फ्रीलांसिंग इनकम पर GST: जानें कब देना है और कितनी है दर? पूरी जानकारी

फ्रीलांसिंग कैसे करें या फ्रीलांसिंग से पैसे कैसे कमाए, यह तो सभी बताते हैं लेकिन फ्रीलांसिंग से इनकम करने पर आपको कितना टैक्स यह जीएसटी के रूप में भरना होगा यह हर कोई आपको नहीं बताता, लेकिन आज हम आपको यह बताएंगे कि फ्रीलांसिंग के इनकम पर जीएसटी कितने देने होते हैं? 

लेकिन इससे पहले में फ्रीलांसिंग के बारे में सभी सवाल का छोटे छोटे से जवाब दे देता हु ताकि आपके मन में कोई सवाल बचा न रहे अगर आप फ्रीलांसिंग का काम कर रहे है या फ्रीलांसिंग के काम में आना चाहते है।

सबसे पहले में आपको छोटे से जवाब में बता देता हु की फ्रीलांसिंग क्या है? फ्रीलांसिंग में आप किसी के नीचे नौकरी नहीं कर रहे है या किसी के दबाव में काम नहीं कर रहे है फ्रीलांसिंग काम में आप स्वतंत्र होकर काम करते है अपने मर्जी से ।

फ्रीलांसिंग क्या है और इस पर जीएसटी क्यों लगता है?

चलिए थोड़ा सा फ्रीलांसिंग से इनकम के बारे में समझते हैं कि यह फ्रीलांसिंग से पैसा हमें कैसे मिलता है जब आप किसी दूसरे आदमी के लिए ऑनलाइन काम करते है, इन ग्राहक को क्लाइंट भी बोलते है इनसे जो आपको कमाई होते है इसे फ्रीलांसिंग से इनकम बोलते है।

फ्रीलांसिंग का काम कहा से मिलेता है? बहुत से ऑनलाइन साइट है जैसे Upwork, Fiverr, Freelancer, TopTal और भी ऐसे बहुत सारी साइट है जिन पर लोग अपना प्रोफाइल बनाते है, जो अपने काम को सेल कर पैसा कमाना चाहते है।

फ्रीलांसिंग में क्या क्या काम होता है? फ्रीलांसिंग में सभी तरह का काम होता है जैसे वेबसाइट डिजाइन, आर्टिकल लिखना, वीडियो एडिटिंग करना, इंस्टाग्राम के रील बनाना, सोशल मीडिया पोस्ट लिखना, डाटा एंट्री करना, ग्राफिक डिजाइन, कंसल्टिंग ऐसे और भी बहुत सारी काम होते है।

मतलब फ्रीलांसिंग का असली अर्थ है किसी एक कंपनी के लिए काम करने के बजाय, विभिन्न क्लाइंट्स के उनकी अलग अलग ज़रूरतों के हिसाब से स्वतंत्र रूप से सेवाएं प्रदान करना।

भारत में, जीएसटी कानून के तहत फ्रीलांसरों को (सेवा प्रदाता – Service Provider) माना जाता है, क्योंकि GST वस्तु और सेबा देने वाला लोगों पर लगने वाला टैक्स है, इसलिए फ्रीलांसरों से दी जाने वाली सेवाओं पर भी जीएसटी लागू होता है, और उनपर जीएसटी तब लगता है जब वह जीएसटी के टर्नओवर सीमा पार कर लेते है।

आपको जीएसटी रजिस्ट्रेशन कब करवाना चाहिए? (GST थ्रेशोल्ड लिमिट)

देखिए आपको जीएसटी रजिस्ट्रेशन तब करवाना ज़रूरी होता है जब आपकी कुल सालाना टर्नओवर (सेवाओं पर) ₹20 लाख से ज़्यादा हो जाती है। 

लेकिन कुछ विशेष राज्यों (जैसे अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, सिक्किम, त्रिपुरा, मिजोरम, मणिपुर, नागालैंड, उत्तराखंड) में यह सीमा ₹10 लाख है।

इसके अलावा कुछ खास कारणों में टर्नओवर सीमा पार किए बिना भी जीएसटी रजिस्ट्रेशन करना जरूरी हो जाता है। 

उदाहरण के लिए अगर आप एक राज्य से दूसरे राज्य में सेवाएं प्रदान करते हैं (जिसे अंतर-राज्यीय आपूर्ति भी कहते है), कुछ विशेष ई-कॉमर्स ऑपरेटरों के माध्यम से सेवाएं देते हैं, तो आपको जीएसटी रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ेगा, भले ही आपकी टर्नओवर ₹20 लाख से कम हो।

फ्रीलांसिंग इनकम पर जीएसटी की दर कितनी है?

भारत में फ्रीलांसिंग के सेवाओं पर 18% जीएसटी लगता है इसमें ग्राफिक डिजाइन, वेब डेवलपमेंट, लिखना, डिजिटल मार्केटिंग, कंसल्टिंग और अन्य ऐसी सभी सेवाएं शामिल होते हैं। 

जीएसटी का भाग: जब आप अपने ही राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में किसी क्लाइंट को सेवा देते हैं, तो यह 18% जीएसटी दो भागों में बंट जाता है, 9% CGST (केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर) और 9% SGST (राज्य वस्तु एवं सेवा कर)। 

लेकिन यदि आप किसी दूसरे राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में क्लाइंट को सेवा देते हैं, तो पूरी 18% अमाउंट IGST (एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर) के रूप में लगती है।

इन सब को समझने के लिए यह पोस्ट पढ़ें:- GST क्या है? जानें वस्तु एवं सेवा कर के 4 प्रकार (CGST, SGST, IGST, UTGST) और उनका मतलब

फ्रीलांसरों के लिए जीएसटी की गणना कैसे करें? (उदाहरण सहित)

फ्रीलांसरों के लिए जीएसटी की हिसाब करना बिल्कुल आसान है, यदि आपकी सेवा जीएसटी के दायरे में आती है और जीएसटी में रजिस्टर्ड है, तो आप अपनी सेवा शुल्क के साथ जीएसटी जोड़कर क्लाइंट से और 18% लेंगे।

एक उदाहरण से समझे: मान लीजिए आपने किसी क्लाइंट को ₹50,000 की वेब डिजाइनिंग का सर्विस प्रदान की, और आपके पास जीएसटी नंबर है, और आपके काम पर 18% जीएसटी लागू होता है:

  • आपका सेवा शुल्क: ₹50,000
  • जीएसटी 18%: ₹50,000 का 18% होता है = ₹9,000
  • तो कुल बिल की अमाउंट होगी: ₹50,000 + ₹9,000 = ₹59,000

आप अपने क्लाइंट को ₹59,000 का बिल भेजेंगे और उसमें से ₹9,000 सरकार को जीएसटी।

इस पोस्ट से आप पूरा जान सकते हैं:- जीएसटी नंबर क्या है? जानें क्यों ज़रूरी है यह 15 अंकों का नंबर और इसके हर अंक का मतलब

फ्रीलांसरों के लिए जीएसटी रिटर्न फाइलिंग: कौन से फॉर्म भरने हैं?

हर जीएसटी रजिस्टर्ड फ्रीलांसरों को असल में दो प्रकार के मासिक या त्रैमासिक रिटर्न फाइल करने होते हैं:

GSTR-1: इसमें आप अपनी आउटवर्ड सप्लाई मतलब (आपने जो सेवाएं सेल की हैं) उनका डिटेल्स सरकार को देने होते हैं, यह आमतौर पर अगले महीने की 11 तारीख तक (मासिक फाइलर्स के लिए) या अगले महीने की 13 तारीख तक (त्रैमासिक फाइलर्स के लिए) फाइल करना होता है।

GSTR-3B: यह आपकी कुल आउटवर्ड सप्लाई, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दावा और टैक्स पेमेंट का पूरा हिसाब होता है, यह आमतौर पर अगले महीने की 20 तारीख तक (मासिक फाइलर्स के लिए) या त्रैमासिक फाइलर्स के लिए अगले महीने की 22/24 तारीख तक फाइल करना होता है।

छोटे व्यवसायों के लिए: जिनकी वार्षिक टर्नओवर ₹5 करोड़ तक है उनके लिए QRMP (Quarterly Return Monthly Payment) स्कीम का ऑप्शन भी बहुत अच्छा है।

जिसमें हर रिटर्न त्रैमासिक फाइल किया जाता है मतलब (एक साल में 4 बार सिर्फ) इससे हर महीने के परेशानी खत्म होती है, लेकिन टैक्स का पैसा मासिक आधार पर जमा करना होता है।

इस पोस्ट से जाने:- GST की QRMP Scheme क्या है? और कैसे अप्लाई करें पूरी जानकारी

इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ कैसे उठाएं?

जीएसटी में इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का मतलब है कि जब आप अपने व्यवसाय के लिए कोई सामान या सेवा खरीदते हैं और उस पर पहले आप जीएसटी का भुगतान करते हैं।

और उस भुगतान किए गए जीएसटी को आप अपनी आउटपुट टैक्स देनदारी मतलब (जो जीएसटी आपको ग्राहकों से मिला है) उनको जमा करते समय कम कर सकते है। 

यह आईटीसी आपके लिए एक बड़ा टैक्स सेविंग करने का अच्छा मौका है, एक फ्रीलांसर के रूप में आप अपने लैपटॉप, सॉफ्टवेयर सब्सक्रिप्शन, इंटरनेट बिल, प्रिंटर, ऑफिस का किराया, या अन्य किसी व्यावसायिक खर्च पर दिए किए गए जीएसटी का आईटीसी क्लेम कर सकते हैं। 

एक जरूरी बात आईटीसी का दावा करने के लिए आपके पास जीएसटी अनुरूप बिल मतलब सही (Tax Invoice) होना ज़रूरी है, और उस इनवॉइस पर आपका जीएसटी नंबर होना जरूरी है।

इस पोस्ट से जाने:- ITC का दावा क्या है और इसे कैसे करें? जानें इनपुट टैक्स क्रेडिट के नियम और GSTR-2B का महत्व

फ्रीलांसिंग में अक्सर होने वाली जीएसटी में गलतियाँ और उनसे कैसे बचें

फ्रीलांसरों में जीएसटी में कुछ आम गलतियाँ होती हैं जिनसे बचा जा सकता है, इसके लिए नीचे के दिए गए कुछ बातों का आप हमेशा ध्यान रखें:

  1. समय पर रजिस्ट्रेशन न करवाना: टर्नओवर सीमा पार करने के बाद भी रजिस्ट्रेशन में देरी करना।
  2. गलत जीएसटी दर लगाना: अपनी सेवा पर गलत जीएसटी दर से पैसे लेना।
  3. सही बिल न बनाना: जीएसटी नियम के अनुरूप इनवॉइस जारी न करना।
  4. समय पर रिटर्न फाइल न करना: GSTR-1 और GSTR-3B की समय सीमा को चूक कर जाना, जिससे जुर्माना लगता है।
  5. TDS और GST के बीच भ्रम: यह न समझ पाना कि टीडीएस और जीएसटी दोनों अलग है, टीडीएस इनकम पर कटता है जबकि जीएसटी सेवा देने पर लगता है।
  6. ITC का दावा न करना: उन खर्चों पर आईटीसी का दावा न करना जिन पर आप योग्य हैं।

ऊपर मैने जितने बात आपको बताया इनमें से ज्यादा तर के गलती से आप जीएसटी विभाग के तरफ से नोटिस आ सकते है, और आप पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है, इसीलिए आप इन गलतियों को न करें।

इस पोस्ट से जान सकते है:- TDS और GST दोनों कैसे संभालें? (फ्रीलांसर के लिए गाइड)

यदि ग्राहक बाहर देश के हों तो क्या जीएसटी नंबर लेना ज़रूरी है?

मैने यह सवाल आपको एक्स्ट्रा जानकारी देने के लिए लिया हूं, देखिए अगर आपका क्लाइंट बाहर देश का सभी है तो आप जीएसटी रजिस्ट्रेशन करना चाहिए, भले ही आपको उनसे जीएसटी चार्ज न करना हो।

भारत में इनको (निर्यात – Export) या (शून्य-रेटेड आपूर्ति Zero-Rated Supply) माना जाता है, क्योंकि यह कंपनी भारत में रजिस्टर नहीं है और आपका ग्राहक भी इंडियन नहीं है। 

अगर आपका क्लाइंट भारत में है: तो नॉर्मल जीएसटी के नियम जो आपको ऊपर बताया अगर आपकी कुल टर्नओवर ₹20 लाख से ज़्यादा हो जाता है तो जीएसटी रजिस्ट्रेशन करना जरूरी है।

और आपके फ्रीलांसिंग काम में RCM (Reverse Charge Mechanism) भी लागू नहीं होता है, मतलब आपके क्लाइंट का टैक्स भी आपको देना होता है और बाद में आप इसे क्लेम कर सकते है, अगर वह जीएसटी में रजिस्टर्ड न हो।

इस पोस्ट से जाने:- Reverse Charge Mechanism (RCM) फ्रीलांसर के लिए क्या होता है? पूरी जानकारी

निष्कर्ष और महत्वपूर्ण सलाह

असली फ्रीलांसिंग काम में सफलता के लिए न केवल अपनी सेवाओं में जानकार होना ज़रूरी है, बल्कि जीएसटी जैसे जरूरी नियमों को समझना भी उतना ही जरूरी है। 

अपनी फ्रीलांसिंग इनकम पर जीएसटी नियमों को सही ढंग से समझकर और उनका पालन करके आप कानूनी परेशानी और पेनल्टी से बच सकते हैं और अपने व्यवसाय को अच्छे से चला सकते हैं। 

एक सलाह है आपके लिए यदि आपकी इनकम बढ़ रही है या आपके क्लाइंट विभिन्न राज्यों या देशों में हैं, तो किसी टैक्स सलाहकार या चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से सलाह लेना हमेशा एक अच्छा विचार होगा, वह आपकी अभी के स्थिति के अनुसार सही मार्गदर्शन प्रदान कर सकते हैं।

में उम्मीद करता हूं की फ्रीलांसिंग इनकम पर जीएसटी के नियम को अपने समझा है, अपने दोस्त और सोशल मीडिया पर इस पोस्ट को शेयर कर उनको भी जानकारी लेने में मदद कीजिए।

अब इस पोस्ट से जाने:- अगर जीएसटी रिटर्न देरी से फाइल करें तो इंटरेस्ट और लेट फीस कैसे कैलकुलेट होता है?

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