भारत में जब से जीएसटी लागू हुआ है उसके के बाद से सबसे बड़ी गलती समय पर जीएसटी रिटर्न फाइल ना करना है, ऐसा कई बार हुआ है बिज़नेस ओनर और टैक्सपेयर अपने रिटर्न समय पर जमा नहीं कर पाते, इसके वजह से उन्हें Interest (ब्याज) और Late Fees (जुर्माना) देना पड़ा है।
ऐसा कही बार गलती से भी हुआ है और नियम को न जानने के कारण से भी लोग परेशानी में पड़े है, लेकिन आज हम इस आर्टिकल में विस्तार से समझेंगे कि अगर आप जीएसटी रिटर्न देर से फाइल करते हैं, तो इंटरेस्ट और लेट फीस कितने लगते है इसे कैसे कैलकुलेट किया जाता है, और आप इस जुर्माने से कैसे बच सकते है।
इस पोस्ट में क्या क्या है?
जीएसटी में इंटरेस्ट और लेट फीस क्यों लगती है?
हमारे देश के सरकार समय पर ही अपना टैक्स कलेक्शन करना चाहती है, लेकिन जब आप रिटर्न देर से फाइल करते हैं तो सरकार का इनकम पीछे पढ़ जाता है।
और अगर ऐसा कठिन नियम नहीं बनाया तो लोग इसे मजाक के रूप में समझेंगे और सभी अपना टैक्स जमा नहीं करेंगे, इसलिए जीएसटी कानून में इंटरेस्ट और लेट फीस दोनों लगाया गया है।
जीएसटी में लेट फीस कितना है?
असल में जीएसटी में लेट फीस दूं तरह से लगता है, जिनका पास जीएसटी सरकार को देने है और जिनका जीएसटी जीरो है, मतलब जो लोग जीएसटी नंबर लेने के कोई सामान खरीद और बिक्री न किया हो।
1. Normal Cases (GSTR-3B & GSTR-1) के लिए: इसमें ₹50 प्रति दिन लगता है (₹25 CGST + ₹25 SGST), और लेट फीस ज्यादा से ज्यादा ₹5,000 तक की होती है।
2. NIL Return Filing (अगर रिटर्न में कोई लेन देन नहीं है) इनके लिए: इसमें ₹20 प्रति दिन लगता है (₹10 CGST + ₹10 SGST), और लेट फीस ज्यादा से ज्यादा ₹500 तक की होती है।
एक उदाहरण से समझे: अगर आपको अक्टूबर महीने का GSTR-3B 20 नवंबर तक फाइल करना था, लेकिन आपने उसे 27 नवंबर को फाइल किया, तो आपको 7 दिन की लेट फीस देनी पड़ेगी।
जीएसटी लेट फीस कैलकुलेशन फॉर्मूला
आपको अपना Late Fee को कैलकुलेशन करने के लिए (Per Day Fee × Delay Days) इन दोनों को गुना करना चाहिए।
Example:-
- Delay = 7 दिन
- Normal Return (GSTR-3B)
- Fee = ₹50 प्रति दिन
तो आपका 7 दिन का लेट फीस होगा (7 × 50 = ₹350)।
अगर नील रिटर्न हुआ तो:- लेट फीस होगा = (7 × 20 = ₹140)।
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जीएसटी में इंटरेस्ट कब लगता है?
देखिए जीएसटी में लेट फीस के अलावा इंटरेस्ट तब लगाया जाता है जब आपने रिटर्न फाइल कर दिया और आपके पास (Tax Liability) सरकार को देने वाला टैक्स है और आपने उसे समय पर जमा नहीं किया।
या फिर आपने गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम किया और इस पैसे का इस्तेमाल भी कर लिया (मतलब आपने सरकार को कम टैक्स दिया), तब आप पर इंटरेस्ट लगाया जाता है।
Rate of Interest (इंटरेस्ट कैसे गणना होती है?):
- 18%: अगर आप देरी से टैक्स चुकाते है तो 18% इंटरेस्ट प्रति वर्ष के हिसाब से लगाया जाता है
- 24%: अगर आप ज्यादा आईटीसी का दावा करते है तो 24% इंटरेस्ट प्रति वर्ष के हिसाब से लगाया जाता है।
इस इंटरेस्ट का हिसाब उस दिन से शुरू होती है जिस दिन टैक्स पैसा देना था और उस दिन तक लगा रहता है जिस दिन आप टैक्स का पैसा जमा करते हैं।
एक उदाहरण से समझे: अगर आपको ₹2,00,000 का जीएसटी 20 अगस्त तक जमा करना था, लेकिन आपने इसे 20 सितम्बर को भरा, तो इस 30 दिन की देरी के लिए आपको ₹2,00,000 पर 18% की वार्षिक दर से ब्याज देना पड़ेगा।
जीएसटी इंटरेस्ट कैलकुलेशन फॉर्मूला
आपको अपना Interest को कैलकुलेशन करने के लिए {Tax Amount × Rate × (Delay Days ÷ 365)} इस फॉर्मूला को अपनाना होगा।
Example:-
- GST Payable = ₹2,00,000
- Delay = 30 दिन
- Rate = 18%
Interest = 2,00,000 × 18% × (30/365) तो 2,00,000 × 18\% = (2,00,000 × 0.18 = 36,000)
अब सिर्फ 30 दिन का निकालते है: 36,000 × 30/{365} तो 36,000 × 0.08219 = 2,959।
तो पूरी बात 30 दिन की देरी पर आपको ₹2,00,000 के टैक्स पर लगभग ₹2,959 इंटरेस्ट लगेगा।
ध्यान रखे: जितना ज्यादा टैक्स बचा है उस पर सालाना 18% की दर से हिसाब से ब्याज लगता है, इसीलिए आपका जितने दिन लेट हुए हैं, उतना दिन का आपको कैलकुलेट करना होगा जैसे मैने अभी आपको ऊपर बताया।
कुछ विशेष बात: याद रखे इंटरेस्ट की हिसाब बचा हुआ टैक्स की पैसे पर होती है, रिटर्न फाइल करने के देरी पर नहीं, लेकिन आप पर लेट फीस और इंटरेस्ट दोनों एक साथ लग सकते हैं।
आप यह भी जान ले कि अब अगर आप जीएसटी पोर्टल पर देरी से रिटर्न फाइल करते हैं, तो लेट फीस और अगर कोई टैक्स बकाया है तो इंटरेस्ट दोनों की गणना अपने आप हो जाती है, और रिटर्न फाइल करते समय जमा करना होता है।
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जीएसटी में लेट फीस और इंटरेस्ट में अंतर
अब में आपको एक छोटा सा टेबल बना कर दिखा रहा हूं ताकि आपको दोनों में अंतर को आसानी से समझ में आ जाए:
| विशेषता | लेट फीस (Late Fees) | इंटरेस्ट (Interest) |
| कारण | जीएसटी रिटर्न समय पर फाइल न करने के लिए | टैक्स का पैसा देरी से जमा करना |
| दर | ₹20 या ₹50 प्रति दिन | 18% या 24% प्रति वर्ष |
| कब लगती है | रिटर्न फाइल करने में देरी के दिन पर | पेंडिंग टैक्स की राशि पर |
| क्या दोनों एक साथ लग सकते हैं? | हाँ | हाँ |
इस टेबल में एक बात आपने नोटिस किया है मैने लास्ट में एक लाइन एड किया की आपके एक गलती पर लेट फीस और इंटरेस्ट दोनों लग सकते है, इस बात का आप ध्यान रखे।
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जीएसटी में पेनल्टी के टेबल
जीएसटी में पेनल्टी को में एक छोटा सा टेबल से समझाया हूं ताकि आपको और क्लियर समझमें आ जाए:
| देरी का कारण | Late Fee | Interest Rate |
| Normal Return (GSTR-3B, GSTR-1) | ₹50/दिन | 18% |
| NIL Return | ₹20/दिन | नहीं लगता |
| ज्यादा आईटीसी लिया गया तो | नहीं लगता | 24% |
आप जीएसटी के जुर्माना और लेट फीस से कैसे बचे
जीएसटी के जुर्माना और लेट फीस से बचने के लिए आप आपने गलत आईटीसी का क्लेम न करें, गलती से अगर आईटीसी ज्यादा आ गया तो अपने देने हुए टैक्स में इसको शामिल न करें।
सही समय पर अपना जीएसटी जमा करें चाहे आपका सेल हो या न हो, और अगर बिक्री पर जीएसटी दर कम या ज्यादा हो गया है तो Credit Note और Debit Note का इस्तेमाल करें।
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निष्कर्ष: जीएसटी में रिटर्न देरी से फाइल करने का
अंत में और एक बार अगर आप जीएसटी रिटर्न देर से फाइल करते हैं, तो आप पर Late Fee + Interest दोनों देना पड़ सकता है।
- Late Fee आपके रिटर्न की ऊपर (Normal या NIL) पर निर्भर करती है।
- Interest सिर्फ Pending Tax Amount पर लगता है।
इसलिए आप हमेशा कोशिश करें कि जीएसटी रिटर्न डेट खत्म होने से पहले फाइल करें ताकि आपको एक्स्ट्रा जुर्माना और ब्याज न देना पड़े।
जीएसटी पोर्टल पर लेट फीस और इंटरेस्ट अपने आप काउंट होकर दिखाई देती है, इन पैसे को अपना रिटर्न फाइल करते समय देना होता है।
में उम्मीद करता हू कि जीएसटी रिटर्न देरी से फाइल करें तो इंटरेस्ट और लेट फीस कैसे हिसाब होता है? इसके सभी तरीका और इन गलती से बचने का सभी तरीका को आपने समझ लिया है, अपने दोस्त और सोशल मीडिया पर इस पोस्ट को शेयर कर उनको भी जानकारी लेने का मौका दे।
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FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. क्या लेट फीस पर भी इंटरेस्ट लगता है?
जी नहीं इंटरेस्ट सिर्फ टैक्स अमाउंट पर लगता है, लेट फीस पर नहीं।
Q2. क्या लेट फीस की कोई लिमिट है?
जी हाँ अधिकतम ₹5,000 तक ही लेट फीस लगाया जाता है।
Q3. नील रिटर्न देर से भरने पर भी लेट फीस लगेगा?
जी हाँ नील रिटर्न पर ₹20 प्रति दिन लेट फीस लगता है, यह ज्यादा से ज्यादा ₹500 तक होती है।
Q4. अगर में टैक्स जमा कर दिया लेकिन जीएसटी रिटर्न देर से भरा तो इंटरेस्ट लगेगा?
जी नहीं इंटरेस्ट तब लगेगा जब जीएसटी पेमेंट में लेट हुआ हो, रिटर्न के देरी से लेट फीस लगती है।
Q5. क्या आईटीसी (Input Tax Credit) की गलती Debit/Credit Note से ठीक होती है?
जी नहीं Credit Note और Debit Note सिर्फ बेचे हुए सामान पर (जितना आप टैक्स कलेक्ट करते हैं और सरकार को देते हैं) उनकी गलती को ठीक करने के लिए होते हैं।
अगर आपने आईटीसी ज्यादा ले लिया या कम ले लिया, तो उसे ITC Reversal या Rectification से ठीक करना पड़ता है, Debit या Credit Note से नहीं।
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