जीएसटी में ऑडिट क्या है और किन पर लागू होता है? ऐसे सवाल का जानकारी सबके पास नहीं होता है, देखिए कानून के अंदर, सरकार यह कन्फर्म करना चाहती है कि हर टैक्सपेयर सही ढंग से रिटर्न भर रहा है कि नहीं।
टैक्स की गणना ठीक से कर रहा है क्या, और कोई गलती या धोखाधड़ी तो नहीं हो रही है, इस उद्देश्य के लिए जीएसटी ऑडिट (GST Audit) किया जाता है, आज हम इस पोस्ट में पूरा विस्तार से बात करेंगे इसलिए आप इस पोस्ट को लास्ट तक पढ़े।
इस पोस्ट में क्या क्या है?
GST ऑडिट क्या है
जीएसटी ऑडिट एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी टैक्सपेयर के सभी रिकॉर्ड जैसे टैक्स रिटर्न, आईटीसी, इनवॉइस, और अन्य वित्तीय डॉक्यूमेंट को सरकार के तरफ से जांच की जाती थी ताकि यह कन्फर्म किया जा सके कि जीएसटी कानून के सभी नियम कानून का सही पालन हो रहा है।
यह जांच सरकार के टैक्स अधिकारियों जैसे चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) या कॉस्ट अकाउंटेंट (CMA) द्वारा किया जाता था, आपका सभी डिटेल्स चेक करने के लिए जो ऊपर सभी डॉक्यूमेंट का बात किया था, इसमें शामिल था:
- आपके अकाउंट बुक्स की जांच
- रिटर्न और असली टैक्स पेमेंट का मिलान
- किसी गलती या अंतर की रिपोर्टिंग
लेकिन FY 2021 से अब यह नियम बदल चुके है, अब किसी सीए से ऑडिट की नियम को खत्म कर दी गई है, अब केवल Self-certification की जरूरत है, मतलब टैक्सपेयर खुद GSTR-9C फाइल कर सकता है।
GST ऑडिट की आवश्यकता कब होती है
देखिए जीएसटी ऑडिट तब जरूरी होता है जब किसी व्यक्ति या कंपनी का सालाना टर्नओवर ₹5 करोड़ से ज्यादा हो जाता है, ऐसे मामलों में टैक्सपेयर को खुद अपने वार्षिक रिटर्न (GSTR-9) के साथ साथ ऑडिट रिपोर्ट (GSTR-9C) भी जमा करनी होती है।
पहले सालाना टर्नओवर के लिमिट ₹2 करोड़ था लेकिन 2021 से GSTR-9C (self-certified reconciliation statement) के माध्यम से मतलब खुद से जीएसटी ऑडिट जमा करने के तरीका को पहले से आसान बनाया गया है।
GSTR-9C क्या है?
फॉर्म GSTR-9C एक ऑडिटेड रिकंसिलिएशन स्टेटमेंट है जिससे प्रमाण होता है कि टैक्सपेयर से जमा की गई रिटर्न (GSTR-9) और उसके ऑडिटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट में कोई गलती नहीं है, इसमें सही टैक्स का हिसाब और घोषणा सभी सही है इस बात का प्रमाण देता है।
सरकार के पास GSTR-9C जमा करना अच्छा मौका है, क्योंकि इस ऑडिट में करदाता को अपनी सभी गलतियों को सुधारने और बचा हुआ टैक्स जमा करने का लास्ट मौका मिलता है।
GSTR-9 और GSTR-9C में अंतर
| बिंदु | GSTR-9 | GSTR-9C |
| उद्देश्य | सालाना रिटर्न जमा करना | ऑडिट रिपोर्ट जमा करना |
| कौन भरता है | जिनका टर्नओवर 2 करोड़ से ज्यादा है | सिर्फ जिनका टर्नओवर ₹5 करोड़ से ज्यादा है |
| कौन तैयार करता है | खुद टैक्सपेयर | खुद टैक्सपेयर |
GSTR-9: यह एक एनुअल रिटर्न है जिसमें आपका पूरे साल की सभी खरीद, बिक्री, आईटीसी और टैक्स डिटेल्स जमा की जाती हैं।
GST ऑडिट के प्रकार
जीएसटी के अंदर तीन प्रकार के ऑडिट होते हैं जो हमने नीचे लिखा हूं और इनके बारे में हम नीचे और पॉइंट ऐड किया हूं:
1. Turnover Based Audit (धारा 35(5))
पहले जब किसी टैक्सपेयर का टर्नओवर ₹2 करोड़ से ज्यादा हो जाता है, तो उसे एक चार्टर्ड अकाउंटेंट या कॉस्ट अकाउंटेंट से अपने अकाउंट्स की ऑडिट करानी होती है, ऑडिट के बाद Form GSTR-9C जमा करना होता था, लेकिन अब यह धारा 35(5) नहीं है अब खुद से GSTR 9C जमा करना होता है।
2. Departmental General Audit (धारा 65)
यह ऑडिट जीएसटी विभाग की ओर से किया जाता है, इसमें जीएसटी अधिकारी टैक्सपेयर के रिकॉर्ड, स्टॉक, इनवॉइस और अन्य डॉक्यूमेंट की जांच करते हैं, इसमें ऑडिट की खबर टैक्सपेयर को कम से कम 15 दिन पहले फॉर्म GST ADT-01 दी जाती है।
यह किसी भी समय शुरू हो सकता है और इसके लिए कोई टर्नओवर लिमिट नहीं है, लेकिन बड़े करदाताओं को ज्यादा ध्यान दी जाती है, यह जनरल ऑडिट जीएसटी अधिकारी करदाता के ऑफिस या व्यापार स्थान पर आकर खाता, रिकॉर्ड और रिटर्न की जाँच करते हैं।
यह ऑडिट शुरू होने के 3 महीने के भीतर पूरा होना चाहिए लेकिन ज्यादा प्रॉब्लम में 6 महीने तक बढ़ाया जा सकता है, अधिकारी आपके रिकॉर्ड्स इनवॉइस, बैंक स्टेटमेंट, GSTR-1 और GSTR-3B की जाँच पूरी होने पर, रिपोर्ट की डिटेल्स फॉर्म GST ADT-02 में दी जाएगी और इसमें ऑडिट में पाई गई सभी गलती बताई जाएगी।
3. Special Audit (धारा 66)
यह ऑडिट तब होता है जब मामला बहुत गंभीर या मुश्किल हो, इसमें जांच या कार्यवाही के समय किसी अधिकारी को लगता है कि आपने माल की वैल्यू गलत दिखाई है, या आपने आईटीसी (Input Tax Credit) अपनी सीमा से ज़्यादा लिया है।
और टैक्स की गड़बड़ी या गलत गणना का शक हो, तो वे कमिश्नर की अनुमति से स्पेशल ऑडिट करवा सकते हैं, यह ऑडिट केवल किसी CA या CMA से किया जाता है, और इसे 90 दिनों के भीतर पूरा करना होता है।
एक नजर टेबल में डाले
| विशेषता | Section 35(5) (अब 9C) | Section 65 | Section 66 |
| प्रकार | खुद प्रमाण करना है | विभागीय ऑडिट | विशेष ऑडिट |
| कौन करता है | खुद व्यापारी | जीएसटी अधिकारी | सरकार द्वारा नियुक्त CA |
| उद्देश्य | रिकॉर्ड का मिलान | रिकॉर्ड की सामान्य जांच | अमाउंट या आईटीसी में गड़बड़ी की जांच |
| फीस | व्यापारी वहन करता है | मुफ्त (सरकारी तरीका) | सरकार वहन करती है |
जीएसटी ऑडिट की टर्नओवर सीमाएँ
जीएसटी ऑडिट के लिए आपकी पिछली वित्तीय वर्ष की बिक्री (टर्नओवर) पर निर्भर करता है, हमने यह पहले भी बताया फिर भी एक टेबल से समझे:
| सालाना टर्नओवर | GSTR-9 फाइल | GSTR-9C फाइल | कौन फाइल करेगा |
| ₹2 करोड़ तक | जरूरी नहीं | जरूरी नहीं | नहीं फाइल करना है |
| ₹2 करोड़ से ₹5 करोड़ | जरूरी है | जरूरी नहीं | खुद टैक्सपेयर |
| ₹5 करोड़ से ज्यादा | जरूरी है | सेल्फ-सर्टिफिकेशन के साथ फाइल करना जरूरी है | खुद टैक्सपेयर |
GST ऑडिट के लिए जरूरी डॉक्यूमेंट
सबसे जरूरी बात आपको जानना जरूरी है, जीएसटी ऑडिट करते समय आपको कुछ जरूरी डॉक्यूमेंट दिखाना होता हैं जैसे:
- सभी बिक्री और खरीद के रजिस्टर
- इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़ा डिटेल्स
- आपका बैंक स्टेटमेंट
- इनवॉइस और डेबिट और क्रेडिट नोट्स
- GSTR-1 और GSTR-3B साथ में GSTR-9 की कॉपी
- वित्तीय स्टेटमेंट जैसे बैलेंस शीट
- टैक्स पेमेंट के चालान
- ई-वे बिल का डिटेल्स (अगर चाहिए तो)
- ऑडिट रिपोर्ट (फॉर्म GSTR-9C)
जीएसटी ऑडिट की तरीका
आप अगर जान लेंगे ऑडिट की प्रक्रिया कैसे होती है? तो आप आगे के काम को आसानी से कर सकते है:
आप जब खुद से ऑडिट के तैयारी करेंगे: आप अपने सभी डॉक्यूमेंट और रिटर्न तैयार करेंगे और सभी एंट्री, इनवॉइस और क्रेडिट का मिलान करेंगे।
अगर कोई अंतर या गलती मिलती है तो उसे रिपोर्ट करेंगे और अंतिम में GSTR-9C रिपोर्ट तैयार होने के बाद है उसे जीएसटी पोर्टल पर अपलोड कर देंगे।
जब जीएसटी अधिकारी से ऑडिट किया जाएगा: पहले ऑडिटर से आपको नोटिस या सूचना भेजी जाती है 15 दिन पहले, और आपको सभी जरूरी रिकॉर्ड और डॉक्यूमेंट दिखाने होते हैं।
ऑडिट टीम आपकी रिकॉर्ड की जांच करती है, अगर कोई गलती या ऊंच नीच पाई जाती है, तो रिपोर्ट में दिखाया जाता है, और जरूरत पड़ने पर आप पर टैक्स, ब्याज या पेनल्टी भी लगाई जा सकती है।
| विवरण | समय सीमा | किसके लिए है? |
| GSTR-9/9C फाइलिंग | अगले वित्तीय वर्ष की 31 दिसंबर। | करदाता के लिए। |
| विभागीय ऑडिट की समय | शुरू होने से 3 महीने (ज्यादा से ज्यादा 9 महीने)। | जीएसटी अधिकारी के लिए। |
| ऑडिट रिपोर्ट (ADT-02) | ऑडिट पूरा होने के 30 दिनों के भीतर। | जीएसटी अधिकारी से करदाता को। |
ऑडिट के बाद की कार्रवाई
अगर ऑफिसर ऑडिट करते समय में कोई गलती या टैक्स चोरी पाई जाती है, तो विभाग कारण बताओ नोटिस (SCN – Show Cause Notice) जारी करता है।
- धारा 73: यह नोटिस तब दिया जाता है जब टैक्स की गलती अनजाने में या बिना किसी धोखाधड़ी के इरादे से हुई हो।
- धारा 74: यह तब लागू होता है जब विभाग को लगता है कि टैक्स की चोरी जानबूझकर, धोखाधड़ी या सच्चाई को छुपाकर की गई हो।
और बाद में टैक्सपेयर को टैक्स, ब्याज या पेनल्टी जमा करनी पड़ सकती है, और अगर कोई बड़ी गलती पाया जाता है, तो आगे और जांच हो सकती है या जीएसटी रजिस्ट्रेशन कैंसिल भी हो सकती है।
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GST ऑडिट में मिलने वाली सामान्य गलतियाँ
जीएसटी ऑडिट पर कुछ गलतियाँ जो ज्यादा सामने आता है वह आप देख लीजिए आपके लिस्ट में है या नहीं:
- गलत आईटीसी क्लेम और GSTR-2B से मैच नहीं हो रहा
- आपके इनवॉइस पर गलत जीएसटी रेट
- बिना रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म के विदेशी सेवाओं पर पेमेंट किया
- एचएसएन या एसएसी कोड का गलत इस्तेमाल
- देरी से GSTR-9 या 9C फाइल करना
ऊपर के दिए गए इन गलतियों से बचने के लिए अपना टैक्स रिकॉर्ड को हमेशा अपडेट रखिए और प्रत्येक माह के रिटर्न को मिलान जरूर करें।
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कुछ जरूरी बातें सेल्फ सर्टिफिकेशन GSTR-9C बनाते समय
जब आप ₹5 करोड़ से अधिक टर्नओवर पर GSTR-9C को खुद बना रहे हैं तो देखें कि:
रिकंसिलिएशन: आपकी बुक्स ऑफ़ अकाउंट्स (Tally, Zoho Books, आदि) पर दिया गया पूरा टर्नओवर आपके GSTR-9 में दिया गया टर्नओवर से पूरी तरह से मेल खाता हो।
बचा हुआ टैक्स पेमेंट: GSTR-9C में अगर टैक्स पेंडिंग मिले तो उसका पेमेंट GSTR DRC-03 के माध्यम से जल्दी जमा करें।
आईटीसी का मिलान: आपके द्वारा पूरे साल में क्लेम किए गए आईटीसी और आपके GSTR-2A/2B में दिखाई देने वाले आईटीसी के बीच कोई बड़ा अंतर न हो।
जीएसटी ऑडिट की समय सीमा: यह आम तौर पर 31 दिसंबर होती है हर वित्तीय वर्ष के खत्म होने के बाद, लेकिन अक्सर सरकार 31 दिसंबर की इस समय सीमा को बढ़ा देती है, इसलिए हमेशा सरकारी पोर्टल पर नया नोटिफिकेशन को चेक करें।
यदि आपसे कोई गलती पाई जाती है, तो विभाग डिमांड नोटिस या पेनल्टी जारी कर सकता है, इसीलिए अपने रेकॉर्ड्स को कम से कम 5 से 6 साल तक बचाकर रखें।
जब पूरी जिम्मेदारी आपकी: मतलब अब आप इसे खुद से वेरिफाई करते हैं, इसलिए रिकॉर्ड में किसी भी गलती या मिटमैच होने पर सरकारी विभाग सीधे आपको जिम्मेदार ठहराएगा, इसीलिए ऑडिट करते समय हर एक पॉइंट का ध्यान रखें।
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निष्कर्ष: GSTR-9C और जीएसटी ऑडिट
अंत में जीएसटी ऑडिट एक जरूरी काम है टैक्स नियम को बनाए रखने के लिए, अगर आपका टर्नओवर ₹5 करोड़ से ज्यादा है, तो हर साल अपने अकाउंट्स की ऑडिट बिना सोचे करें।
ऑडिट की तैयारी के लिए सभी रिकॉर्ड और रिटर्न को हमेशा संभलकर रखें, अब जब सीए से ऑडिट करने का नियम नहीं है, तो ₹5 करोड़ से ऊपर के टर्नओवर पर रिकॉर्ड्स का सेल्फ-रिकंसिलिएशन करना GSTR-9C से अब आपकी अपनी ज़िम्मेदारी है।
GSTR-9C जमा करने के लिए भी किसी सीए की ज़रूरत नहीं है, आप इसे खुद जीएसटी पोर्टल पर सबमिट कर सकते हैं ऑनलाइन।
अगर आपका डेटा ज्यादा उलझन वाला है, तो हिसाब और मिलन करना मुश्किल हो सकता है, इसीलिए किसी सीए की सलाह लेना आपके लिए बेहतर होगा, इसका कारण यही है कि GSTR-9C में कोई भी गलती होने पर भविष्य में आपको भारी पेनल्टी और विभाग से नोटिस भी आ सकता है।
में उम्मीद करता हूं की आपको जीएसटी में ऑडिट क्या है, क्या गलती हो सकती है और इनसे कैसे बचे ऐसे सवालों का जवाब मिला है, अपने दोस्त और सोशल मीडिया पर इस पोस्ट को शेयर कर उनको भी जानकारी लेने में मदद कीजिए।
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