बहुत बार लोग आपने Income Tax Return (ITR) फाइल करने के बाद डेटा में गलती मिलती है, यह अनजाने में भी हो सकता है और बाद में परेशान हो जाते है अब क्या होगा।
चिंता न करे Income Tax Act आपको ITR Revise करने की अनुमति देता है, इस पोस्ट में हम ITR Revise और Revised Return के बारे में पूरा बात करेंगे, इसलिए आप इस पोस्ट को लास्ट तक पढ़े।
इस पोस्ट में क्या क्या है?
ITR Revise क्या है?
ITR Revise का मतलब होता है पहले से फाइल किए गए Income Tax Return में गलती सुधारकर दोबारा रिटर्न फाइल करना।
भारत के इनकम टैक्स एक्ट की धारा 139(5) के तहत टैक्सपेयर्स को यह सुविधा दी गई है, ताकि लोग अनजाने में हुई गलती को सुधार सकें।
एक जरूरी बात: जब आप रिवाइज्ड रिटर्न भरते हैं, तो आपका पिछला (ओरिजिनल) रिटर्न कैंसिल माना जाता है और नया रिटर्न ही वैलिड होता है।
ITR Revise कब किया जा सकता है?
कुछ आम कारण में नीचे दे रहा हूं यह गलती होने पर आप आईटीआर रिवाइज कर सकते हैं:
- इनकम गलत दिखा दी गई हो
- कोई इनकम छूट गई हो
- गलत आईटीआर फॉर्म चुन लिया हो
- डिडक्शन (80C, 80D आदि) मिस हो गया हो
- बैंक इंटरेस्ट या एफडी इंटरेस्ट एड करना भूल गए हों
- टैक्स कैलकुलेशन गलत हो गई हो
- बैंक अकाउंट नंबर या अपना जानकारी गलत भर दी हो
- TDS का डेटा और आपके द्वारा जमा की गई जानकारी मैच नहीं हो रही हो
और भी गलती हो सकती है लेकिन ध्यान रखें यह गलती जानबूझकर नहीं होनी चाहिए।
कब ITR Revise नहीं किया जा सकता?
1.Belated Return का मामला: आईटीआर रिवाइज करने की एक समय सीमा होती है, आप उसी असेसमेंट ईयर के खत्म होने से 3 महीने पहले तक ही रिवाइज कर सकते हैं, यह डेट 31 दिसंबर लास्ट है।
अगर आपने Belated Return (देरी से रिटर्न भरा है) तो उसे भी सिर्फ इसी समय सीमा के अंदर ही रिवाइज कर सकते है, अगर यह डेडलाइन निकल गई तो रिवाइज नहीं कर सकते।
2.अगर Assessment Complete हो चुका हो: अगर आयकर विभाग ने आपके द्वारा भरे गए रिटर्न की जांच पूरी कर ली है और असेसमेंट ऑर्डर पास कर दिया है, तो उसके बाद आप उस रिटर्न को रिवाइज नहीं कर सकते।
विभागीय काम पूरी होने के बाद कानूनन उस फाइल को दोबारा सुधारने का ऑप्शन बंद हो जाता है।
3.अगर गलत जानकारी जानबूझकर दी गई हो: अगर किसी ने टैक्स चोरी के इरादे से जानबूझकर डेटा छुपाया है और विभाग को इसका पता चल जाता है, तो रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने पर भी पेनल्टी और कानूनी कार्यवाही से बचा नहीं जा सकता।
कानूनी नियम पर धारा 139(5) का इस्तेमाल सिर्फ ‘अनजानी गलती’ को सुधारने के लिए किया जाना चाहिए।
4.विभाग द्वारा नोटिस मिलने के बाद: अगर आयकर विभाग ने आपकी इनकम को लेकर कोई जांच (Search/Survey) शुरू कर दी है या आपको टैक्स चोरी को लेकर कोई गंभीर नोटिस भेज दिया है, तो आप उस गलती को सुधारने के लिए रिवाइज्ड रिटर्न का सहारा नहीं ले सकते।
ऐसे कुछ मामलों में रिवाइज्ड रिटर्न को इनवेलिड माना जा सकता है क्योंकि विभाग इसे पकड़े जाने के बाद किया गया सुधार मानता है।
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ITR Revise करने की समय सीमा
Revised ITR हर Assessment Year खत्म होने से 3 महीने पहले फाइल करनी होती है, एक टेबल से समझे:
| Particular | Last Date |
| Original ITR | 31 जुलाई |
| Revised ITR | 31 दिसंबर |
ITR Revise कैसे फाइल करें? (Step-by-Step)
आईटीआर रिवाइज करना काफी आसान है और यह पूरी तरह ऑनलाइन होता है, आईटीआर रिवाइज्ड के लिए नीचे के स्टेप को फॉलो करें:
- Income Tax Portal पर लॉगिन करें।
- e-File > Income Tax Return > File Income Tax Return पर जाएं।
- असेसमेंट ईयर और मोड (Online) चुनें।
- अब ‘Filing Type’ में ‘Revised Return u/s 139(5)’ चुनें।
- आपको अपने पुराने (ओरिजिनल) रिटर्न का रसीद नंबर (Acknowledgement Number) और पुराने आईटीआर फाइल करने की तारीख देनी होगी।
- अपनी गलतियों को सुधारें (सही इनकम, सही डिडक्शन और सही टैक्स डिटेल्स) से नया रिटर्न सबमिट कर दें।
- अब आधार ओटीपी, नेट बैंकिंग से वेरिफिकेशन कंप्लीट कर लीजिए।
कुछ ध्यान रखने वाली कुछ ज़रूरी बातें
अब में आपको आईटीआर रिवाइज करते समय सावधानियाँ के बारे में बता रहा हूं जो आपको हमेशा ध्यान रखना है:
कोई पेनल्टी नहीं: समय सीमा के भीतर आईटीआर रिवाइज करने पर कोई अतिरिक्त जुर्माना नहीं लगता।
डाटा को मिलाए: अपने AIS / TIS को इनकम से मैच करें, बैंक इंटरेस्ट यह सभी एक बार जरूर चेक करें।
वेरिफिकेशन ज़रूरी है: रिवाइज्ड रिटर्न भरने के बाद उसे e-Verify करना न भूलें, वरना वह वैलिड नहीं होगा।
पुराना रसीद नंबर: ओरिजिनल आईटीआर की रसीद संभाल कर रखें, क्योंकि इसके बिना आप रिवाइज्ड रिटर्न नहीं भर पाएंगे, और आईटीआर रिवाइज के समय यह नंबर गलत न डालें।
प्रीव्यू करें: फाइनल जमा करते समय एक बार फिर से वेरिफाई करें ताकि सभी गलती खत्म हो जाए और दुबारा रिवाइज करने का जरूरत ना पड़े।
कितनी भी बार: आप एक रिटर्न को कितनी भी बार रिवाइज कर सकते हैं, बशर्ते समय सीमा खत्म न हुई हो।
टैक्स कानून में कोई लिमिट नहीं है रिवाइज्ड आईटीआर फाइल करने का, लेकिन बार बार रिवाइज करना संदेह का कारण बन सकता है, इससे टैक्स डिपार्टमेंट जांच कर सकती है इसीलिए सिर्फ जेनुइन गलती है रिवाइज करें।
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Revised ITR से Refund या Tax दोनों बदल सकते हैं
इस मामले में अगर टैक्स ज्यादा दिया था रिफंड मिल जाएगा और अगर टैक्स कम दिया था तो बचा हुआ टैक्स देना होगा।
ITR Revise और Audit Report का संबंध
अगर आपका केस Tax Audit वाला है तो पहले Revised Audit Report करें और फिर Revised ITR करें, लेकिन ध्यान रखें दोनों आपस में मैच होने चाहिए।
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एक उदाहरण सरल भाषा में
शाम ने आईटीआर में ₹6,50,000 इनकम दिखाई, बाद में एफडी इंटरेस्ट ₹25,000 याद आया, तब उसने ITR Revise कराया, सही इनकम ₹6,75,000 दिखाया और Revised tax पे किया और टैक्स नोटिस साथ में पेनल्टी से भी बच गया।
ओरिजिनल आईटीआर और रिवाइज्ड आईटीआर में अंतर
| विवरण (Features) | ओरिजिनल आईटीआर (Original ITR) | रिवाइज्ड आईटीआर (Revised ITR) |
| धारा (Section) | धारा 139(1) के तहत भरा जाता है। | धारा 139(5) के तहत भरा जाता है। |
| मकसद (Purpose) | पहली बार अपनी आय और टैक्स की जानकारी देने के लिए। | पिछले रिटर्न में हुई गलतियों या छूटी हुई जानकारी को सुधारने के लिए। |
| जरूरत (Necessity) | जरूरी है (अगर आय टैक्स सीमा से अधिक है)। | केवल तभी जरूरी है जब पहले वाले रिटर्न में कोई गलती हो। |
| जुर्माना (Penalty) | देरी से भरने पर ₹5,000 तक की पेनाल्टी (Belated ITR) लग सकती है। | समय सीमा के भीतर सुधार करने पर कोई अतिरिक्त जुर्माना नहीं लगता। |
| पुराने रिटर्न का क्या होता है? | यह आपका आधार (Base) रिटर्न होता है। | इसे भरने के बाद आपका पुराना रिटर्न ‘कैंसिल’ माना जाता है और नया ही मान्य होता है। |
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FAQs (अक्सर पूछा जाने वाले सवाल)
Q1. क्या Revised ITR पर penalty लगती है?
समय सीमा के भीतर ITR Revise करने पर कोई पेनल्टी (जुर्माना) नहीं लगती है।
Q2. क्या Revised ITR से refund देर से मिलता है?
जी हाँ थोड़ा लेट हो सकता है।
Q3. Revised ITR reject हो सकती है?
जी हाँ अगर मिटमैच या गलत जानकारी जमा की गई हो।
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निष्कर्ष: रिवाइज्ड आईटीआर के बारे में
अपने ओरिजिनल इनकम टैक्स रिटर्न भर दिया है और बाद में आपको पता चलता है कि उसमें कोई जानकारी छूट गई है या गलत भरी गई है, तो आप उसे दोबारा भर सकते हैं, इसे ही ‘आईटीआर रिवाइज’ करना कहते हैं।
आईटीआर भरना एक ज़िम्मेदारी का काम है, लेकिन कई बार जल्दबाजी या जानकारी की कमी के कारण इसमें गलतियाँ हो जाती हैं, भारत का आयकर विभाग आपको इन गलतियों को सुधारने का एक मौका देता है, लेकिन रिवाइज्ड आईटीआर समय सीमा का ध्यान रखें और सही और सही गलती ठीक करें
एक सावधानी: आप आईटीआर को रिवाइज तो कर सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप जानबूझकर गलत जानकारी दें, अगर आयकर विभाग को लगता है कि आपने टैक्स चोरी के इरादे से गलत जानकारी दी थी और पकड़े जाने के डर से उसे रिवाइज किया है, तो आपको विभाग की जांच का सामना करना पड़ सकता है।
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