GST बिल कैसे बनाएं? स्टेप बाय स्टेप गाइड पूरी जानकारी

सवाल जीएसटी बिल कैसे बनाएं? जीएसटी बिल बनाने से पहले आपको इनका सही फॉर्मेट, सभी जरूरी डिटेल्स, सॉफ्टवेयर और नियमों को स्टेप बाय स्टेप जानना होगा।

आज में आपको जीएसटी इनवॉइस बनाने की पूरी तरीका बताऊंगा इसलिए आप इस पोस्ट को लास्ट तक पढ़ें, आप एक भी पॉइंट मिस ना करें नहीं तो आपका जानकारी अधूरी रह जाएगी।

GST बिल क्या होता है?

जीएसटी बिल (Tax Invoice) यह वह डॉक्यूमेंट है जो कोई व्यापारी अपने ग्राहक को माल या सेवा बेचने के बाद देता है, इसमें सामना का नाम, रेट, टैक्स दर और जीएसटी नंबर जैसे सभी जानकारियाँ लिखा होता हैं। 

यह बिल सरकार को बताता है कि आपने कौन सा टैक्स चार्ज किया, कितना परसेंटेज किया और ग्राहक को कितना Input Tax Credit (ITC) देना है।

जब भी कोई आपसे सामान खरीदता है तो इस जीएसटी बिल मे सब कुछ लिखा रहता है, और ग्राहक जो आपको जीएसटी दिया है अगर वह सामान आगे सेल कर रहा है तो वह आपको दिए हुए जीएसटी का आईटीसी का दावा कर सकता है।

जीएसटी बिल बनाते समय जरूरी जानकारी

जीएसटी बिल बनाने के समय क्या क्या शामिल होना चाहिए इसका लिस्ट में नीचे दिया हूं:

  1. सप्लायर का नाम, पता और GSTIN नंबर
  2. इनवॉइस नंबर और तारीख
  3. बॉयर का नाम, पता और GSTIN (अगर हो)
  4. सप्लाई का डिटेल्स जैसे माल या सेवा का नाम, कितनी मात्रा, रेट, टैक्सेबल वैल्यू
  5. जीएसटी रेट और अमाउंट (CGST, SGST या IGST)
  6. टोटल अमाउंट जीएसटी के साथ
  7. सिग्नेचर या डिजिटल सिग्नेचर

GST बिल के प्रकार

जीएसटी बिल कितने प्रकार के होते है यह भी जानना आपके लिए जरूरी है इनवॉइस बनाने से पहले, जीएसटी बिल तो बहुत प्रकार के होते है लेकिन यह तीन सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है:

  1. Tax Invoice: जब आप रजिस्टरड डीलर को माल या सेवा बेचते हैं
  2. Bill of Supply: जब आप कंपोजिशन स्कीम में हों या टैक्स फ्री माल बेच रहे हों
  3. Credit Note & Debit Note: जब किसी बिल में अमाउंट को ठीक करना हो

इस पोस्ट से जाने:- Credit Note और Debit Note जीएसटी में क्या हैं? जानें आसान बातों से

GST बिल बनाने के आसान तरीका

(1) Manual तरीका: आप माइक्रोसॉफ्ट एक्सल या वर्ड में एक टेम्पलेट बना सकते हैं, और बस नीचे दिए गए इमेज के जैसा सभी कॉलम को जोड़ना है जैसे नाम, जीएसटीआईएन, एचएसएन कोड, अमाउंट, टैक्स रेट आदि।

Gst Invoice Format

(2) Online तरीका: अगर आपको टेम्पलेट बनाना नहीं आता और आसानी से काम चाहिए तो इसके लिए कई वेबसाइट और सॉफ्टवेयर हैं ऑनलाइन पर जहाँ आप आसानी से बिल बना सकते हैं।

लेकिन इनका पैड प्लान है यह फ्री नहीं है, इनमें आप अपने जीएसटी के सभी डिटेल्स भरकर बिल डाउनलोड या प्रिंट कर सकते हैं।

अगर आपके पास बजेट कम है और ज्यादा बिल बनाने के जरूरत नहीं पड़ती, तो आप यूट्यूब देखकर माइक्रोसॉफ्ट एक्सल पर टेम्पलेट बनान सीखें इससे आपका काम फ्री में हो जाएगा।

और एक बात आपको और भी बिल देखने को मिलेंगे जो अलग डिजाइन का होगा, सब अपने हिसाब से बनाते है, में सिर्फ ऊपर एक उदाहरण दिया हु आपको बिल दिखाकर की कैसे दिखता है जीएसटी बिल, बाकी जरूरी चीजें तो सभी सेम ही रहेगा थोड़ा ऊपर नीचे रह सकता है।

इस पोस्ट से जाने:- ऑनलाइन सामान बेचना है? आपके लिए GST के जरूरी नियम (सरल भाषा में समझें)

GST बिल में HSN Code और SAC Code क्यों जरूरी हैं

जीएसटी बिल मे माल के लिए एचएसएन कोड और सेवाओं के लिए एसएसी कोड लिखना जरूरी होता है, सभी प्रोडक्ट और सेबा का अलग अलग कोड होता है।

इस कोड से आप सरकार को बताते है कि आपने कौन सा सामान या सेवा बेची है, इस कोड से किसी भी प्रोडक्ट का डिटेल्स जल्दी पता कर सकते है।

  • अगर आपका सालाना टर्नओवर ₹5 करोड़ से कम है, तो आपके लिए 4 अंक का एचएसएन कोड काफी है।
  • और अगर ₹5 करोड़ से ज्यादा टर्नओवर है तो 6 अंक का एचएसएन कोड जरूरी है।

आपको कभी भी एचएसएन कोड बिल पर गलत नहीं लिखना अच्छे से सर्च कर लिखना है, मैं सरकारी साइट का लिंक दे रहा हूं आप बाद में देख सकते है HSN Code Check

जीएसटी में गलत एचएसएन या एसएसी कोड डालने से टैक्स के प्रेसेंटेज में कम और ज्यादा हो सकता है, इसके लिए आपको जीएसटी विभाग से नोटिस भी आ सकते है, इसीलिए सतर्क रहें।

इस पोस्ट से जाने:- GST में गलत HSN Code डालने पर कितना जुर्माना? और इससे कैसे बचे जानिए पूरी जानकारी

जीएसटी बिल में टैक्स की हिसाब कैसे करें?

अब में आपको एकदम सरल बातों से जीएसटी बिल में टैक्स की हिसाब को दिखा रहा हूं ताकि आपको बाद में परेशानी न हो, मान लीजिए आपने ₹2000 का सामान बेचा और उसपर जीएसटी दर 18% है:

सामान का कीमत (Taxable Value) = ₹2000
CGST (9%) = ₹180
SGST (9%) = ₹180
Total Bill = ₹2360

फिर से एक बार आपको समझा रहा हूं आपके सामान के अमाउंट को लेना है और 100 से डिवाइड करना है, जो हिसाब निकलता है उसको 18 से गुना करना है तो आपका 18% निकल जाएगा, और उसको आधा करने से 9% हो जाएगा।

आप CGST या SGST इन सभी को समझने के लिए यह पोस्ट पढ़े:- GST क्या है? जानें वस्तु एवं सेवा कर के 4 प्रकार (CGST, SGST, IGST, UTGST) और उनका मतलब

GST बिल को GSTR Filing में कैसे दिखाएं?

आप जो भी जीएसटी कलेक्ट करते है वह सरकार को देने के लिए जीएसटी रिटर्न करना होता है, इसे ही जीएसटीआर फाइलिंग कहते है।

हर महीने या तिमाही में जब आप GSTR-1 फाइल करते हैं, तब सभी बिलों का डिटेल्स उसी में जमा करना होता है।

और GSTR-3B में आप ग्राहक से लिया हुआ जीएसटी सरकार को जमा करते है।

इससे ग्राहक के GSTR-2B में आपका बिल दिखाई देता है और उसे ITC मिलता है, आईटीसी से एक ही सामान पर बार बार टैक्स नहीं लगता।

इस पोस्ट से जाने:- GSTR-1 और GSTR-3B में क्या अंतर है? जानें आसान भाषा में

इस पोस्ट से जाने:- ITC का दावा क्या है और इसे कैसे करें? जानें इनपुट टैक्स क्रेडिट के नियम और GSTR-2B का महत्व

जीएसटी बिल में कुछ गलतियाँ जो नहीं करनी चाहिए

जीएसटी बिल बनाने समय कुछ गलतियाँ ऐसे है जो कभी नहीं करनी चाहिए, में कुछ गलती नीचे दिया हु जो ज्यादा तर लोग करते है:

  1. गलत एचएसएन और एसएसी कोड डालना
  2. बार बार एक ही इनवॉइस नंबर लिखना
  3. बॉयर का गलत जीएसटीआईएन लिखना
  4. जीएसटी में रजिस्टर नहीं है ऐसे ग्राहक के लिए टैक्स इनवॉइस बनाना
  5. गलत जीएसटी दर लगाना

इस पोस्ट से जाने:- जीरो सेल होने पर भी GST रिटर्न भरना है क्या? नहीं भरने पर कितनी पेनल्टी लगेगी?

निष्कर्ष: जीएसटी बिल के बारे में

जीएसटी बिल उतना बनाना मुश्किल नहीं है जितना लगता है, बस सरकार के बनाए नियमों का पालन करें, सही जानकारी डालें और हमेशा हर ट्रांजेक्शन का रिकॉर्ड रखें।

ऐसा करने से न केवल आपका टैक्स रिकॉर्ड सही रहेगा बल्कि इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) में भी कोई दिक्कत नहीं होगी।

में उम्मीद करता हूं कि आपको जीएसटी बिल बनाने के बारे में सभी जानकारी मिली है, अपने दोस्त और सोशल मीडिया पर इस पोस्ट को शेयर कर उनको भी जानकारी लेने का मौका दीजिए।

इस पोस्ट से जाने:- GST में Input Tax और Output Tax में क्या अंतर है? जाने पूरी जानकारी

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