएसटी में ऑनलाइन सेलिंग करने के लिए क्या करना होगा? इसके सभी तरीका और गलती से बचने के सभी तरीका को आपने समझ लिया है, अपने दोस्त और सोशल मीडिया पर इस पोस्ट को शेयर कर उनको भी जानकारी लेने का मौका दे।
इस पोस्ट से जाने:- Tax और GST में क्या अंतर है? जानें आसान तुलना और पूरी जानकारी
क्या बिना जीएसटी नंबर के ऑनलाइन बेच सकते हैं?
नहीं आप बिना जीएसटी नंबर के ऑनलाइन सामान नहीं बेच सकते।
जीएसटी नंबर के बिना कितनी बिक्री कर सकते हैं?
ऑफलाइन पर आपको 20 लाख और 40 लाख का नियम है अलग अलग राज्य के लिए, लेकिन ऑनलाइन आप बिना जीएसटीआईएन के 1 रूपए सेल नहीं कर सकते।
क्या जीएसटी रजिस्ट्रेशन के फायदे है?
वैसे तो बहुत सारे फायदे हैं जीएसटी रजिस्ट्रेशन का लेकिन सबसे ज्यादा आईटीसी क्लेम करना और बड़े प्लेटफॉर्म पर सामान बेचना आसान हो जाता है।
अगर आप सामान रखने के लिए किराए पर किसी दुकान को लेते हैं तो उसका जीएसटी नियम क्या है इस पोस्ट से जाने:- क्या मकान मालिक को किराए पर GST देना पड़ता है? जानें नियम, छूट और पूरी जानकारी
इस पोस्ट से जाने:- जीरो सेल होने पर भी GST रिटर्न भरना है क्या? नहीं भरने पर कितनी पेनल्टी लगेगी?