GSTR-1, 2A, 2B और 3B क्या है और इनका आपस में कनेक्शन को समझे

जीएसटी के अंदर ज्यादा तर यह चार नाम बार बार सुनने को मिलते हैं GSTR-1, 2A, 2B और 3B, अगर आप इन चारों का कनेक्शन को समझ गए, तो आपको लेन देन के मामलों में गड़बड़ी नहीं होगा।

और आप कभी भी गलत ITC (Input Tax Credit) क्लेम नहीं करेंगे, आज इस पोस्ट में हम जीएसटी रिटर्न के पूरे चक्र (साइकिल) को बहुत ही सरल बातों में समझाया हूं, पूरा जानने के लिए आप इस पोस्ट को लास्ट तक पढ़े।

GST रिटर्न का पूरा चक्र

जीएसटी रिटर्न के साइकिल को ​एक कहानी की तरह समझें:

GSTR-1 (विक्रेता द्वारा): जब आप किसी से सामान खरीदते हैं, तो वह दुकानदार (सप्लायर) अपने द्वारा बेचे गए सामान की जानकारी GSTR-1 में डालता है।

GSTR-2A/2B (खरीददार के लिए): आपको सामान बेचने के बाद सप्लायर जैसे ही बिल GSTR-1 में अपलोड करता है, वह डेटा आपके GSTR-2A और GSTR-2B में दिखने लगता है।

GSTR-3B (दोनों के लिए): जब आप अपना GSTR-3B भरते हैं, जिसमें आप अपनी सेल पर टैक्स का पैसा देते हैं तब GSTR-2B को देखकर पहले दिया हुआ टैक्स को, आईटीसी के नाम पर घटा लेते हैं।

मतलब GSTR-2A और 2B में डेटा सप्लायर के GSTR-1 भरने से आता है और GSTR-3B भरने पर पहले दिया हुआ टैक्स का पैसा कम कर जितना बचता है उतना जमा करते है।

जीएसटी नियम में विक्रेता (Seller) और खरीदार (Buyer) दोनों को अपना अपना GSTR-3B जमा करना होता है लेकिन इनका उद्देश्य अलग अलग होता है।

असली अंतर GSTR-2A और GSTR-2B में

GSTR-2A और GSTR-2B में लोगों को सबसे ज्यादा प्रॉब्लम होता है, आज दोनों को टेबल से समझें:

विशेषताGSTR-2AGSTR-2B
कैसे काम करता हैयह बदलता रहता है अगर सप्लायर आज बिल डालेगा तो आज ही अपडेट हो जाएगा।यह स्थिर रहता है यह हर महीने की 14 तारीख को लॉक हो जाता है।
इनका उद्देश्ययह सिर्फ देखने के लिए है कि सप्लायर ने बिल जमा किया है या नहीं।यह कानून सबसे जरूरी है, इसी के आधार पर आईटीसी क्लेम होता हैं।
कब देखना हैमहीने के अंदर कभी भी देख सकते हैं।अपना GSTR-3B जमा करने से ठीक पहले इसे मिलाना जरूरी है।

GSTR-3B सबसे जरूरी रिटर्न

​GSTR-3B यह वह रिटर्न है जिसमें आप सरकार को हिसाब देते हैं, इसमें दो चीजें शामिल होती हैं:

Output Tax: जो आपने ग्राहकों से आउटपुट टैक्स लिया है, उसे सरकार को जमा करने के लिए GSTR-3B जमा करना होता है।

Input Tax Credit (ITC): आईटीसी क्लेम करते समय आपने सामान खरीदते पर जो टैक्स चुकाया था, इसे GSTR-2B से मैच करके कम करना है।

ध्यान रखें: अगर आपके GSTR-2B में ₹500 का आईटीसी दिखा रहा है और आपने GSTR-3B में ₹600 क्लेम कर लिया, तो आपको जीएसटी नोटिस मिल सकता है, इसीलिए जितना अमाउंट दिखे उतना ही क्लेम करें और अगर कम हो तो अपना सेलर से कॉन्टैक्ट कर उनको बिल क्लियर करने को बोले। 

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सप्लायर की गलती और आपका नुकसान

यहाँ एक बहुत बड़ा खतरा है जिसका हर व्यापारी को पहले से ही ज्ञान होना चाहिए, की आपके सप्लायर ने GSTR-1 भर दिया, इसलिए इसका वह बिल आपके GSTR-2B में आ गया, आपने खुशी खुशी उसका आईटीसी का दावा कर लिया।

अक्सर लोग सोचते हैं कि अगर 2B में बिल दिख रहा है तो आईटीसी पक्का है, लेकिन जीएसटी कानून के (Section 16(2)(c)) कहता है कि, अगर सप्लायर ने GSTR-1 जमा किया तो बिल 2B में आ जाएगा, इतना तक सही है।

अब खतरा: अगर आपके सप्लायर ने अपना GSTR-3B नहीं भरा (इससे सरकार को टैक्स जमा होता है), तब सरकार आपसे वह आईटीसी वापस मांग सकती है, वह भी ब्याज के साथ।

इस पोस्ट से जाने:- ITC का दावा क्या है और इसे कैसे करें? जानें इनपुट टैक्स क्रेडिट के नियम और GSTR-2B का महत्व

सही तरीका क्या है?

सप्लायर महीने की 11 तारीख तक GSTR-1 भरता है और 14 तारीख को आपके लिए GSTR-2B जेनरेट होता है।

आप उस GSTR-2B को देखकर अपना GSTR-3B (20 तारीख तक) भरते हैं और आईटीसी क्लेम करते हैं।

एक प्रो टिप: हमेशा अपने सप्लायर का ‘Filing Status‘ चेक करते रहें, अगर वह GSTR-1 भर रहा है लेकिन 3B नहीं, तो समझ लीजिए कि वह आपको खतरे में डाल रहा है, जो ऊपर हमने आपको बताया।

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GSTR-1 और GSTR-3B का डेटा कहाँ से आता है?

हमने सब कुछ आपको बता दिया है फिर भी GSTR-1 और GSTR-3B का डेटा को समझने के लिए एक टेबल दिया हूं:

सप्लायर का रिटर्नक्या होता है?आपके GSTR-2A/2B पर असर
GSTR-1सप्लायर इसमें हर बिल (इनवॉइस) की जानकारी देता है।जैसे ही सप्लायर बिल चढ़ाएगा, आपके GSTR-2A में दिखने लगेगा।
GSTR-3Bसप्लायर इसमें अपना कुल टैक्स जमा करता है।इसका आपके GSTR-2B में मिलने वाला आईटीसी कन्फर्म होता है।

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निष्कर्ष: और कुछ प्रो टिप्स

GSTR-2B को अपना आधार बनाएं: कानूनी परेशानी से बचने के लिए हमेशा GSTR-2B के हिसाब से ही अपना आईटीसी क्लेम करें, न कि आपके किताबों के हिसाब से।

सप्लायर पर नजर रखें: हर महीने के अंत में चेक करें कि क्या आपके सप्लायर ने अपना पिछला GSTR-3B फाइल किया है या नहीं।

रिकॉन्सिलिएशन (Reconciliation): हर महीने अपनी खरीद का GSTR-2B से मिलान जरूर करें।

GSTR-2A: यह एक डायनेमिक (बदलने वाला) स्टेटमेंट है जो आपके सप्लायर द्वारा बिल अपलोड करते ही रियल टाइम सिस्टम में अपडेट होता रहता है।

GSTR-2B: यह एक स्टैटिक (फिक्स) स्टेटमेंट है जो महीने में एक बार (14 तारीख को) जेनरेट होता है और यह आपके आईटीसी क्लेम करने का असली कारण है।

में उम्मीद करता हूं की आपको GSTR-1, 2A, 2B और 3B इन सबके बीच के संबंध पता चला है, अपने दोस्तों सोशल मीडिया पर इस पोस्ट को शेयर करके उनको भी जानकारी लेने में मदद कीजिए।

GSTR-1 और  GSTR-3B और अच्छे से समझने के लिए यह पोस्ट पढ़ें:- GSTR-1 और GSTR-3B में क्या अंतर है? जानें आसान भाषा में

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