आप अगर मोबाइल लैपटॉप का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं तो यह आपको खरीदने भी पढ़ते हैं, ऐसे में आपको मोबाइल और लैपटॉप पर कितना है टैक्स यह जानना बहुत जरूरी है जो आज हम इस पर विस्तार से बात करेंगे।
हमारे भारत में जहाँ हर कोई कुछ न कुछ इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदता है, लेकिन उनको पता नहीं है की वह कितना टैक्स पे कर रहे हैं, ऐसे और बहुत सारे सवाल का जवाब जो आपको पता नहीं है वह भी आपको इस पोस्ट में मिल जाएंगे।
में आपको मोबाइल फोन और लैपटॉप पर लगने वाले सारी टैक्स और जीएसटी को अच्छे से समझाऊंगा, अगर आप खरीदारों में है या विक्रेताओं के अंदर आते है, साथ में अगर आप पुराना फोन या लैपटॉप बेचना या खरीदना चाहते हैं इसका जवाब भी आपको मिल जाएगा।
जीएसटी के 56th काउंसिल बैठक में इलेक्ट्रॉनिक्स को और सस्ता बनाने के लिए जीएसटी दर में कमी की है आज हम यह भी बात करेंगे कि यह नया नियम कब से लागू होगा।
इस पोस्ट में क्या क्या है?
मोबाइल और लैपटॉप पर मुख्य रूप से कौन सा टैक्स लगता है?
हमारे भारत में मोबाइल फोन और लैपटॉप में GST (Goods and Services Tax) लगता है जिसे हिंदी में वस्तु और सेवा कर कहते हैं, आप जहां से भी खरीदे ऑनलाइन या किसी दुकान से।
जीएसटी एक अप्रत्यक्ष कर होता है जिसे इंग्लिश में (Indirect Tax) कहते हैं, यह जीएसटी अंतिम लोग को देना होता है, जैसे कोई कंपनी मोबाइल फोन बनता है और कहीं ऑनलाइन पर लिस्टिंग होता है या रिटेलर के पास आता है।
अब जब आप ऑनलाइन या किसी दुकानदार से मोबाइल फोन या लैपटॉप को खरीदते हैं उसका जो प्राइस आप ऑनलाइन या कैश देते हैं, इस प्राइस के अंदर जीएसटी लगा हुआ रहता है लेकिन सबको यह बात पता नहीं होता है।
मोबाइल और लैपटॉप पर GST की दर कितनी है?
अब आपका मन में उठ रहा सवाल लैपटॉप और मोबाइल फोन पर कितना जीएसटी लगता है? तो मैं आपको बता दूं मोबाइल और लैपटॉप या कंप्यूटर पर अभी भारत में जीएसटी दर 18% हैं।
कोई भी मोबाइल फोन या लैपटॉप मार्केट में जब लॉन्च होता है और उसकी जो प्राइस रखी जाती है उसी के साथ ही जीएसटी लगा हुआ रहता है, जब आप अपने पैसे से उसे चीज को खरीद रहे हैं तो आप साथ में 18% सरकार को जीएसटी दे रहे हैं।
अगले बार आप जब लैपटॉप या फोन लेंगे उसका बिल को आप एक बार जरूर देखें कि उसमें 18% जीएसटी लगा हुआ है, और हमारा भारत सरकार के नियम के अनुसार आप किसी भी राज्य से यह दोनों सामान खरीदें उसमें जीएसटी 18% होगा, कम या ज्यादा नहीं होगा।
सभी प्रोडक्ट का अलग अलग HSN कोड होता है, HSN का पूरा नाम (Harmonized System of Nomenclature) होता है, और इसे हिंदी में वस्तुओं के नामकरण की सामंजस्यपूर्ण प्रणाली कहते हैं।
मोबाइल फोन के इस 8517 HSN कोड के अंदर स्मार्टफोन, बेसिक फीचर फोन, टैबलेट और आईपैड यह सभी आइटम आते हैं, और मोबाइल एक्सेसरीज़ जैसे चार्जर, बैटरी, पावर बैंक, हेडफ़ोन, स्क्रीन प्रोटेक्टर इन सभी पर भी पर 18% जीएसटी लगता है।
किसी लैपटॉप या कंप्यूटर का HSN कोड है 8471 और लैपटॉप के एसेसरीज़ जैसे कीबोर्ड, माउस, हार्ड ड्राइव इन सभी आइटम पर भी 18% जीएसटी लगता है।
New इलेक्ट्रॉनिक्स जीएसटी दर 2025
ध्यान दे: कि किसी मॉनिटर पर भी 18% जीएसटी लगता है, लेकिन 32 इंच से ऊपर के मॉनिटर पर 28% जीएसटी लगता है।
लेकिन 3 Sep 2025 जीएसटी के 56th काउंसिल बैठक में अब इलेक्ट्रॉनिक्स में 18% का जीएसटी लगेगा, मोबाइल पर जीएसटी का दर कम नहीं हुआ क्योंकि वह पहले से ही 18% पर है, लेकिन जैसे बड़ा टीवी, मॉनिटर, ऐसी इनपर को 28% जीएसटी था अब वह 18% हो गई है।
यह 22 Sep 2025 में सभी नया दर आपको देखने को मिलेंगे, सरकार नवरात्रि से पहले यह करना चाहता है ताकि इलेक्ट्रॉनिक्स का दाम सस्ता हो, अगर आप भी इलेक्ट्रॉनिक्स सामान लेना चाहते हैं जिसमें 18% ज्यादा चार्ज है तो थोड़ा टाइम वेट कर लीजिए नवरात्रि के बाद लीजिए तो आपको बहुत सारा पैसा कम लगेगा।
इलेक्ट्रोनिक पर नया दर को पूरा डिटेल में जानने के लिए यह पोस्ट पढ़े:- मोबाइल लैपटॉप और इलेक्ट्रॉनिक सामान पर हाल ही में जीएसटी का दर? (Latest Update)
और एक बात आप समझे यदि आपने किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में भी खरीदा है, तो यह 9% CGST और 9% SGST में भाग होता है, और यदि खरीद अलग अलग राज्यों के बीच हुई है तो फिर भी 18% IGST लगता है।
यह जीएसटी का 9% भाग का बात मैं आपको इसलिए बताया जब आप बिल को देखेंगे तो बिल में जीएसटी के दो भाग आपको दिखाई देंगे CGST और SGST, ताकि आपको बाद में कंफ्यूज ना हो कि यह दोनों क्या है, जीएसटी का आधा भाग राज्य सरकार के पास आता है और आधा भाग केंद्र सरकार के पास जाता है।
जीएसटी और उसके भाग को समझने के लिए आप इस पोस्ट को पड़े:- GST क्या है? जानें वस्तु एवं सेवा कर के 4 प्रकार (CGST, SGST, IGST, UTGST) और उनका मतलब
GST के अलावा और कौन से चार्जेस शामिल होते हैं?
जीएसटी के अलावा आयात शुल्क (Customs Duty) भी लगते है यह पोस्ट के टॉपिक से थोड़ा अलग है फिर भी मैं आपको छोटा सा जानकारी दे देता हूं।
यदि किसी फोन या लैपटॉप विदेश से लाया गया है, तो उस पर सीमा शुल्क (Customs Duty) भी लगता है, जिसे जीएसटी में IGST के साथ जोड़ा गया है।
मोबाइल फोन 2024 बजट के अनुसार, आयातित मोबाइलों पर 15% बेसिक कस्टम्स ड्यूटी (BCD) लगती है जो पहले 20% थी अब 5% कम की गई है, और 1.5% अधिभार है, तो कुल मिलाकर लगभग 16.5% कस्टम्स ड्यूटी लगता है।
यह कस्टम्स ड्यूटी जीएसटी से अलग है इसलिए इनपर टैक्स ज्यादा हो जाता है, लेकिन भारत सरकार के योगदान से अब ज्यादा तर कंपनी भारत के अंदर प्रोडक्ट को बना रहे है, इसीलिए भारत में बना फोन या लैपटॉप के लिए वही 18% जीएसटी लगती है।
ऑनलाइन खरीदने पर टैक्स नियम बनाम ऑफलाइन खरीदने पर टैक्स नियम
मैं आपके ऊपर में पहले ही बताया कि जीएसटी का दर ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही मामले में खरीद पर समान होती है जो 18% है।
अगले बार आप अपने बिल/इनवॉइस में जीएसटी को देखे तो ध्यान दे आपका 18% जीएसटी से कैसे 9% SGST और 9% CGST, या IGST मैं विभाग होता है।
कुछ अन्य शुल्क भी लगते हैं ऑनलाइन खरीदने पर जैस प्रोसेसिंग फीस, डिलीवरी चार्ज इन पर भी जीएसटी लगता है वह भी चार्ज के अंदर शामिल होता है, और आप बैंक ऑफर्स जैसे क्रेडिट कार्ड या कैशबैक मिलने के बाद जितना पैसा बचता है उसी में आपको टैक्स देना होता है।
इस पोस्ट से जाने:- डायरेक्ट टैक्स और इनडायरेक्ट टैक्स में क्या अंतर है? जानें सरल भाषा में उदाहरणों के साथ
पुराना मोबाइल या लैपटॉप बेचने पर टैक्स के नियम क्या हैं?
आप और हम ऐसे आम व्यक्ति के लिए जब हम अपना रखा हुआ पुराना फोन यह लैपटॉप बेचते हैं हमे कोई जीएसटी नहीं देना पड़ता है, क्योंकि हम जीएसटी से रजिस्टर डीलर नहीं है, और यह हमारा पुराना डिवाइस बेचने का बिज़नेस भी नहीं है।
अगर कोई पुराना डिवाइस सेल करने का डीलर या व्यवसायी है तो यह उनके लिए जीएसटी लागू होता है, अगर कोई ऐसा करता है तो उनके ऊपर मार्जिन स्कीम (Margin Scheme) पर जीएसटी लागू होता है।
यह मार्जिन स्कीम रिसेलर ऊपर कैसे लागू होता है एक उदाहरण से समझे, यह आपके खरीदे हुए वस्तु को सेल करने के बाद जितना मुनाफा हुआ उन पर आपको जीएसटी देना है, ना कि पूरा सेल किया हुआ पैसा पर ।
जैसे कोई रिसेलर डीलर ने एक पुराना फोन 15000 में खरीदा और उसकी 20000 में सेल किया तो इसमें उसका प्रॉफिट 5000 हुआ, तो अब आपके जो प्रॉफिट 5000 हुआ इस पैसे के ऊपर उसको जीएसटी सरकार को देना है।
और रिसेलर के लिए नियम वह लोग इनपुट टैक्स क्रेडिट जिसे ITC कहा जाता है वह इसे क्लेम नहीं कर सकते, मार्जिन स्कीम का लाभ उठाकर पैसा कमाने वाले डीलर खरीदी गई पुरानी वस्तुओं के सेल पर आईटीसी का दावा नहीं कर सकते।
इस पोस्ट से समझे:- ITC का दावा क्या है और इसे कैसे करें? जानें इनपुट टैक्स क्रेडिट के नियम और GSTR-2B का महत्व
खरीदार के रूप में अपना टैक्स कैसे समझें?
आप खरीदार के रूप में अपना टैक्स किस दे रहे हैं इसे समझने के लिए आपका बिल पर देखें कि उसमें जीएसटी का डिटेल है कि नहीं, क्योंकि यह देखना और जानना दोनों आपका अधिकार है।
आपके बिल में पहले GSTIN नंबर आपको दिखाई देगा जो उस सेलर की है, मतलब जो प्रोडक्ट सेल कर रहा है उसके पास GSTIN नंबर होता है, GSTIN नंबर किसी भी सेलर का पहचान है, और यह नंबर सभी सेलर का अलग अलग होता है।
आपका बिल या इनवॉइस में GSTIN और GST कैसे भाग होता 9% 9% में एक उदाहरण से मैं आपको समझता हूं, जैसे आपने 25000 का मोबाइल लिया अब आपको इसका 18% निकालना है।
तो आप 25000 को 100 से भाग करेंगे तो होता है 250, यह 250 1% है अब आप इस 250 को 18 से गुना करेंगे तो आपका होता है 4500, मतलब आप अपने 25000 के डिवाइस का 18% मतलब 4500 जीएसटी दे रहे हैं सरकार को।
अब आपके बिल में इस 18% मतलब 4500 रुपए को, 9% 9% के रूप में CGST और SGST या IGST में भाग होते हुए देखेंगे, मतलब 9% 2250 CGST जो केंद्र सरकार के पास आएगा और 9% 2250 राज्य सरकार के पास जाएगा।
आप अगर कोई व्यवसाय चलते है तो यह आपके लिए, आप किसी सामान खरीदने से पहले अपना जीएसटी नंबर वहां पर सबमिट कर सकते हैं, यह ऑनलाइन सेलिंग साइट में बड़े आसानी से आप भर सकते हैं, अगर आपके पास जीएसटी नंबर हो।
और बाद में आप इसे इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) आईटीसी का दावा कर सकते हैं, इससे आपका 18% जीएसटी वापस मिल जाएगा, यह आईटीसी आपको तब मिलेगा जब आप सरकार को दिखाएंगे आप बिज़नेस पर्पस के लिए इस प्रोडक्ट को खरीदे हैं।
इस पोस्ट से जाने:- GSTIN क्या है? जानें क्यों ज़रूरी है यह 15 अंकों का नंबर और इसके हर अंक का मतलब
निष्कर्ष: मोबाइल और लैपटॉप पर जीएसटी दर का
अंत में ध्यान रखने वाली बात यह है कि जीएसटी प्राइस के अंदर शामिल रहता है इसीलिए आपको पता नहीं चलता है लेकिन जाने अनजाने में आप अपने लिए हुए सामान का जीएसटी देते है, और आपसे जीएसटी मिलने के बाद वह सरकार के पास जमा होती है।
सभी जीएसटी रजिस्टर व्यक्ति के पास जीएसटीआईएन (GSTIN) नंबर होता हैं और इसी से ही सभी हिसाब जीएसटी का होता है, यह जानकारी आपके पास रहना जरूरी है क्योंकि आपका पैसा से आप कैसे मोबाइल और लैपटॉप खरीद पर जीएसटी देते है यह जानना आपका अधिकार है।
मैं उम्मीद करता हूं कि आपको मोबाइल फोन या लैपटॉप खरीदी और बिक्री के अंदर सभी जीएसटी दर का हिसाब और अनुमान अच्छे से मिली है, इस पोस्ट के विस्तृत जानकारी को आपके दोस्तों को और सोशल मीडिया पर शेयर करके जानने का मौका दें।
अब इस पोस्ट को पढ़ें:- Income Tax क्या है? जाने सरकार क्यों हमसे टैक्स लेता है और इसकी क्या जरूरत है