TDS (Tax Deducted at Source) का मतलब है कि आपकी इनकम का एक हिस्सा पहले ही टैक्स के रूप में काट लिया जाता है, बहुत से वेतनभोगी व्यक्तियों को यह चिंता रहता है कि टीडीएस कब कटना शुरू होता है।
इसका सीधा जवाब यह है कि टीडीएस कटौती तब शुरू होती है जब आपकी सालाना इनकम आयकर छूट सीमा से ऊपर हो जाती है, लेकिन बहुत से लोगों का सवाल होता है कितनी सैलरी पर टीडीएस कटता है?
आज हम इन सवाल का जवाब पूरा जानेंगे पूरा सरल शब्दों में इसीलिए आप इस पोस्ट को लास्ट तक पढ़े, नहीं तो आप पूरा जानकारी नहीं समझ सकेंगे, आइए समझते हैं।
इस पोस्ट में क्या क्या है?
TDS काटने की न्यूनतम सीमा क्या है?
किसी का टीडीएस तभी काटा जाता है जब आपकी टैक्सेबल इनकम सरकार द्वारा बनाया गया न्यूनतम छूट सीमा से अधिक हो जाती है, लेकिन अब भारत में दो टैक्स व्यवस्थाएं हैं, इसलिए टीडीएस की सीमा भी उसी पर निर्भर करती है जिस नियम को आप चुनते हैं।
| टैक्स व्यवस्था | 60 वर्ष से कम आयु के लिए टैक्स फ्री लिमिट | रिबेट (धारा 87A) के बाद टैक्स-फ्री आय |
| पुरानी कर व्यवस्था | ₹2,50,000 | ₹5 लाख तक कोई टैक्स नहीं |
| नई कर व्यवस्था | ₹3,00,000 | ₹7 लाख तक कोई टैक्स नहीं (धारा 87A के तहत) |
टीडीएस कटने का नियम: आपके नियोक्ता ने आपकी सैलरी से टीडीएस काटना तब शुरू कर देता है जब आपकी कुल अनुमानित वार्षिक सैलरी, किसी भी कटौती के बाद, आपके द्वारा चुनी गई व्यवस्था की छूट सीमा से अधिक हो जाती है, जो ऊपर भी हमने आपको बताया।
अगर आपकी वार्षिक सैलरी ₹7 लाख तक है और आपने नई टैक्स व्यवस्था चुनी है तो आपका टीडीएस नहीं कटेगा, और यह सैलरी पर टीडीएस धारा 192 के अंदर कटा जाता है।
TDS कटौती की गणना कैसे होती है?
आपका टीडीएस काटा जाए या नहीं, यह जानने के लिए आपके मौजूदा कंपनी के (HR या Finance टीम) आपकी कुल वार्षिक आय का हिसाब करता है, मतलब सैलरी के अलावा आपके सभी इनकम के और इन्वेस्टमेंट की डिटेल्स उनको देनी होती है।
चरण 1: अनुमानित सकल आय की गणना
कंपनी आपकी सालाना सैलरी की गणना करता है, इसमें बेसिक सैलरी, भत्ते और परक्यूसिट्स भी शामिल होते हैं।
चरण 2: कटौती (Deductions) लागू करना
उसके बाद नियोक्ता आपसे पूछता है कि आप पुरानी या नई टैक्स व्यवस्था में से किसे चुनना चाहेंगे।
- यदि आप पुरानी व्यवस्था चुनते है: तब नियोक्ता आपकी सैलरी में से सभी कटौतियाँ (जैसे 80C, 80D, HRA, होम लोन का ब्याज) घटाता है।
- यदि आप नई व्यवस्था चुनते है: तब नियोक्ता सिर्फ ₹50,000 की मानक कटौती (Standard Deduction) घटाता है।
चरण 3: टैक्स देयता का निर्धारण
- अगर यह आपके इनकम कर योग्य आय छूट सीमा (₹2.5 लाख या ₹3 लाख) से अधिक होती है, तो उस अतिरिक्त आय पर टैक्स की गणना की जाती है।
- इस गणना किए गए वार्षिक टैक्स को 12 से भाग देकर मासिक टीडीएस की राशि निकला जाता है और हर उसे महीने काटा जाता है।
धारा 87A रीबेट का प्रभाव
- नई टैक्स व्यवस्था: में अगर आपकी इनकम ₹7 लाख तक है, तो आपको ₹25,000 तक की छूट मिलती है, जिससे आपकी टैक्स देना जीरो हो जाती है, इस मामले में आपके नियोक्ता आपसे कोई टीडीएस नहीं काटेगा।
- पुरानी टैक्स व्यवस्था: में अगर आपकी इनकम ₹5 लाख तक है, तो आपको ₹12,500 तक की छूट मिलती है, इससे भी टैक्स देना जीरो हो जाती है, इस मामले में भी कंपनी आपसे कोई टीडीएस नहीं काटेगा।
देखिए टीडीएस काटना शुरू होने की कम से कम छूट सीमा (₹2.5 लाख या ₹3 लाख) है, लेकिन 87A रीबेट के कारण असल में आपकी सैलरी में से टीडीएस कटना तभी शुरू होता है जब आपकी इनकम ₹7 लाख नई व्यवस्था में या ₹5 लाख पुरानी व्यवस्था में से ज्यादा हो जाती है।
तब आप टैक्सेबल इनकम के अंदर आते है अब शायद आपको समझमें आ गया होगा की कितनी सैलरी पर टीडीएस कटता है?, अब में आपको कुछ और बातें समझना चाहूंगा
कितनी सैलरी पर टीडीएस कटता है? टेबल से समझे
अब में आपको उल्टा पलटा कर 3 लाख और 7 लाख के बीच का नया और पुराना सैलरी पर टैक्स के नियम को दिखा रहा हूं ताकि आपको और क्लियर हो जाए:
| सालाना सैलरी | टैक्स व्यवस्था | टीडीएस कटेगा या नहीं |
| ₹4,50,000 | नई टैक्स व्यवस्था | नहीं कटेगा |
| ₹6,80,000 | नई टैक्स व्यवस्था | नहीं कटेगा (Rebate 87A से छूट) |
| ₹8,00,000 | नई टैक्स व्यवस्था | कटेगा |
| ₹5,20,000 | पुरानी टैक्स व्यवस्था | कटेगा |
| ₹4,00,000 | पुरानी टैक्स व्यवस्था | नहीं कटेगा |
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नई टैक्स व्यवस्था के अनुसार सैलरी पर टीडीएस के परसेंटेज
अब आप नीचे के टेबल से समझे 60 साल से कम आयु वाले लोगों को किस टैक्स स्लैब के अंदर आने से सैलरी से कितना परसेंटेज टीडीएस कटेगा:
| वार्षिक आय (Total Income) | टैक्स रेट (TDS Rate) | विवरण (Explanation) |
| ₹0 – ₹3,00,000 | 0% | टैक्स नहीं कटेगा (Tax Free Limit) |
| ₹3,00,001 – ₹7,00,000 | 5% | लेकिन ₹7 लाख तक रिबेट (87A) से टैक्स जीरो |
| ₹7,00,001 – ₹10,00,000 | 10% | रिबेट के बाद यह स्लैब लागू होगा |
| ₹10,00,001 – ₹12,00,000 | 15% | टैक्स + 4% सेस लगेगा |
| ₹12,00,001 – ₹15,00,000 | 20% | उच्च आय वालों के लिए |
| ₹15,00,001 से अधिक | 30% | अधिकतम दर (TDS Rate) |
| Health & Education Cess | 4% | टैक्स पर अतिरिक्त लागू होगा |
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क्या हर महीने टीडीएस काटा जाता है?
जी हाँ टीडीएस हर महीने सैलरी से काटा जाता है, लेकिन उसका जमा और रिपोर्टिंग हर तिमाही पर होती है, मतलब कि हर 3 महीने में आपका कंपनी सरकार को रिपोर्ट करता है कि कितना टीडीएस काटा गया है।
TDS Certificate (Form 16) कब मिलता है?
हर साल के 31 मई से आपका एंप्लॉयर आपको पिछले साल के Form 16 देना जारी करता है, जिसमें आपकी सालभर की सैलरी और टीडीएस की पूरी जानकारी होती है, इसीलिए आप हमेशा अपने एंप्लॉयर से टीडीएस सर्टिफिकेट लीजिए।
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कुछ ध्यान रखने वाली जरूरी बातें
- अगर आपकी इनकम ₹7,00,000 से ज़रा भी ज़्यादा है जैसे ₹7,05,000, तो आपको टैक्स देना पड़ेगा।
- इसलिए कई बार कंपनी थोड़ा टीडीएस काट देता है, ताकि साल के अंत में एडजस्ट किया जा सके।
- अगर बाद में आपकी इनकम ₹7 लाख से नीचे रह गई, तो आप आईटीआर फाइल करके पूरा टीडीएस रिफंड ले सकते हैं।
- अगर ज्यादा टीडीएस कट गया है, तो भी आप आईटीआर फाइल करके रिफंड ले सकते हैं।
- आपका कुल टैक्स जितना बनता है उसके ऊपर + 4% सेस (उपकर) लगता है।
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निष्कर्ष: सैलरी पर टीडीएस के बारे में
कुल मिलाकर बात यह है की अगर आपकी वार्षिक सैलरी और बाकी सारी इनकम मिलाकर टैक्स फ्री लिमिट से अधिक है, तभी नियोक्ता आपसे टीडीएस काटता है।
और नियोक्ता आपके हिसाब के बाद वार्षिक टैक्स के अनुसार हर महीने टीडीएस काटता है और उसे सरकार को जमा करता है।
में उम्मीद करता हूं कि कितनी सैलरी पर टीडीएस कटता है, नई और पुरानी टैक्स व्यवस्था में टैक्स फ्री लिमिट क्या है, और कंपनी कैसे करता है टीडीएस का कैलकुलेशन इन सबके बारे में पूरी जानकारी मिली है, अपने दोस्त और सोशल मीडिया पर इस पोस्ट को शेयर कर उनको भी जानकारी लेने में मदद कीजिए।
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कुछ FAQs (ज्यादा पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. अगर मेरी सैलरी ₹7,05,000 है तो क्या होगा?
ऐसे मामले में ₹7 लाख से ज्यादा जो ₹5,000 है उसपर सरकार एक (Marginal Relief) का नियम काम करता है और आपको 5,000 के बराबर टैक्स देना होगा।
Q2. क्या पुरानी टैक्स व्यवस्था में भी ₹7 लाख तक छूट है?
जी नहीं पुरानी व्यवस्था में ₹5 लाख तक की आय पर ही 87A रिबेट मिलती है, इसलिए ₹5 लाख से ऊपर आय पर टीडीएस लागू होता है।
Q3. 60 साल से ऊपर वालों के लिए क्या सीमा अलग है?
60 साल से ऊपर वालों के लिए क्या सीमा अलग है?
नई टैक्स व्यवस्था में सभी उम्र के लोगों के लिए सीमा एक समान ₹7 लाख है।
Q4. क्या कंपनी पर Form 15G या 15H भर सकते है?
जी नहीं Form 15G या 15H सिर्फ खुद से भरा जाता है, जैसे पीएफ विड्रॉल के लिए, लेकिन इन दोनों फॉर्म का उद्देश्य टीडीएस से बचना होता है।
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