फ्रीलांसिंग आज के समय में काफी तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन जब बात टैक्सेशन और जीएसटी का आता है, तो फ्रीलांसर अक्सर यह सवाल पूछते हैं (क्या हमें जीएसटी में कंपोजिशन स्कीम का फायदा मिल सकता है?)।
आज इस पोस्ट में हम इस सवाल का सभी जानकारी देंगे और समझेंगे कि कंपोजिशन स्कीम किनके लिए है और क्या फ्रीलांसर इसके अंदर में आते हैं, हम सभी पॉइंट के बारे में बात करेंगे इसलिए आप इस पोस्ट को लास्ट तक पढ़े।
इस पोस्ट में क्या क्या है?
GST में Composition Scheme क्या है?
जीएसटी नियम में कंपोजिशन स्कीम एक आसान टैक्स सिस्टम है, जिसे खासकर छोटे व्यापारियों और दुकानदारों के लिए बनाया गया है।
- इसमें कम टैक्स रेट (1% से 6% तक) लगता है।
- इसका रिटर्न भरना आसान होता है।
- हर महीने जीएसटी रिटर्न फाइल करने की जगह केवल तिमाही रिटर्न भरना होता है।
एक साल में सिर्फ 4 बार, लेकिन इस स्कीम का लाभ हर जीएसटी रजिस्ट्रेशन वाले को नहीं मिलता।
तो किनको मिलती है Composition Scheme?
कंपोजिशन स्कीम का फायदा सिर्फ कुछ खास तरह के कारोबारियों को मिलता है जैसे:
- Goods Suppliers (जैसे किराना, रिटेल, ट्रेडर्स)
- छोटे रेस्टोरेंट (जिनमें शराब सर्व नहीं होती)
- कुछ छोटे मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स
- और इनका सालाना टर्नओवर 1.5 करोड़ से कम होना चाहिए
लेकिन यह स्कीम सर्विस प्रोवाइडर यानी सेवाएं देने वालों के लिए उपलब्ध नहीं है (कुछ खास बातों को छोड़कर)।
क्या Freelancers Composition Scheme ले सकते हैं?
फ्रीलांसर सर्विस प्रोवाइडर के श्रेणी के अंदर आते हैं। चाहे आप:
- कंटेंट राइटिंग
- वेब डेवलपमेंट
- ग्राफिक डिजाइनिंग
- डिजिटल मार्केटिंग
- या कोई भी ऑनलाइन या ऑफ़लाइन सेवा देते हों
तो आपके लिए जीएसटी में कंपोजिशन स्कीम लागू नहीं होती।
तो सर्विस प्रोवाइडर के लिए कौन सी सुविधा है?
सर्विस प्रोवाइडर को डायरेक्ट कंपोजिशन स्कीम नहीं मिलती, लेकिन 2019 में सरकार ने एक नया ऑप्शन दिया था:
- सर्विस प्रोवाइडर (जिनका सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपये तक है)
- वह 6% जीएसटी (3% CGST + 3% SGST) का ऑप्शन चुन सकते हैं।
- इसे Service Composition Scheme या Simplified GST Scheme for सर्विस प्रोवाइडर कहा जाता है।
यह रेगुलर कंपोजिशन स्कीम से पूरा अलग है, लेकिन छोटे फ्रीलांसरों और सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए अच्छा ऑप्शन है।
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फ्रीलांसर के लिए सही जीएसटी ऑप्शन क्या है?
अगर आपकी सालाना कमाई 20 लाख (कुछ राज्यों में 10 लाख) से कम है, तो जीएसटी नंबर लेने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन अगर आपकी कमाई 20 लाख से ऊपर है, तो जीएसटी रजिस्ट्रेशन जरूर करना होगा।
और अगर आपकी कमाई 50 लाख तक है, तो आप 6% वाली सर्विस कंपोजिशन स्कीम चुन सकते हैं, और अपने जेब से 6% जीएसटी सरकार को देना होगा।
लेकिन अगर आपकी कमाई 50 लाख से ज्यादा है, तो आपको रेगुलर जीएसटी सबके तरह 18% लागू होगा।
एक उदाहरण से समझे
मान लीजिए एक आपका फ्रीलांसर सर्विस का टर्नओवर 35 लाख रुपये है, तो आपको नॉर्मल जीएसटी रजिस्ट्रेशन करने पर 18% टैक्स चार्ज करना होगा।
लेकिन अगर आप सर्विस कंपोजिशन स्कीम चुनते है, तो केवल 6% टैक्स लगेगा और आपका कागज़ी काम भी बहुत आसान रहेगा।
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सर्विस कंपोजिशन स्कीम के कुछ नुकसान
देखिए सर्विस कंपोजिशन स्कीम के कुछ नुकसान भी है जैसे आप अपने ग्राहकों से जीएसटी नहीं ले सकते, आपको बिल ऑफ सप्लाई (Bill of Supply) जारी करना होता है और 6% टैक्स अपनी जेब से सरकार को देना होगा।
और आपका सर्विस एक ही राज्य के भीतर होना चाहिए, मतलब कोई भी फ्रीलांसर अंतर्राज्यीय सेवाएं (Interstate Services) या निर्यात सेवाएं (Export Services) प्रदान करता है, तो वह इस स्कीम को नहीं ले सकते।
इस स्कीम में आईटीसी रिफंड नहीं मिलता मतलब अपने सर्विस देने के लिए लिया गया सामान जैसे लैपटॉप, इंटरनेट, सॉफ्टवेयर आदि पर दिए गए (इनपुट टैक्स क्रेडिट) आईटीसी का दावा नहीं कर सकते है।
इसलिए एक एक्सपोर्टर फ्रीलांसरों के लिए रेगुलर जीएसटी स्कीम ही सबसे अच्छा और फायदेमंद ऑप्शन है, क्योंकि आपको आईटीसी भी मिलेगा, ग्राहक के जीएसटी ले सकते है, और दूसरे स्टेट पर भी अपने सर्विस सेल कर सकते है।
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FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. क्या हर फ्रीलांसर को जीएसटी लेना जरूरी है?
नहीं अगर आपकी कमाई 20 लाख से कम है, तो जरूरी नहीं है, लेकिन 20 लाख से ऊपर जाते ही जीएसटी रजिस्ट्रेशन लेना होगा।
Q2. क्या फ्रीलांसर कंपोजिशन स्कीम ले सकते हैं?
जी नहीं नॉर्मल कंपोजिशन स्कीम केवल गुड्स और कुछ खास बिजनेस के लिए बनाया गया है।
Q3. क्या सर्विस कंपोजिशन स्कीम में आईटीसी (Input Tax Credit) मिलता है?
जी नहीं कोई भी कंपोजिशन स्कीम में आईटीसी नहीं मिलता, यह स्कीम केवल आसान टैक्सेशन के लिए बनाया गया है।
Q4. क्या एक्सपोर्ट करने वाले फ्रीलांसर भी कंपोजिशन ले सकते हैं?
एक्सपोर्ट करने वालों के लिए यह स्कीम लागू नहीं होती, उन्हें रेगुलर जीएसटी ही लेना होगा।
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निष्कर्ष: फ्रीलांसरों के लिए कंपोजिशन स्कीम
अंत में अगर आपका सालाना टर्नओवर ₹50 लाख से कम है और आप सिर्फ अपने राज्य के भीतर ही ग्राहकों को सेवाएँ देते हैं, तो आप 6% वाली विशेष कंपोजिशन स्कीम चुन सकते हैं, यह आपका रिटर्न फाइल करने की तरीका को आसान बना देता है।
अगर आप दूसरा स्टेट में या निर्यात सेवाएँ देते हैं तो भले ही आपका टर्नओवर ₹50 लाख से कम हो, आप कंपोजिशन स्कीम नहीं ले सकते आपको रेगुलर जीएसटी में सबके जैसा रजिस्टर कराना होगा और अपनी सेवाओं के लिए 18% जीएसटी लगाना होगा।
में उम्मीद करता हूं की आप फ्रीलांसर के लिए सर्विस कंपोजिशन स्कीम के बारे में पता चला है, अपने दोस्त और सोशल मीडिया पर इस पोस्ट को शेयर कर उनको भी जानकारी लेने में मदद कीजिए।
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