जीएसटी रजिस्ट्रेशन लिमिट 10/20 लाख और 20/40 लाख कौन सा सही है?

बहुत से छोटे व्यवसायी और फ्रीलांसर जीएसटी रजिस्ट्रेशन 10/20 लाख और 20/40 लाख है इसमें कौन सा सही है कब जीएसटी रजिस्ट्रेशन करना चाहिए इन बात को लेकर टेंशन में रहते है, क्योंकि दोनों सुनने को मिलते है।

आपका सुना हुआ बात बिल्कुल सही है इसका कारण है स्टेट कैटेगरी (स्पेशल और नॉर्मल) और गुड्स और सर्विस की अलग अलग लिमिट सरकार ने बनाया है, इन बातों को पूरा समझना आपके लिए जरूरी है।

इसमें काफी भ्रम रहता है क्योंकि जीएसटी नियम अलग अलग तरह की सप्लायर्स और अलग अलग राज्यों के लिए अलग हैं, हम यह भी बात करेंगे अगर 20/40 है तो वह कब से लागू हुआ? और साथ में कुछ राज्य अपने हिसाब से 40 लाख की सीमा चुन सकते हैं।

GST रजिस्ट्रेशन की सीमा कितनी है

जीएसटी रजिस्ट्रेशन के सीमा 10/20 लाख और 20/40 लाख दोनों सही है लेकिन यह आपकी बिज़नेस की तरीका (सामान या सेवा) और आपके राज्य पर निर्भर करता है, भारत में जीएसटी रजिस्ट्रेशन की सीमाएं कुछ इस प्रकार हैं:

सामान्य राज्यों (General Category States) के लिए:

  1. सामान (Goods) की सप्लाई करने वालों के लिए ₹40 लाख का सालाना टर्नओवर के लिमिट है।
  2. वही सेवाओं (Services) की सप्लाई करने वालों के लिए ₹20 लाख का सालाना टर्नओवर के लिमिट है।

विशेष श्रेणी के राज्यों (Special Category States) के लिए:

  1. सामान (Goods) की सप्लाई करने वालों के लिए ₹20 लाख का सालाना टर्नओवर के लिमिट है।
  2. वही सेवाओं (Services) की सप्लाई करने वालों के लिए ₹10 लाख का सालाना टर्नओवर के लिमिट है।

इंटर-स्टेट सप्लाई (Inter-state supply): अगर आप अपने राज्यों से किसी दूसरे राज्य में सप्लाई करते हैं तो जीएसटी रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य है, भले ही आपका टर्नओवर लिमिट कुछ भी कम या ज्यादा हो।

₹20 लाख और ₹40 लाख की लिमिट कब से शुरू हुई?

जीएसटी में यह बदलाव 1 अप्रैल 2019 से लागू हुए थे, इससे पहले सामान्य राज्यों के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन की सीमा ₹20 लाख (सामान और सेवा दोनों के लिए) थी और विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए ₹10 लाख थी। 

2019 में हुए इन बदलावों का असली उद्देश्य छोटे और मध्यम व्यवसायों (MSMEs) पर जीएसटी नियम का बोझ को कम करना था, और कुछ राज्यों ने अपनी सहमति से सामान (Goods) वाले कारोबार के लिए सीमा ₹40 लाख और ₹20 लाख सेबा (Service) पर चुन सकता है।

संशोधित नियम (2019 के बाद से एक टेबल)

श्रेणीसामान (Goods) के लिए लिमिटसेवा (Services) के लिए लिमिट
सामान्य राज्य₹40 लाख₹20 लाख
विशेष राज्य₹20 लाख₹10 लाख

क्यों कुछ राज्य अपने हिसाब से ₹40 और ₹20 लाख की लिमिट चुन सकते हैं?

जीएसटी काउंसिल ने कुछ राज्यों को एक हद तक लचीलापन दिया है, खासकर सामान की सप्लाई करने वाले व्यवसायों के लिए, जब 2019 में ₹40 लाख की नई सीमा बनाई गई थी, तब राज्यों को यह ऑप्शन दिया गया था कि वह चाहें तो सामान की सप्लाई के लिए पुरानी ₹20 लाख की सीमा रख सकते हैं, या फिर नई ₹40 लाख की सीमा को अपना सकते हैं।

इसके पीछे का कुछ मुख्य कारण हैं:

राज्य की आर्थिक स्थिति और राजस्व पर प्रभाव: कुछ राज्य यह हिसाब लगा सकते हैं कि ₹40 लाख की सीमा अपनाने से उनके टैक्स कलेक्शन कम हो सकता है, क्योंकि तब कम व्यवसायी जीएसटी के दायरे में आएंगे।

स्थानीय व्यवसायों का स्वरूप: किसी राज्य में अगर ज्यादातर बहुत छोटे व्यवसायी हैं, तो वह ₹20 लाख की सीमा को बनाए रखना पसंद कर सकते हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा व्यवसायी जीएसटी नेटवर्क में आ सकें, भले ही वह बहुत बड़े व्यापारी न हों।

राज्यों की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए: जीएसटी काउंसिल सभी राज्यों की आर्थिक स्थिति और भौगोलिक परिस्थितियों को समझती है, इसीलिए राज्यों को अपने अपने लक्ष्यों और जरूरतों के हिसाब से निर्णय लेने की अनुमति दी गई है।

अब तो आप समझ गए होंगे केंद्र सरकार ने ₹40 लाख की नया जीएसटी नियम सीमा को इसीलिए लाया था ताकि छोटे व्यापारियों को टैक्स के टेंशन न हो, लेकिन राज्यों को भी यह चुनने की स्वतंत्रता दी गई की वह इसे अपनाना चाहते हैं या नहीं।

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अब सामान्य राज्यों और विशेष श्रेणी कौन कौन सी है

उत्तर पूर्वी के कुछ छोटे श्रेणी के राज्य है जैसे अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, सिक्किम, उत्तराखंड, पुडुचेरी और तेलंगाना यह अभी भी ₹20 लाख की सीमा का पालन करते हैं

और कुछ विशेष श्रेणी के राज्यों जैसे असम, हिमाचल प्रदेश, और जम्मू और कश्मीर ने सामान के लिए ₹40 लाख की सीमा को लागू किया है।

वहीं मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा जैसे कुछ विशेष श्रेणी के राज्यों में सामान और सेवाओं दोनों के लिए ₹10 लाख की सीमा अभी भी लागू है।

इसीलिए आपको हमेशा अपने राज्य और आप जिस प्रकार की सप्लाई (सामान या सेवा) कर रहे हैं, उसके हिसाब से वर्तमान जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिमिट को देखना चाहिए।

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गुड्स और सर्विस में अंतर क्या है?

अब में आपको गुड्स और सर्विस में क्या अंतर है वह भी बता देता हूं ताकि आपके कुछ टेंशन कम हो जाए।

गुड्स (Goods): यह वह वस्तुएँ होती हैं जिन्हें देखा या छुआ और खरीदा या बेचा जा सकता है, जैसे मोबाइल फोन, कपड़े, राशन की सामान, फर्नीचर, कार आदि।

सर्विस (Services): यह वह अनछुई चीज होती हैं जिसे देखा या छुआ नहीं जा सकता, सिर्फ इस्तेमाल किया जा सकता है, जैसे मोबाइल रिचार्ज, फ्रीलांसिंग सर्विस या ऑनलाइन क्लास।

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निष्कर्ष: जीएसटी रजिस्ट्रेशन सीमा के बारे में

अंत में 10/20 लाख और कुछ जगह 20/40 लाख वाली जीएसटी रजिस्ट्रेशन के सीमा दोनों सही हैं, बस किस राज्य और किस प्रकार के व्यापार के हिसाब से लागू होते हैं, यह आपको देखना है।

जैसे ही आपका राज्य का टर्नओवर लिमिट से ऊपर चला जाता है तब आपको जीएसटी रजिस्ट्रेशन कर लेना चाहिए, और आपके खरीदे हुए सामान का आईटीसी का लाभ ले सकते है।

लेकिन अगर आप दूसरे राज्य में या ऑनलाइन सामान बेचना चाहते है तो आपको सीमा देखे बिना ही रजिस्ट्रेशन करना होगा यही नियम है, आप अपना पूरा साल का हिसाब करें की कहां और कैसे आप सेल कर रहे है और उसके बाद जीएसटी नंबर के लिए अप्लाई करें।

में उम्मीद करता हूं की आपको GST रजिस्ट्रेशन लिमिट 10/20 लाख और 20/40 लाख कौन सा और कब चुनना है इसके बारे में जानकारी मिली है, अपने दोस्त और सोशल मीडिया पर इस पोस्ट को शेयर कर उनको भी जानकारी लेने में मदद कीजिए।

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