हमारे भारत में हर एक व्यक्ति की इनकम अलग अलग तरीकों से होती है, लेकिन सरकार टैक्स लगाने के लिए इन सभी इनकम को 5 मुख्य कैटेगरी (Heads of Income) में बाँटती है।
आप जब भी वित्तीय वर्ष के अंत में अपना आईटीआर जमा करते हैं, तब आपको अपनी कमाई को इन्हीं पांच टैक्स नामों के हिसाब से दिखाना होता है।
इसीलिए आज इस पोस्ट में हम सरल बातों में समझेंगे कि टैक्स के हिसाब से कितने प्रकार की कमाई होती है? और किस पर कैसे टैक्स लगता है, सभी जानने के लिए आप इस पोस्ट को लास्ट तक पढ़ें।
इस पोस्ट में क्या क्या है?
1. Salary Income (सैलरी से होने वाली कमाई)
अगर आप किसी कंपनी या संस्था में नौकरी करते हैं, तो आपकी कमाई सैलरी से इनकम इस कैटेगरी में आती है, और आपके सैलरी स्लिप में शामिल होता है:-
- Basic Salary
- DA (Dearness Allowance)
- HRA (House Rent Allowance)
- Bonus, Commission
- Leave Encashment
- Pension (कुछ परिस्थितियों में)
तो अब सवाल है सैलरी पर टैक्स कैसे लगता है? आपकी इनकम पर टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है, और इसमें HRA, स्टैंडर्ड डिडक्शन जैसे कई छूट भी मिलती हैं।
2. Income from House Property (घर या प्रॉपर्टी से कमाई)
अगर आपके पास कोई मकान या दुकान है और आप उसे किराए पर देते हैं, तो यह कमाई इसी इनकम फॉर्म हाउस प्रॉपर्टी में आती है, इसमें शामिल होता है:-
- रेट से इनकम
- हाउस पर होम लोन 2 लाख इंटरेस्ट तक बचाब।
तो इसपर टैक्स कैसे लगता है? इस पर भी इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है, लेकिन इसका एक फायदा भी है आपका सालाना इनकम निकालकर आप डायरेक्ट 30% स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा ले सकते है।
यह 30% स्टैंडर्ड डिडक्शन आपको इसलिए मिलता है इसमें सरकार बोलता है कि आप घर की मरम्मत करना, पेंट करना, इंश्योरेंस करना यह सब खर्च में इसको शामिल कर सकते हैं भले ही आपका खर्चा 30% से कम हो।
3. Income from Business or Profession (व्यवसाय या फ्रीलांसिंग या प्रोफेशन से कमाई)
अगर आप खुद का बिज़नेस चलाते हैं, फ्रीलांसर हैं, यूट्यूबर हैं, ड्रॉपशिपिंग करते हैं या प्रोफेशनल (सीए, डॉक्टर, वकील) या अन्य कोई भी हैं आपकी कमाई इसी व्यवसाय या प्रोफेशन से कमाई के अंदर आती है, इसमें शामिल हैं:-
- Business Profit
- Online Income (YouTube, Blogging, Affiliate, Freelancing)
- Professional Fees
- Commission or Agency Income
तो इसमें टैक्स कैसे लगता है? इसमें आपके असली प्रॉफिट के ऊपर अनुमानित स्कीम जैसे (44AD या 44ADA) के तहत भी आप टैक्स जमा कर सकते है।
यह स्कीम छोटे व्यापारी के लिए लाया गया है, अगर आप इन धाराओं को चुनते है तो 44AD में पेमेंट का 6% से 8% और 44ADA में 50% प्रॉफिट के हिसाब से टैक्स जमा कर सकते है, एक टेबल से समझे:-
| धारा | किसके लिए | टर्नओवर के लिमिट | न्यूनतम लाभ दर |
| 44AD | व्यवसायों के लिए | ₹2 करोड़ तक | 6% (डिजिटल लेन-देन) या 8% (नकद लेन-देन) पर |
| 44ADA | पेशेवरों के लिए | ₹75 लाख तक | 50% |
इस पोस्ट से पूरा जाने:- टैक्स नियम में धारा 44AD और 44ADA क्या हैं? (अनुमानित कराधान योजना)
4. Capital Gains (शेयर, जमीन या जायदाद बेचने से कमाई)
जब आप कोई भी अपना रखा हुआ एसेट बेचते हैं और उससे लाभ कमाते हैं, तो इसे कैपिटल गेन कहते हैं, कहाँ से कैपिटल गेन होता है? इसमें शामिल हैं:-
- Shares
- Mutual Funds
- Gold
- Land
- Property
- Digital Assets
कैपिटल गेन के भी दो प्रकार होते हैं:
- Short-Term Capital Gain (STCG) कम समय के लिए रखा गया एसेट।
- Long-Term Capital Gain (LTCG) लम्बे समय तक रखा गया एसेट।
तो टैक्स कैसे लगता है? देखिए इसमें एसेट और होल्डिंग पिरियड के हिसाब से टैक्स रेट बदलता है।
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5. Income from Other Sources (अन्य स्रोतों से आय)
अब तक हमने जितने तरह से कमाई के बारे में ऊपर के चारों लिस्ट में बात किया है जो इसमें में नहीं आती है, वह यहाँ अन्य स्रोतों से आय पर आती है, इसमें शामिल है:-
- Bank FD/RSI Interest
- Saving Account Interest
- Lottery Income
- Gift Income
- Dividend Income
इसमें टैक्स कैसे लगता है? अधिकांश इनकम आपकी टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल होती है।
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भारत सरकार टैक्स क्यों अलग अलग कैटेगरी में बाँटती है?
देश की सरकार इसीलिए टैक्स को अलग अलग कैटेगरी में बटा है ताकि हर तरह की कमाई पर सही टैक्स तय हो सके।
साथ में आईटीआर जमा करने के समय आपकी इनकम का सही तरीका से विभाजित किया जाए, लोग अपने हिसाब से अपने इनकम सोर्स को चूस कर सकें।
और इस नियम बनाने का सबसे बड़ा उद्देश्य यह है ताकि आपको मिलने वाली डिटेक्शन और बेनिफिट सबके काम के हिसाब से अलग अलग और सही तरह से लागू हों।
इस पोस्ट से जाने:- क्या सरकारी नौकरी वालों को भी देना पड़ता है टैक्स? जानें सैलरी पर इनकम टैक्स के नियम और छूटें
टैक्स कितने प्रकार के होते है?
हमारे भारत देश के अंदर टैक्स भी दूं तरह के होता है दोनों है डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स, में आपको छोटा सा उदाहरण से समझता हूं:-
जो आप अपने इनकम से सरकार को खुद टैक्स देते है वह है डायरेक्ट टैक्स इसे इनकम टैक्स भी कहते है, और दूसरा है इनडायरेक्ट टैक्स इसमें आप खुद टैक्स जमा नहीं करते वल्कि दूसरा करता है इसमें सबसे बड़ा नाम है जीएसटी (GST)।
जीएसटी सामान या सेवा के अंदर लगा रहता है जब आप इन्हें खरीदते हैं तब आप टैक्स भी देते है और यह टैक्स कंपनी या सेलर जमा करते है सरकार को यही है इनडायरेक्ट टैक्स।
डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स को पूरा समझने के लिए इस पोस्ट को पढ़ें, हमने पूरा विस्तार से एग्जांपल के साथ लिखा हूं:- डायरेक्ट टैक्स और इनडायरेक्ट टैक्स में क्या अंतर है? जानें सरल भाषा में उदाहरणों के साथ
निष्कर्ष: कमाई के प्रकार के बारे में
अंत में आपको एक बार फिर एक जगह में कहना चाहूंगा भारत में सरकार के टैक्स नियम के हिसाब से कमाई के 5 प्रकार होते हैं:
- Salary Income
- House Property Income
- Business/Profession Income
- Capital Gains
- Other Sources
आपको आईटीआर भरते समय इन सभी को अलग अलग दिखाना जरूरी होता है, ताकि टैक्स सही लगे और आपको जो छूट मिलनी चाहिए वह सही से मिल सके।
मैं उम्मीद करता हूं कि आपको सरकार के हिसाब से कमाई कितने प्रकार के होते हैं? इन पांचों तरीके के बारे में आपको पूरा जानकारी मिली है, अपने दोस्तों और सोशल मीडिया पर इस पोस्ट को शेयर करके उनको भी जानकारी लेने में मदद कीजिए।
इस पोस्ट से जाने:- सैलरी पर लगने वाला टैक्स क्या है? जानें आपकी कमाई पर कौन सा टैक्स लगता है