क्या आप एक छोटे व्यवसायी या फ्रीलांसर हैं तो आपको हर साल अपना इनकम का डिटेल्स खातों में रखना पड़ता है (Books of Accounts) इनको मैनेज करना बड़ा कठिन होता है, अगर आपका इनकम अलग अलग जगह से आता है और ज्यादा इनकम होता है।
इसीलिए हमारे भारतीय आयकर अधिनियम में अनुमानित कराधान योजनाएं (Presumptive Taxation Schemes) आपके जैसे लोगों लिए हैं, जिनको टैक्स कम देना है और इतना झंझट नहीं चाहिए।
यह दोनों धाराएं छोटे टैक्सपेयर्स को अपने पूरा टर्नओवर या सकल इनकम के कुछ परसेंटेज को लाभ घोषित करने की अनुमति देती हैं, जिससे टैक्स फाइलिंग के काम बहुत आसान हो जाती है।
आज हम धारा 44AD और 44ADA के बारे में पूरा विस्तार से बात करेंगे, इसीलिए आप इस पोस्ट को लास्ट तक पढ़े, आइए इन दोनों धाराओं को विस्तार से समझते हैं।
इस पोस्ट में क्या क्या है?
धारा 44AD: छोटे व्यवसायों के लिए
यह धारा विशेष रूप से छोटे छोटे व्यवसा करने वाले लोगों के लिए बनाई गई है, धारा 44AD का लाभ किसे मिलता है? अब इसे समझते है:
पात्र करदाता: एक भारतीय निवासी व्यक्ति (Resident Individual), HUF (हिन्दू अविभाजित परिवार), या साझेदारी फर्म (Partnership Firm) सिर्फ LLP को छोड़कर सभी इस स्कीम का फायदा ले सकता है।
टर्नओवर सीमा: आपका पूरा साल का वार्षिक टर्नओवर ₹2 करोड़ से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
कुछ अपवाद: जैसे कमीशन, ब्रोकरेज कमाने वाले व्यवसाय, या एजेंसी व्यवसाय में लगे लोग इस योजना के पात्र नहीं है।
लाभ की गणना कैसे होती है (Estimation of Profit)
अगर आप धारा 44AD चुनते हैं, तो आपको अपने टर्नओवर का सरकार से तय किया हुआ कुछ परसेंटेज लाभ घोषित करना होगा, नीचे के टेबल से समझे:
| लेनदेन का तरीका | सरकार का मानना है |
| डिजिटल, बैंक लेन देन जैसे चेक, ऑनलाइन ट्रांसफर आदि | डिजिटल का 6% प्रॉफिट |
| नकद लेन देन में | कैश का 8% प्रॉफिट |
एक उदाहरण से समझे: मान लीजिए आपका पूरा टर्नओवर ₹80 लाख है, और सारा लेन देन बैंक के माध्यम से हुआ है और इसमें 6% टैक्स दर है।
अनुमानित लाभ (Profit): ₹80,00,000 का 6% होता है ₹4,80,000।
अब टैक्स के गणना: इस ₹4,80,000 को आपकी अन्य इनकम अगर कुछ और है तो उसमें जोड़ा जाएगा।
अब अगर आपकी एकमात्र इनकम यही है, तो ₹4,80,000 की आय पर आपके लिए सबके जैसा टैक्स स्लैब दर जैसे 5% या 10% के हिसाब से टैक्स लगेगा, ना कि 6% की दर से।
यह योजना सिर्फ टैक्स नियम सरलता के लिए बनाया गया है, ताकि आपको अपने खातों का विस्तृत रिकॉर्ड न रखना पड़े, इसलिए, 6%, 8%, या 50% वह दर है जिस पर आपका लाभ माना जाता है, और इन परसेंटेज के हिसाब को निकालने के बाद उन अमाउंट पर आपको टैक्स देना होता है।
ध्यान दे एक उदाहरण: अगर आपका टर्नओवर ₹30 लाख है और आप ₹1 लाख (3%) लाभ दिखाते है, तो इसका मतलब हुआ आप इस स्कीम की शर्त तोड़ रहे हैं तो अब आपको लेन देन का रिकॉर्ड रखने होंगे, और किसी सीए से टैक्स ऑडिट कराना होगा।
धारा 44AD के नया नियम
टर्नओवर की सीमा: पुराने नियम में टर्नओवर ₹2 करोड़ से ज़्यादा नहीं होना चाहिए, लेकिन नए नियम के अनुसार 95% डिजिटल लेनदेन होने पर यह सीमा ₹3 करोड़ तक बढ़ाया गया है, यह डिजिटल लेन देन को बढ़ावा देने के लिए है, इसमें आपका 5% नगद लेन देन होना चाहिए।
लेकिन अगर आपका सालाना टर्नओवर ₹2 करोड़ से ज्यादा है, लेकिन ₹3 करोड़ से कम है, और आपका नकद लेन देन 5% से ज्यादा है, तो आप 44AD का लाभ नहीं उठा सकते हैं।
धारा 44ADA: पेशेवरों के लिए (फ्रीलांसर्स)
यह धारा 44ADA असल में से छोटे पेशेवरों और फ्रीलांसरों के टैक्स आसान बनाने के लिए लाई गई है।
44ADA का लाभ किसे लाभ मिलता है?
पात्र करदाता: एक भारतीयों निवासी व्यक्ति या साझेदारी फर्म (LLP को छोड़कर) होना चाहिए।
प्राप्तियों की सीमा: आपकी कुल सालाना इनकम सब कुछ मिलकर (Gross Receipts) ₹75 लाख से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
पात्र काम: इसमें जो काम शामिल हैं वह है डॉक्टर, वकील, आर्किटेक्ट, इंजीनियर, अकाउंटेंट, तकनीकी सलाहकार, डिजाइनर, डिजिटल क्रिएटर जैसे फ्रीलांसर आदि।
44ADA में लाभ की गणना (Estimation of Profit)
इस पेशेवरों के लिए नियम और भी सरल है, इसमें आपका पूरा इनकम का 50% लाभ घोषित करना होता है।
एक उदाहरण समझे: यदि आप एक फ्रीलांसर हैं और आपकी कुल इनकम ₹40 लाख हुआ हैं, तो आपका पूरा लाभ ₹40 लाख का 50% यानी ₹20 लाख का टैक्स देना होगा, यह 50% आपका खर्चा माना जाता है।
ध्यान दे: 44ADA में सरकार मानती है 50% आपका खर्चा है, अगर आप 50% से कम खर्च दिखाते हैं, जैसे इनकम ₹10 लाख और लाभ आपने ₹3 लाख 30% दिखाया यह भी इस नियम को तोड़ने जैसा है, तब आपको अपने अकाउंट का डिटेल्स रखना होंगे।
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असली अंतर लाभ और टैक्स में
आपके लिए यह जानना बहुत ज़रूरी है कि यह दोनों धारा 44AD और 44ADA में जो प्रतिशत (6%, 8% और 50%) है वह आपकी टैक्स दर नहीं हैं, बल्कि यह आपके लाभ को अनुमान लगाने का न्यूनतम दर हैं।
आपके लिए यह जानना बहुत ज़रूरी है कि यह दोनों धारा 44AD और 44ADA में जो प्रतिशत (6%, 8% और 50%) है वह आपकी टैक्स दर नहीं हैं, बल्कि यह आपके लाभ को अनुमान लगाने का न्यूनतम दर हैं।
न्यूनतम लाभ: मतलब आपको इन सरकारी दरों के हिसाब से अपना लाभ घोषित करने होते हैं।
अंत टैक्स दर: यह लाभ आपकी कुल इनकम का हिस्सा पर आपके लिए आयकर स्लैब दरों जैसे (5%, 10%, 20%, 30%) के अनुसार बाद में टैक्स लगता है।
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अनुमानित कराधान योजना चुनने के लाभ
बहीखाते की आवश्यकता नहीं: मतलब आपको आपके इनकम का डिटेल्स में लाभ और लॉस के खाते या बैलेंस शीट रखने की जरूरत नहीं है।
टैक्स ऑडिट से छुटकारा: जब आप न्यूनतम लाभ घोषित करते हैं, तो आपको अपने खातों का ऑडिट कराने की भी जरूरत नहीं पड़ती।
आसान ITR फाइलिंग: इनकम टैक्स रिटर्न के लिए आप ITR-4 फॉर्म का इस्तेमाल कर के आसानी से अपनी रिटर्न फाइल कर सकते हैं।
मुख्य लाभ: यदि आप 50% लाभ घोषित करते हैं, तो आपको अपने किसी भी बिजनेस खर्च को अलग से साबित करने की जरूरत नहीं पड़ती है, इसमें यह माना जाता है कि 50% आपका खर्च को कवर करता है।
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एक महत्वपूर्ण नियम (दोनों के लिए)
अगर कोई भी करदाता धारा 44AD में 6% और 8% से कम या धारा 44ADA में 50% से कम मुनाफा दिखाता है, तो उसे विस्तृत बहीखाते रखने होंगे और कुछ मामलों में टैक्स ऑडिट भी करवाना जरूरी होता है।
ऑडिट कब करना है (टेबल से समझे)
| Situation | Books रखना | Audit जरूरी |
| प्रॉफिट 6%/8% या 50% दिखाया | जरूरी नहीं | जरूरी नहीं |
| प्रॉफिट इससे कम दिखाया | हाँ | हाँ जरूरी है |
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विस्तृत बहीखाता (Books of Accounts) का मतलब क्या है?
विस्तृत बहीखाता मतलब कुछ डॉक्यूमेंट होता है जो आपको संभाल के रखना है, मतलब आपके बिज़नेस का पूरा हिसाब किताब लिखित तरीके से रखना है, इसमें शामिल होता है:
- Cash Book (रोज़ का नकद लेन देन)
- Sales Register (कितनी बिक्री हुई)
- Purchase Register (कितनी खरीद हुई)
- Bank Book (बैंक से जुड़ा हिसाब)
- Expense Register (खर्चे का रिकॉर्ड)
- Stock Register (अगर माल का व्यापार है)
- Bills और Invoices की फाइल
मतलब पैसा आया कहाँ से, गया कहाँ, कितना लाभ या हानि हुई इसका पूरा हिसाब सबूत के साथ, यह डॉक्यूमेंट आपको तब चाहिए जब आपको टैक्स ऑडिट करना है।
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निष्कर्ष: धारा 44AD और 44ADA के बारे में
टैक्स नियम में सरलता बनाने के लिए सरकार ने यह 44AD और 44ADA धारा बनाए है, आप भी इन धारा में कंडीशन का इस्तेमाल करके टैक्स फाइलिंग आसान और कम टैक्स दे सकते हैं।
44AD और 44ADA चुनने पर 6%, 8% या 50% चुनने पर संभावित इनकम निकालने के बाद उसी अमाउंट को आपका इनकम मानकर नॉर्मल टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होता है।
मैं उम्मीद करता हूं कि आपको अनुमानित कराधान योजनाएं क्या है? इस पोस्ट के माध्यम से सभी जानकारी मिली है, अपने दोस्तों सोशल मीडिया पर इस पोस्ट को शेयर करके उनको भी जानकारी लेने में सहायता कीजिए।
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